महात्मा फुले शताब्दी की समिति में साहित्यकार नीरजा माधव मनोनीत

भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च महिला नागरिक सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2021 से सम्मानित एवं देश की जानी-मानी साहित्यकार डॉ नीरजा माधव प्रधानमंत्री के चेयरमैनशिप के अंतर्गत बनी उच्च स्तरीय समिति की सदस्य बनाई गई हैं। यह समिति प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महात्मा ज्योतिबा फुले के दो सौवीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु बनाई गई है।यह सूचना नीरजा माधव को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली, के संयुक्त सचिव की ओर से प्राप्त हुई है। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक पहचान बना चुकीं नीरजा माधव को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के बुक प्रमोशन काउंसिल में भी लेखक सदस्य के रूप में नामित किया गया है। साथ ही वे उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा कबीर अकादमी की शासी सदस्य भी बनाई गई हैं। इसके पूर्व वे भारत सरकार द्वारा एनबीटी की न्यासी सदस्य भी रह चुकी हैं।उनके उपन्यास और कहानियां विभिन्न विश्वविद्यालयों और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों में शामिल किए गए हैं। डॉ नीरजा माधव के साहित्य पर देशभर के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुए हैं और हो रहे हैं।

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Apr 19, 2026 - 06:20
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महात्मा फुले शताब्दी की समिति में साहित्यकार नीरजा माधव मनोनीत
भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च महिला नागरिक सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2021 से सम्मानित एवं देश की जानी-मानी साहित्यकार डॉ नीरजा माधव प्रधानमंत्री के चेयरमैनशिप के अंतर्गत बनी उच्च स्तरीय समिति की सदस्य बनाई गई हैं। यह समिति प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महात्मा ज्योतिबा फुले के दो सौवीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में दो वर्षीय राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु बनाई गई है।

यह सूचना नीरजा माधव को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली, के संयुक्त सचिव की ओर से प्राप्त हुई है। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक पहचान बना चुकीं नीरजा माधव को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के बुक प्रमोशन काउंसिल में भी लेखक सदस्य के रूप में नामित किया गया है। साथ ही वे उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा कबीर अकादमी की शासी सदस्य भी बनाई गई हैं। इसके पूर्व वे भारत सरकार द्वारा एनबीटी की न्यासी सदस्य भी रह चुकी हैं।

उनके उपन्यास और कहानियां विभिन्न विश्वविद्यालयों और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों में शामिल किए गए हैं। डॉ नीरजा माधव के साहित्य पर देशभर के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुए हैं और हो रहे हैं।

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