अवैध इमारतों पर SC का चाबुक, MCD अफसरों से पूछा- सिर्फ Builder क्यों, अपने अधिकारियों पर क्या एक्शन?

देश भर में गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों और ढांचों से जुड़े एक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु में नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के सीनियर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उनसे उन इमारतों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिनसे सुरक्षा का गंभीर खतरा है। दिल्ली के साकेत में हाल ही में इमारत गिरने की दुखद घटना और दिल्ली के मालवीय नगर व लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोर्ट के 20 मई के आदेशों के पालन में की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट के सामने रखें। संबंधित अधिकारियों को 4 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का भी निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर का तय समय-सीमा के भीतर ज़मीनी सर्वे करने के लिए IIT दिल्ली के दो सीनियर प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की एक विशेष टीम बनाने का भी निर्देश दिया। इस टीम के साथ दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी भी होंगे। सरोजिनी नगर में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अधिकार क्षेत्र में आता है।इसे भी पढ़ें: Muslim Personal Law भी नहीं दे सकता बाल विवाह को मंजूरी, Allahabad High Court का ऐतिहासिक फैसला, PCMA, POCSO Act देश के हर नागरिक पर समान रूप से लागूकोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई "लापरवाही" नहीं होनी चाहिए और समिति को एक ईमानदार रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। कोर्ट ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि समिति द्वारा ईमानदार रिपोर्ट देने के मामले में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अगर कोई संदेह पैदा होता है, तो हम रिपोर्ट की ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए इस कोर्ट से एक विशेष टीम भेज सकते हैं। कोर्ट ने 'एमिकस क्यूरी' (कोर्ट द्वारा नियुक्त वकील) की इस बात से भी सहमति जताई कि अधिकारी केवल "अपनी साख बचाने की कोशिश" कर रहे हैं। वे इमारत गिरने और आग लगने की घटनाओं के बाद सिर्फ़ बिल्डरों को गिरफ़्तार करते हैं, लेकिन अपने उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करते जो अवैध निर्माणों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में नाकाम रहे।कोर्ट ने कहा, "अधिकारी केवल अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि सिर्फ़ बिल्डरों को गिरफ़्तार किया जा रहा है और अधिकारियों या निगमों के किसी भी अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-कनाडा और यूरोप में भारतीय गैंगस्टर्स पर बड़ा एक्शन, हत्या, जबरन वसूली और ड्रग्स से जुड़े आरोपों में चार्जशीट दाखिलकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी रिपोर्ट में ऐसी नाकामियों के लिए ज़िम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम बताएं। कोर्ट ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' अख़बार के दिल्ली संस्करण में छपी हालिया ख़बर पर भी ध्यान दिया, जिसमें बताया गया था कि गुरुग्राम में 93 प्रतिशत संस्थान आग से सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस मामले में, कोर्ट ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और 20 मई के निर्देशों के पालन में उठाए गए वास्तविक कदमों का विवरण देते हुए रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

PNSPNS
Jul 10, 2026 - 10:18
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अवैध इमारतों पर SC का चाबुक, MCD अफसरों से पूछा- सिर्फ Builder क्यों, अपने अधिकारियों पर क्या एक्शन?
देश भर में गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों और ढांचों से जुड़े एक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु में नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के सीनियर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उनसे उन इमारतों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिनसे सुरक्षा का गंभीर खतरा है। दिल्ली के साकेत में हाल ही में इमारत गिरने की दुखद घटना और दिल्ली के मालवीय नगर व लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोर्ट के 20 मई के आदेशों के पालन में की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट के सामने रखें। संबंधित अधिकारियों को 4 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का भी निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर का तय समय-सीमा के भीतर ज़मीनी सर्वे करने के लिए IIT दिल्ली के दो सीनियर प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की एक विशेष टीम बनाने का भी निर्देश दिया। इस टीम के साथ दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी भी होंगे। सरोजिनी नगर में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

इसे भी पढ़ें: Muslim Personal Law भी नहीं दे सकता बाल विवाह को मंजूरी, Allahabad High Court का ऐतिहासिक फैसला, PCMA, POCSO Act देश के हर नागरिक पर समान रूप से लागू

कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई "लापरवाही" नहीं होनी चाहिए और समिति को एक ईमानदार रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। कोर्ट ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि समिति द्वारा ईमानदार रिपोर्ट देने के मामले में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अगर कोई संदेह पैदा होता है, तो हम रिपोर्ट की ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए इस कोर्ट से एक विशेष टीम भेज सकते हैं। कोर्ट ने 'एमिकस क्यूरी' (कोर्ट द्वारा नियुक्त वकील) की इस बात से भी सहमति जताई कि अधिकारी केवल "अपनी साख बचाने की कोशिश" कर रहे हैं। वे इमारत गिरने और आग लगने की घटनाओं के बाद सिर्फ़ बिल्डरों को गिरफ़्तार करते हैं, लेकिन अपने उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करते जो अवैध निर्माणों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में नाकाम रहे।
कोर्ट ने कहा, "अधिकारी केवल अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि सिर्फ़ बिल्डरों को गिरफ़्तार किया जा रहा है और अधिकारियों या निगमों के किसी भी अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका-कनाडा और यूरोप में भारतीय गैंगस्टर्स पर बड़ा एक्शन, हत्या, जबरन वसूली और ड्रग्स से जुड़े आरोपों में चार्जशीट दाखिल

कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी रिपोर्ट में ऐसी नाकामियों के लिए ज़िम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम बताएं। कोर्ट ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' अख़बार के दिल्ली संस्करण में छपी हालिया ख़बर पर भी ध्यान दिया, जिसमें बताया गया था कि गुरुग्राम में 93 प्रतिशत संस्थान आग से सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस मामले में, कोर्ट ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और 20 मई के निर्देशों के पालन में उठाए गए वास्तविक कदमों का विवरण देते हुए रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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