वर्दी उतारकर लड़ो चुनाव...Pakistan में सेना-सियासत में घमासान, Maulana Fazlur Rehman की Asim Munir को सीधी चुनौती

पाकिस्तान के सीनियर नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने देश की मिलिट्री लीडरशिप की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने के लिए आम नागरिकों के हथियारबंद गुट बनाने की मांग को खारिज कर दिया और सेना के नेताओं को चुनौती दी कि अगर वे राजनीतिक प्रभाव चाहते हैं, तो चुनावी राजनीति में आएं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में रहमान ने कहा कि देश की रक्षा की जिम्मेदारी सरकारी संस्थानों की है, न कि आम नागरिकों की। आप मुझ पर अपने खून के एहसान की बात क्यों करते हैं? आप हमारे खून-पसीने की कमाई से दिए गए टैक्स से अपनी सैलरी लेते हैं, और फिर हमसे कहते हैं कि हम मिलिशिया बनाएं और हथियारबंद गुटों से लड़ें। मैंने कोई सैलरी नहीं ली है। मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा।इसे भी पढ़ें: युद्ध पर पाकिस्तान में इमरजेंसी मीटिंग, भारत ने किया बड़ा धमाका!रहमान ने आगे कहा कि आप तो चले जाएंगे, लेकिन आप मेरे देश को आने वाली पीढ़ियों के लिए आपसी दुश्मनी की ओर धकेल रहे हैं, इसे हमेशा के लिए हत्या और लूटपाट की ओर धकेल रहे हैं। पाकिस्तान के अनुभवी नेता ने पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्हें चुनौती दी कि वे अपनी सैन्य वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा कि अगर आप राजनीति करना चाहते हैं, तो वर्दी उतारकर आएं; चुनाव में हिस्सा लें और तब यह साफ हो जाएगा कि लोग वर्दी वालों को कितने वोट देते हैं। पाकिस्तान की राजनीति पर सेना के कथित असर की ओर इशारा करते हुए रहमान ने कहा, "जिसे चाहें उसे सत्ता सौंपना और जिससे चाहें उससे सत्ता छीन लेना आपका विशेषाधिकार है।  इसे भी पढ़ें: PoK में Pakistan की बर्बरता से भुखमरी, नेता सरदार अमान ने लगाई गुहार- भारत हमारी मदद करेरहमान की तीखी आलोचना आसिम मुनीर के उस आह्वान के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी नागरिकों से आतंकवादी समूहों के खिलाफ लड़ाई में सेना का साथ देने की अपील की थी। मुनीर ने कहा था कि व्यापक जनसमर्थन के बिना सशस्त्र बल अकेले आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते। इस अपील को खारिज करते हुए रहमान ने जोर देकर कहा कि नागरिकों से मिलिशिया बनाने का आग्रह करना केवल हिंसा और व्यक्तिगत प्रतिशोध के दीर्घकालिक चक्रों को बढ़ावा देगा, और तर्क दिया कि आतंकवाद विरोधी अभियान राज्य की जिम्मेदारी है।इसे भी पढ़ें: Pakistan में अजब फैसला! Army Chief आसिम मुनीर अब देश की Population पर भी लगाएंगे लगामरहमान ने बार-बार पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और उसकी नीतियों की आलोचना की है। इससे पहले, उन्होंने मुनीर को अफगानिस्तान में पाकिस्तान के सैन्य अभियानों और ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के सीमा पार हमलों की आलोचना पर विरोधाभासी रुख अपनाने के लिए निशाना बनाया था। अफगानिस्तान के साथ अपनी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए, रहमान ने सरकार के ऐसे अभियानों के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा था कि यदि आप अफगानिस्तान पर हमला करने को यह कहकर उचित ठहराते हैं कि आप वहां अपने दुश्मन को निशाना बना रहे हैं, तो जब भारत बहावलपुर और मुरीद (पाकिस्तान के अंदर) में अपने दुश्मन को निशाना बनाता है तो आप आपत्ति क्यों जताते हैं?

PNSPNS
Jul 13, 2026 - 14:52
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वर्दी उतारकर लड़ो चुनाव...Pakistan में सेना-सियासत में घमासान, Maulana Fazlur Rehman की Asim Munir को सीधी चुनौती
पाकिस्तान के सीनियर नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने देश की मिलिट्री लीडरशिप की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने के लिए आम नागरिकों के हथियारबंद गुट बनाने की मांग को खारिज कर दिया और सेना के नेताओं को चुनौती दी कि अगर वे राजनीतिक प्रभाव चाहते हैं, तो चुनावी राजनीति में आएं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में रहमान ने कहा कि देश की रक्षा की जिम्मेदारी सरकारी संस्थानों की है, न कि आम नागरिकों की। आप मुझ पर अपने खून के एहसान की बात क्यों करते हैं? आप हमारे खून-पसीने की कमाई से दिए गए टैक्स से अपनी सैलरी लेते हैं, और फिर हमसे कहते हैं कि हम मिलिशिया बनाएं और हथियारबंद गुटों से लड़ें। मैंने कोई सैलरी नहीं ली है। मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा।

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रहमान ने आगे कहा कि आप तो चले जाएंगे, लेकिन आप मेरे देश को आने वाली पीढ़ियों के लिए आपसी दुश्मनी की ओर धकेल रहे हैं, इसे हमेशा के लिए हत्या और लूटपाट की ओर धकेल रहे हैं। पाकिस्तान के अनुभवी नेता ने पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्हें चुनौती दी कि वे अपनी सैन्य वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा कि अगर आप राजनीति करना चाहते हैं, तो वर्दी उतारकर आएं; चुनाव में हिस्सा लें और तब यह साफ हो जाएगा कि लोग वर्दी वालों को कितने वोट देते हैं। पाकिस्तान की राजनीति पर सेना के कथित असर की ओर इशारा करते हुए रहमान ने कहा, "जिसे चाहें उसे सत्ता सौंपना और जिससे चाहें उससे सत्ता छीन लेना आपका विशेषाधिकार है।  

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रहमान की तीखी आलोचना आसिम मुनीर के उस आह्वान के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी नागरिकों से आतंकवादी समूहों के खिलाफ लड़ाई में सेना का साथ देने की अपील की थी। मुनीर ने कहा था कि व्यापक जनसमर्थन के बिना सशस्त्र बल अकेले आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते। इस अपील को खारिज करते हुए रहमान ने जोर देकर कहा कि नागरिकों से मिलिशिया बनाने का आग्रह करना केवल हिंसा और व्यक्तिगत प्रतिशोध के दीर्घकालिक चक्रों को बढ़ावा देगा, और तर्क दिया कि आतंकवाद विरोधी अभियान राज्य की जिम्मेदारी है।

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रहमान ने बार-बार पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और उसकी नीतियों की आलोचना की है। इससे पहले, उन्होंने मुनीर को अफगानिस्तान में पाकिस्तान के सैन्य अभियानों और ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के सीमा पार हमलों की आलोचना पर विरोधाभासी रुख अपनाने के लिए निशाना बनाया था। अफगानिस्तान के साथ अपनी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए, रहमान ने सरकार के ऐसे अभियानों के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा था कि यदि आप अफगानिस्तान पर हमला करने को यह कहकर उचित ठहराते हैं कि आप वहां अपने दुश्मन को निशाना बना रहे हैं, तो जब भारत बहावलपुर और मुरीद (पाकिस्तान के अंदर) में अपने दुश्मन को निशाना बनाता है तो आप आपत्ति क्यों जताते हैं?

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