पहचान छिपाकर व्यवसाय करना हर दृष्टि से गलत:स्वामी रामदेव

कांवड़ यात्रा मार्ग पर खान-पान की दुकानों पर अपना नाम प्रदर्शित किये जाने का समर्थन करते हुए योग गुरु बाबा स्वामी रामदेव ने रविवार को कहा कि पहचान छिपाकर व्यवसाय करना हर दृष्टि से गलत है। रामदेव ने यहां कहा कि उन्हें अपने हिंदू और सनातनी होने पर गर्व है, ठीक उसी तरह मुसलमानों को भी अपने मुसलमान होने पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने पूछा, ‘‘आखिर क्या वजह है कि मुसलमान नाम छिपाकर कांवड़ यात्रा में व्यवसाय कर रहे हैं। पहचान छिपाना नैतिक और धार्मिक, हर दृष्टि से गलत है।’’ रामदेव ने कहा कि यह तो ग्राहक को तय करना है कि वह किसकी दुकान पर जाएं। उन्होंने कहा,‘‘मुझे जैसे हिन्दू और सनातनी होने पर गर्व है उसी तरह से मुसलमानों को भी मुसलमान होने पर गर्व होना चाहिए।’’ रामदेव ने कहा कि उनके (मुसलमानों के) भी पूर्वज हिंदू थे। महाराष्ट्र में हिंदीभाषियों के साथ मारपीट किये जाने को योग गुरु ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रके साथ मराठी एवं अन्य भाषाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन भाषा, जाति, वर्ग संप्रदाय एवं लिंग के आधार पर हिंदुओं को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इससे सनातन, राष्ट्रीय अखंडता और एकता को क्षति पहुंचती है। हम सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए।

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Jul 7, 2025 - 04:30
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पहचान छिपाकर व्यवसाय करना हर दृष्टि से गलत:स्वामी रामदेव

कांवड़ यात्रा मार्ग पर खान-पान की दुकानों पर अपना नाम प्रदर्शित किये जाने का समर्थन करते हुए योग गुरु बाबा स्वामी रामदेव ने रविवार को कहा कि पहचान छिपाकर व्यवसाय करना हर दृष्टि से गलत है। रामदेव ने यहां कहा कि उन्हें अपने हिंदू और सनातनी होने पर गर्व है, ठीक उसी तरह मुसलमानों को भी अपने मुसलमान होने पर गर्व होना चाहिए।

उन्होंने पूछा, ‘‘आखिर क्या वजह है कि मुसलमान नाम छिपाकर कांवड़ यात्रा में व्यवसाय कर रहे हैं। पहचान छिपाना नैतिक और धार्मिक, हर दृष्टि से गलत है।’’ रामदेव ने कहा कि यह तो ग्राहक को तय करना है कि वह किसकी दुकान पर जाएं।

उन्होंने कहा,‘‘मुझे जैसे हिन्दू और सनातनी होने पर गर्व है उसी तरह से मुसलमानों को भी मुसलमान होने पर गर्व होना चाहिए।’’ रामदेव ने कहा कि उनके (मुसलमानों के) भी पूर्वज हिंदू थे। महाराष्ट्र में हिंदीभाषियों के साथ मारपीट किये जाने को योग गुरु ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रके साथ मराठी एवं अन्य भाषाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन भाषा, जाति, वर्ग संप्रदाय एवं लिंग के आधार पर हिंदुओं को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इससे सनातन, राष्ट्रीय अखंडता और एकता को क्षति पहुंचती है। हम सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए।

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