बिहार चुनाव तक विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक लगाई जाए: तेजस्वी यादव

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग से सोमवार को आग्रह किया कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यादव ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सहयोगियों की उपस्थिति में यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह मांग की। पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने दावा किया, ‘‘इस कवायद को चुनावों तक रोक देना चाहिए। निर्वाचन आयोग को बूथ स्तर के अपने अधिकारियों से बात करनी चाहिए, जिन्हें डेटा एकत्र करते समय मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि आधार कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड, जो अधिकतर लोगों के पास उपलब्ध हैं, को स्वीकार्य पहचान प्रमाण की सूची से बाहर रखे जाने से लोगों को काफी असुविधा हो रही है। यादव ने कहा, ‘‘यह हैरान करने वाली बात है कि आधार कार्ड, जो बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद बनाए जाते हैं और जिन्हें निर्वाचन आयोग संबंधित मतदाता पहचान पत्रों से जोड़ने का इरादा रखता है, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा है।’’ उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले मतदाताओं का विधानसभा क्षेत्रवार ब्योरा दैनिक आधार पर जारी करने को कहा। उन्होंने यह भी मांग की कि उन ‘‘स्वयंसेवकों’’ का ब्योरा प्रकाशित किया जाए जो निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार बीएलओ की सहायता कर रहे हैं। यादव ने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को स्वयंसेवक के रूप में स्वीकार करने के पीछे क्या मानदंड है, इसका भी खुलासा किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी चिंताओं को उठाते रहे हैं। हमने समय पर हस्तक्षेप के लिए उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया है।

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Jul 8, 2025 - 04:30
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बिहार चुनाव तक विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक लगाई जाए: तेजस्वी यादव

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग से सोमवार को आग्रह किया कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए।

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यादव ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सहयोगियों की उपस्थिति में यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह मांग की। पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने दावा किया, ‘‘इस कवायद को चुनावों तक रोक देना चाहिए। निर्वाचन आयोग को बूथ स्तर के अपने अधिकारियों से बात करनी चाहिए, जिन्हें डेटा एकत्र करते समय मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा कि आधार कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड, जो अधिकतर लोगों के पास उपलब्ध हैं, को स्वीकार्य पहचान प्रमाण की सूची से बाहर रखे जाने से लोगों को काफी असुविधा हो रही है।

यादव ने कहा, ‘‘यह हैरान करने वाली बात है कि आधार कार्ड, जो बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद बनाए जाते हैं और जिन्हें निर्वाचन आयोग संबंधित मतदाता पहचान पत्रों से जोड़ने का इरादा रखता है, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा है।’’

उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले मतदाताओं का विधानसभा क्षेत्रवार ब्योरा दैनिक आधार पर जारी करने को कहा। उन्होंने यह भी मांग की कि उन ‘‘स्वयंसेवकों’’ का ब्योरा प्रकाशित किया जाए जो निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार बीएलओ की सहायता कर रहे हैं।

यादव ने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को स्वयंसेवक के रूप में स्वीकार करने के पीछे क्या मानदंड है, इसका भी खुलासा किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी चिंताओं को उठाते रहे हैं। हमने समय पर हस्तक्षेप के लिए उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया है।

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