1 ट्रिलियन डॉलर का सरप्लस कारोबार, ट्रंप के टैरिफ को किनारे लगा चीन कैसे बना दुनिया का ट्रेड किंग

बड़े बड़े अरमानों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को टैरिफ की जंग में उलझाया। सपना यह था कि दुनिया की जितनी भी इंडस्ट्रीज हैं, मैन्युफैक्चरिंग है, वो सब अमेरिका शिफ्ट हो जाएंगी। अमेरिका के लोगों को बहुत सारी नौकरियां मिलेंगी और अल्टीमेटली अमेरिकन गवर्नमेंट को बहुत सारा रेवेन्यू आएगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उलट। आलम ये है कि अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन चीन साल के 11वें महीने तक ट्रेड सरप्लस $1 ट्रिलियन को भी क्रॉस कर चुका है। यह पहली बार हुआ है रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस चाइना को हुआ है। एक बात आपको बता दूं कि ऐसा पहली दफा नहीं है कि जब ट्रंप ने टैरिफ कार्ड खेला हो। अपने पहले कार्यकाल में भी वो ऐसा कर चुके हैं। उन्होंने चाइना पर काफी टेरिफ लगाया था। लेकिन चीन सिर्फ इकोनॉमिक डैमेज से बचा नहीं है बल्कि ऐतिहासिक एक्सपोर्ट बूम किया है। मतलब अमेरिका ने जो सोचा था कि चीन का एक्सपोर्ट कम हो जाएगा। चीजें उससे बिल्कुल उलट हुई। वो ऊपर की तरफ गया है और 2025 तक चाइना का ग्लोबल ट्रेड सरप्लस 1.0 1.08 ट्रिलियन को क्रॉस कर गया।इसे भी पढ़ें: क्या है ऑपरेशन CPB? तीन तरफ से भारत को घेरने की प्लानिंग पर सबसे बड़ा खुलासा 2010 के आंकड़ों पर गौर करें तो चीन का ट्रेड सरप्लस 200 बिलियन से भी कम था और धीरे-धीरे करके चीन ने इसको बढ़ाया। अब ये 1 ट्रिलियन डॉलर को क्रॉस कर चुका है। चीन को यह बात समझ में आ गई कि वो अब अमेरिका के ऊपर बहुत लंबे समय तक निर्भर नहीं हो सकता और उसकी वजह से उसने बहुत सारे बाकी के मार्केट्स को ढूंढा। वहां पर एक्सपोर्ट करना स्टार्ट किया। मतलब जो गुड्स पहले अमेरिका जाता था उसके बजाय बाकी के देशों में एक्सपोर्ट करना शुरू किया। जैसे अफ्रीका वहां पर चीन का एक्सपोर्ट 42% बढ़ा हुआ है। यूरोप में 15% बढ़ा हुआ है। लैटिन अमेरिका में भी डबल डिजिट ग्रोथ हुई है। तो यह जो स्ट्रेटेजिक शिफ्ट था इसकी वजह से जो उसको नुकसान हो रहा था यूएस मार्केट से वो उल्टा यहां पर और ज्यादा फायदा होने लग गया।इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने पाक पर लगाया करोड़ों डॉलर का दाँव, बलूचिस्तान के बारूद पर बैठकर सोना खोदेंगे ट्रंप !सप्लाई चेन रीइजीनियरिंगचीन ने बड़ी चालाकी की है कि जो फाइनल असेंबली होती है, उदाहरण के लिए मोबाइल फोन को ले सकते हैं। अब मोबाइल फोन में तो बहुत सारे कॉम्पोनेंट होते हैं। तो ज्यादातर जो कोर कॉम्पोनेंट है वो चीन खुद बना रहा है और जो उसका फाइनल असेंबली होती है उसको बाकी के देशों में कर रहा है। अफ्रीका में यूरोप में ताकि वहां से उसको अमेरिका में एक्सपोर्ट किया जा सके। अमेरिकी टैरिफ को बाइपास करने का जोरदार तरीका चीन ने निकाल लिया। करेंसी एडवांटेजचीन अक्सर एक चालाकी करता है कि अपनी जो करेंसी है उसको थोड़ा सा कमजोर कर देता है जिससे कि उसका एक्सपोर्ट चीपर हो जाए, सस्ता हो जाए और इसकी वजह से वो और ज्यादा कॉम्पिटेटिव हो जाता है और ज्यादा एक्सपोर्ट कर पाता है बाकी के मार्केट्स में।

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Dec 13, 2025 - 13:42
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1 ट्रिलियन डॉलर का सरप्लस कारोबार, ट्रंप के टैरिफ को किनारे लगा चीन कैसे बना दुनिया का ट्रेड किंग

बड़े बड़े अरमानों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को टैरिफ की जंग में उलझाया। सपना यह था कि दुनिया की जितनी भी इंडस्ट्रीज हैं, मैन्युफैक्चरिंग है, वो सब अमेरिका शिफ्ट हो जाएंगी। अमेरिका के लोगों को बहुत सारी नौकरियां मिलेंगी और अल्टीमेटली अमेरिकन गवर्नमेंट को बहुत सारा रेवेन्यू आएगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उलट। आलम ये है कि अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन चीन साल के 11वें महीने तक ट्रेड सरप्लस $1 ट्रिलियन को भी क्रॉस कर चुका है। यह पहली बार हुआ है रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस चाइना को हुआ है। एक बात आपको बता दूं कि ऐसा पहली दफा नहीं है कि जब ट्रंप ने टैरिफ कार्ड खेला हो। अपने पहले कार्यकाल में भी वो ऐसा कर चुके हैं। उन्होंने चाइना पर काफी टेरिफ लगाया था। लेकिन चीन सिर्फ इकोनॉमिक डैमेज से बचा नहीं है बल्कि ऐतिहासिक एक्सपोर्ट बूम किया है। मतलब अमेरिका ने जो सोचा था कि चीन का एक्सपोर्ट कम हो जाएगा। चीजें उससे बिल्कुल उलट हुई। वो ऊपर की तरफ गया है और 2025 तक चाइना का ग्लोबल ट्रेड सरप्लस 1.0 1.08 ट्रिलियन को क्रॉस कर गया।

इसे भी पढ़ें: क्या है ऑपरेशन CPB? तीन तरफ से भारत को घेरने की प्लानिंग पर सबसे बड़ा खुलासा

2010 के आंकड़ों पर गौर करें तो चीन का ट्रेड सरप्लस 200 बिलियन से भी कम था और धीरे-धीरे करके चीन ने इसको बढ़ाया। अब ये 1 ट्रिलियन डॉलर को क्रॉस कर चुका है। चीन को यह बात समझ में आ गई कि वो अब अमेरिका के ऊपर बहुत लंबे समय तक निर्भर नहीं हो सकता और उसकी वजह से उसने बहुत सारे बाकी के मार्केट्स को ढूंढा। वहां पर एक्सपोर्ट करना स्टार्ट किया। मतलब जो गुड्स पहले अमेरिका जाता था उसके बजाय बाकी के देशों में एक्सपोर्ट करना शुरू किया। जैसे अफ्रीका वहां पर चीन का एक्सपोर्ट 42% बढ़ा हुआ है। यूरोप में 15% बढ़ा हुआ है। लैटिन अमेरिका में भी डबल डिजिट ग्रोथ हुई है। तो यह जो स्ट्रेटेजिक शिफ्ट था इसकी वजह से जो उसको नुकसान हो रहा था यूएस मार्केट से वो उल्टा यहां पर और ज्यादा फायदा होने लग गया।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने पाक पर लगाया करोड़ों डॉलर का दाँव, बलूचिस्तान के बारूद पर बैठकर सोना खोदेंगे ट्रंप !

सप्लाई चेन रीइजीनियरिंग

चीन ने बड़ी चालाकी की है कि जो फाइनल असेंबली होती है, उदाहरण के लिए मोबाइल फोन को ले सकते हैं। अब मोबाइल फोन में तो बहुत सारे कॉम्पोनेंट होते हैं। तो ज्यादातर जो कोर कॉम्पोनेंट है वो चीन खुद बना रहा है और जो उसका फाइनल असेंबली होती है उसको बाकी के देशों में कर रहा है। अफ्रीका में यूरोप में ताकि वहां से उसको अमेरिका में एक्सपोर्ट किया जा सके। अमेरिकी टैरिफ को बाइपास करने का जोरदार तरीका चीन ने निकाल लिया।

करेंसी एडवांटेज

चीन अक्सर एक चालाकी करता है कि अपनी जो करेंसी है उसको थोड़ा सा कमजोर कर देता है जिससे कि उसका एक्सपोर्ट चीपर हो जाए, सस्ता हो जाए और इसकी वजह से वो और ज्यादा कॉम्पिटेटिव हो जाता है और ज्यादा एक्सपोर्ट कर पाता है बाकी के मार्केट्स में।

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