व्यापार घाटे पर राहत, पर Middle East संकट ने बढ़ाई टेंशन, Indian Exports पर मंडराया खतरा

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के व्यापार से जुड़ी ताजा स्थिति सामने आई है। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी महीने में देश का व्यापार घाटा पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है, हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भविष्य को लेकर आशंका बनी हुई है।बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में भारत का व्यापार घाटा घटकर लगभग 27.1 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले जनवरी में यह आंकड़ा करीब 34.68 अरब डॉलर था।गौरतलब है कि अर्थशास्त्रियों ने फरवरी में व्यापार घाटा लगभग 28.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे थोड़ा बेहतर रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में भारत का माल निर्यात हल्की बढ़त के साथ लगभग 36.61 अरब डॉलर रहा, जबकि जनवरी में यह लगभग 36.56 अरब डॉलर था। दूसरी ओर आयात में गिरावट दर्ज हुई और यह लगभग 63.71 अरब डॉलर रहा, जो जनवरी में करीब 71.24 अरब डॉलर था।विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत के निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बन सकता है। गौरतलब है कि होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा का असर कई देशों के व्यापार पर पड़ता है।मौजूद जानकारी के अनुसार इस मार्ग में बाधा के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस, चावल और उर्वरक जैसे सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। भारत सरकार के व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने भी स्वीकार किया है कि इस वर्ष भारतीय निर्यात के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण परिवहन और आपूर्ति से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।गौरतलब है कि भारत का पश्चिम एशिया के साथ व्यापार काफी बड़ा माना जाता है। अनुमान के अनुसार हर वर्ष करीब 100 अरब डॉलर का सामान इस क्षेत्र के देशों के साथ व्यापार में शामिल रहता है।मौजूद जानकारी के अनुसार लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार दोनों पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जबकि घरेलू गैस की जरूरतों का भी बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है।इसी बीच सरकार ने आम लोगों से रसोई गैस सिलेंडर की घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की है। साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक आर्थिक स्थिरता कोष बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। बता दें कि भारत ने हाल के दिनों में रूस से तेल की खरीद भी बढ़ाई है। मौजूद जानकारी के अनुसार कुछ समय के लिए लगाए गए प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद संभव हो पाई है।इसके अलावा सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यापार के आंकड़े भी सामने आए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में सेवा क्षेत्र का निर्यात लगभग 31.65 अरब डॉलर और आयात लगभग 14.51 अरब डॉलर रहा, जिससे इस क्षेत्र में करीब 17.14 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज हुआ है।गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार हाल में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद कई देशों पर लगाए गए कुछ शुल्क कम हुए हैं, जिससे भारत के वस्त्र, आभूषण और खाद्य उत्पादों के निर्यात को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।हालांकि नीति निर्माताओं को इस बात की चिंता भी है कि अमेरिका द्वारा औद्योगिक क्षमता से जुड़े नए जांच कदमों का असर आने वाले समय में निर्यात पर पड़ सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में अमेरिका को भारत का निर्यात लगभग 3.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 6.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे यह बाजार अभी भी भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात की जगह में बना हुआ है।

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Mar 17, 2026 - 10:42
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व्यापार घाटे पर राहत, पर Middle East संकट ने बढ़ाई टेंशन, Indian Exports पर मंडराया खतरा
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के व्यापार से जुड़ी ताजा स्थिति सामने आई है। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी महीने में देश का व्यापार घाटा पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है, हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भविष्य को लेकर आशंका बनी हुई है।

बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में भारत का व्यापार घाटा घटकर लगभग 27.1 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले जनवरी में यह आंकड़ा करीब 34.68 अरब डॉलर था।

गौरतलब है कि अर्थशास्त्रियों ने फरवरी में व्यापार घाटा लगभग 28.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे थोड़ा बेहतर रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में भारत का माल निर्यात हल्की बढ़त के साथ लगभग 36.61 अरब डॉलर रहा, जबकि जनवरी में यह लगभग 36.56 अरब डॉलर था। दूसरी ओर आयात में गिरावट दर्ज हुई और यह लगभग 63.71 अरब डॉलर रहा, जो जनवरी में करीब 71.24 अरब डॉलर था।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत के निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बन सकता है। गौरतलब है कि होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा का असर कई देशों के व्यापार पर पड़ता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार इस मार्ग में बाधा के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस, चावल और उर्वरक जैसे सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। भारत सरकार के व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने भी स्वीकार किया है कि इस वर्ष भारतीय निर्यात के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण परिवहन और आपूर्ति से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि भारत का पश्चिम एशिया के साथ व्यापार काफी बड़ा माना जाता है। अनुमान के अनुसार हर वर्ष करीब 100 अरब डॉलर का सामान इस क्षेत्र के देशों के साथ व्यापार में शामिल रहता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार दोनों पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जबकि घरेलू गैस की जरूरतों का भी बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है।

इसी बीच सरकार ने आम लोगों से रसोई गैस सिलेंडर की घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की है। साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक आर्थिक स्थिरता कोष बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। बता दें कि भारत ने हाल के दिनों में रूस से तेल की खरीद भी बढ़ाई है। मौजूद जानकारी के अनुसार कुछ समय के लिए लगाए गए प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद संभव हो पाई है।

इसके अलावा सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यापार के आंकड़े भी सामने आए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में सेवा क्षेत्र का निर्यात लगभग 31.65 अरब डॉलर और आयात लगभग 14.51 अरब डॉलर रहा, जिससे इस क्षेत्र में करीब 17.14 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज हुआ है।

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार हाल में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद कई देशों पर लगाए गए कुछ शुल्क कम हुए हैं, जिससे भारत के वस्त्र, आभूषण और खाद्य उत्पादों के निर्यात को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि नीति निर्माताओं को इस बात की चिंता भी है कि अमेरिका द्वारा औद्योगिक क्षमता से जुड़े नए जांच कदमों का असर आने वाले समय में निर्यात पर पड़ सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी में अमेरिका को भारत का निर्यात लगभग 3.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 6.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे यह बाजार अभी भी भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात की जगह में बना हुआ है।

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