आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है: मुख्यमंत्री नायडू

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को कहा कि आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है और भारत एक साल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की स्थिति में पहुंच गया है। भारतीय संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (एपीएचसीएए) के सम्मेलन में नायडू ने कहा कि 2038 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। नायडू ने कहा, ‘‘आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है और भारत एक साल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की स्थिति में पहुंच गया है।’’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर, 2047 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। न्यायपालिका की भूमिका के बारे में नायडू ने कहा कि यह लोकतंत्र के चार स्तंभ में से एक है और विधायिका, कार्यपालिका एवं मीडिया की तुलना में अधिक स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब भी व्यवधान उत्पन्न होता है, न्यायपालिका उसे सुधारने और लोकतंत्र की सच्ची भावना को बनाए रखने के लिए आगे आती है।’’ सम्मेलन में भारत के प्रधान न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर, वरिष्ठ न्यायाधीश, कानूनी विशेषज्ञ और प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

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Nov 17, 2025 - 10:02
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आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है: मुख्यमंत्री नायडू

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को कहा कि आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है और भारत एक साल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की स्थिति में पहुंच गया है।

भारतीय संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (एपीएचसीएए) के सम्मेलन में नायडू ने कहा कि 2038 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

नायडू ने कहा, ‘‘आर्थिक सुधारों ने देश की दशा बदल दी है और भारत एक साल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की स्थिति में पहुंच गया है।’’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर, 2047 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।

न्यायपालिका की भूमिका के बारे में नायडू ने कहा कि यह लोकतंत्र के चार स्तंभ में से एक है और विधायिका, कार्यपालिका एवं मीडिया की तुलना में अधिक स्थिरता प्रदान करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी व्यवधान उत्पन्न होता है, न्यायपालिका उसे सुधारने और लोकतंत्र की सच्ची भावना को बनाए रखने के लिए आगे आती है।’’ सम्मेलन में भारत के प्रधान न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर, वरिष्ठ न्यायाधीश, कानूनी विशेषज्ञ और प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

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