दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। लेकिन अब उसी अमेरिका को अफगानिस्तान से खुली चुनौती मिल रही है। जिस तालिबान को कभी अमेरिकी सेना ने दो दशक तक खत्म करने की कोशिश की। आज वही तालीबान अमेरिका के दावों पर तंज कस रहा है। दरअसल तालिबान सरकार के सूचना एवं संस्कृति मंत्री मुहाजिर फराही ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसमें ट्रंप ने अफगानिस्तान के रणनीतिक बगराम एयरबेस पर दोबारा अमेरिकी कंट्रोल की बात कही थी। फराही ने कहा कि ट्रंप बगराम एयरबेस सिर्फ अपने सपनों में ही हासिल कर सकते हैं। अमेरिकी सेना का वह दौर खत्म हो चुका है और अब यह बेस उनकी पहुंच से बाहर है। यह बयान ऐसे समय में आया जब ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका को बगराम एयरबेस दोबारा अपने कंट्रोल में लेना चाहिए।
ट्रंप का तर्क है कि यह एयरबेस चीन के बेहद करीब स्थित है और इंडोपेसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी के लिए बेहद अहम है। अगर अमेरिका के पास बगराम एयरबेस होता तो वह चीन की गतिविधियों पर ज्यादा प्रभावी तरीके से नजर रख सकेगा। दरअसल बगराम एयरबेस अफगानिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा माना जाता है। इसे सोवियत संघ ने अपने दौर में विकसित किया था। बाद में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने इसे अफगानिस्तान में अपने सैन्य अभियानों का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया। लगभग दो दशक तक यह अमेरिकी और नाटो सेनाओं का प्रमुख बेस रहा। लेकिन अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालीबान ने इस एयरबेस पर कब्जा कर लिया और तब से यह उसके कंट्रोल में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तालीबान के मंत्री का यह बयान केवल ट्रंप पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं बल्कि दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश भी है कि अफगानिस्तान अब किसी विदेशी सैन्य शक्ति के दबाव में नहीं झुकेगा। यह बयान अमेरिका की उस सैन्य वापसी की भी याद दिलाता है जिसे कई विश्लेषकों ने अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी रणनीतिक विफलताओं में से एक बताया था। इसी दौरान तालिबान ने पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश दिया।
मंत्री मुहाज़िर फराई ने कहा कि अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है और किसी भी बाहरी हमले का जवाब देगा। यह बयान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के तनाव के बीच आया है। दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की है। जबकि अफगानिस्तान ने नागरिकों के हताहत होने का आरोप लगाया है। दिलचस्प बात तो यह है कि पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच तालिबान ने भारत के साथ अच्छे संबंधों की इच्छा दोहराई है। फराही ने कहा कि अफगानिस्तान की विदेश नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अफगानिस्तान के ऐतिहासिक और व्यापारिक रिश्ते रहे हैं और कोई भी देश यह तय नहीं कर सकता कि अफगानिस्तान किससे दोस्ती रखे और किससे नहीं। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ट्रंप के बगराम एयरबेस को लेकर दिए गए बयान और तालिबान की प्रतिक्रिया राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है।
अमेरिका की ओर से बगराम एयरबेस पर दोबारा कंट्रोल स्थापित करने की कोई आधिकारिक सैन्य योजना सार्वजनिक नहीं की गई। लेकिन इतना जरूर है कि जिस तालीबान को कभी अमेरिका सैन्य ताकत के दम पर सत्ता से हटाने निकला था, आज वही तालीबान खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों का मजाक उड़ा रहा है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच यह घटनाक्रम इस बात का संकेत जरूर देता है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद क्षेत्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। इन फतहना लका फतह मुबीना इसका अर्थ है बेशक हमने यानी अल्लाह ने आपको एक खुली और स्पष्ट फतह जीत अता की है।