भारत के Manufacturing पर Global Giant Maersk का भरोसा, 1000 नए Containers का ऑर्डर दिया

भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को समुद्री व्यापार के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। वैश्विक समुद्री परिवहन कंपनी मर्स्क ने भारत में बने 1,000 अतिरिक्त माल ढुलाई कंटेनरों का ऑर्डर दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला भारतीय कंटेनर निर्माण उद्योग पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे का संकेत है और इससे देश की वैश्विक समुद्री व्यापार श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी।यह घोषणा उस अवसर पर की गई जब केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में मर्स्क के लिए भारत में निर्मित पहले निर्यात-आयात माल ढुलाई कंटेनर का अनावरण किया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान ही मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम समूह को 1,000 अतिरिक्त कंटेनरों का नया ऑर्डर भी सौंपा।बता दें कि यह ऑर्डर केवल एक व्यावसायिक सौदा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत और मर्स्क के बीच लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक समुद्री आपूर्ति श्रृंखला और कंटेनर निर्माण उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कई ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां पहले विदेशी उत्पादों पर अधिक निर्भरता थी। माल ढुलाई कंटेनर निर्माण भी ऐसा ही एक क्षेत्र रहा है, जिसमें अब भारत अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, इस उपलब्धि की नींव फरवरी 2025 में रखी गई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कंपनी से भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण उद्योग विकसित करने में सहयोग करने का आग्रह किया था।सरकार का कहना है कि केवल 16 महीनों के भीतर यह पहल वास्तविकता में बदल गई। अब भारत में तैयार पहला अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला निर्यात-आयात माल ढुलाई कंटेनर तैयार होकर वैश्विक कंपनी को सौंपा गया है। इसे सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्वसनीय विनिर्माण और समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उनके अनुसार, दुनिया की अग्रणी समुद्री परिवहन कंपनी के लिए भारत में बने पहले निर्यात-आयात कंटेनर का तैयार होना देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक उत्पाद के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय उद्योगों की बढ़ती क्षमता, आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता पर दुनिया के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कंटेनर निर्माण बढ़ने से देश के निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। अब तक बड़ी संख्या में कंटेनर विदेशों से मंगाने पड़ते थे, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते थे। घरेलू स्तर पर कंटेनर बनने से परिवहन क्षेत्र को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी मजबूत होगी।मौजूद जानकारी के अनुसार, मर्स्क की ओर से मिला यह बड़ा ऑर्डर आने वाले समय में अन्य वैश्विक कंपनियों का भी भरोसा बढ़ा सकता है। यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में बने कंटेनरों का उपयोग बढ़ाती हैं, तो देश वैश्विक कंटेनर निर्माण और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने में सफल हो सकता है।

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Jul 7, 2026 - 09:10
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भारत के Manufacturing पर Global Giant Maersk का भरोसा, 1000 नए Containers का ऑर्डर दिया
भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को समुद्री व्यापार के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। वैश्विक समुद्री परिवहन कंपनी मर्स्क ने भारत में बने 1,000 अतिरिक्त माल ढुलाई कंटेनरों का ऑर्डर दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला भारतीय कंटेनर निर्माण उद्योग पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे का संकेत है और इससे देश की वैश्विक समुद्री व्यापार श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी।

यह घोषणा उस अवसर पर की गई जब केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में मर्स्क के लिए भारत में निर्मित पहले निर्यात-आयात माल ढुलाई कंटेनर का अनावरण किया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान ही मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम समूह को 1,000 अतिरिक्त कंटेनरों का नया ऑर्डर भी सौंपा।

बता दें कि यह ऑर्डर केवल एक व्यावसायिक सौदा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत और मर्स्क के बीच लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक समुद्री आपूर्ति श्रृंखला और कंटेनर निर्माण उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कई ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां पहले विदेशी उत्पादों पर अधिक निर्भरता थी। माल ढुलाई कंटेनर निर्माण भी ऐसा ही एक क्षेत्र रहा है, जिसमें अब भारत अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस उपलब्धि की नींव फरवरी 2025 में रखी गई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कंपनी से भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण उद्योग विकसित करने में सहयोग करने का आग्रह किया था।

सरकार का कहना है कि केवल 16 महीनों के भीतर यह पहल वास्तविकता में बदल गई। अब भारत में तैयार पहला अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला निर्यात-आयात माल ढुलाई कंटेनर तैयार होकर वैश्विक कंपनी को सौंपा गया है। इसे सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्वसनीय विनिर्माण और समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उनके अनुसार, दुनिया की अग्रणी समुद्री परिवहन कंपनी के लिए भारत में बने पहले निर्यात-आयात कंटेनर का तैयार होना देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक उत्पाद के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय उद्योगों की बढ़ती क्षमता, आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता पर दुनिया के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कंटेनर निर्माण बढ़ने से देश के निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। अब तक बड़ी संख्या में कंटेनर विदेशों से मंगाने पड़ते थे, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते थे। घरेलू स्तर पर कंटेनर बनने से परिवहन क्षेत्र को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी मजबूत होगी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मर्स्क की ओर से मिला यह बड़ा ऑर्डर आने वाले समय में अन्य वैश्विक कंपनियों का भी भरोसा बढ़ा सकता है। यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में बने कंटेनरों का उपयोग बढ़ाती हैं, तो देश वैश्विक कंटेनर निर्माण और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने में सफल हो सकता है।

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