दोषसिद्धि दर अदालतों के कामकाज का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब नहीं: Arjun Meghwal

 सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि दोषसिद्धि दर अदालतों के कामकाज का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब नहीं होती और इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी घटकों को ध्यान में रखते हुए समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि दोषसिद्धि दर में पुलिस, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और वकीलों आदि की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। त्वरित अदालतों (फास्ट ट्रैक अदालतों.... एफटीसी) में कथित रूप से घटती दोषसिद्धि दर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अदालतें कानून के अनुसार न्याय देने के लिए बाध्य होती हैं और इसमें आरोपी को बरी किया जाना भी शामिल हो सकता है। न्यायाधीशों, अभियोजकों और अदालतों के कर्मचारियों की भर्ती का उल्लेख करते हुए मेघवाल ने कहा कि त्वरित अदालतों सहित जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पदों को भरना संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे के तहत संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधानके साथ अनुच्छेद 233 और 234 के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार, संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें अपने-अपने उच्च न्यायालयों से परामर्श कर न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति से संबंधित नियम बनाती हैं।

PNSPNS
Jan 30, 2026 - 10:10
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दोषसिद्धि दर अदालतों के कामकाज का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब नहीं: Arjun Meghwal

 सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि दोषसिद्धि दर अदालतों के कामकाज का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब नहीं होती और इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी घटकों को ध्यान में रखते हुए समग्र रूप से देखा जाना चाहिए।

राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि दोषसिद्धि दर में पुलिस, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और वकीलों आदि की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

त्वरित अदालतों (फास्ट ट्रैक अदालतों.... एफटीसी) में कथित रूप से घटती दोषसिद्धि दर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अदालतें कानून के अनुसार न्याय देने के लिए बाध्य होती हैं और इसमें आरोपी को बरी किया जाना भी शामिल हो सकता है।

न्यायाधीशों, अभियोजकों और अदालतों के कर्मचारियों की भर्ती का उल्लेख करते हुए मेघवाल ने कहा कि त्वरित अदालतों सहित जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पदों को भरना संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे के तहत संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधानके साथ अनुच्छेद 233 और 234 के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार, संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें अपने-अपने उच्च न्यायालयों से परामर्श कर न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और नियुक्ति से संबंधित नियम बनाती हैं।

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