हर साल, दो अरब टन रेत व धूल समा जाती है वायुमंडल में, क्या हैं प्रभाव
हमने धूल भरे तूफ़ान तो बहुत आते देखे हैं और जब वो हमारी आँखों व आसमान को धुँधला करते हैं तब हमें इनकी गम्भीरता का अहसास होता है. मगर ये सवाल अक्सर परेशान करता है कि ये रेत व धूल कहाँ से आते हैं और तूफ़ान ठंडा पड़ जाने के बाद वो कहाँ चले जाते हैं? तो इस सवाल का जवाब जलवायु वैज्ञानिकों के पास है. हर साल दो अरब टन से ज़्यादा रेत व धूल के महीन कण, वायुमंडल में दाख़िल होते हैं, जो किसी सीमा तक नहीं रुककर, पूरी दुनिया में फैलते हैं.
हमने धूल भरे तूफ़ान तो बहुत आते देखे हैं और जब वो हमारी आँखों व आसमान को धुँधला करते हैं तब हमें इनकी गम्भीरता का अहसास होता है. मगर ये सवाल अक्सर परेशान करता है कि ये रेत व धूल कहाँ से आते हैं और तूफ़ान ठंडा पड़ जाने के बाद वो कहाँ चले जाते हैं? तो इस सवाल का जवाब जलवायु वैज्ञानिकों के पास है. हर साल दो अरब टन से ज़्यादा रेत व धूल के महीन कण, वायुमंडल में दाख़िल होते हैं, जो किसी सीमा तक नहीं रुककर, पूरी दुनिया में फैलते हैं.