West Asia Crisis की आंच: Goa के Hotels-Restaurants पर लटकी तालाबंदी की तलवार, गैस सप्लाई ठप

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गोवा में होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है।मौजूद जानकारी के अनुसार गोवा के पर्यटन और यात्रा कारोबार का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र भेजकर कहा है कि यदि व्यावसायिक रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो राज्य के कई भोजनालय और होटल बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।बता दें कि संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसके चलते देश में व्यावसायिक रसोई गैस की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है।गौरतलब है कि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस की आपूर्ति कुछ जरूरी क्षेत्रों जैसे शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों के लिए सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। ऐसे में होटल और भोजनालयों के लिए मिलने वाली गैस आपूर्ति सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन का कहना है कि गोवा में अधिकांश रेस्तरां, समुद्र तट पर बने भोजनालय और खानपान सेवाएं रसोई गैस पर ही निर्भर हैं। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो इन व्यवसायों को संचालन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।बता दें कि संगठन ने यह भी कहा है कि मौजूदा समय में उपलब्ध लगभग पच्चीस दिन का गैस भंडार पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भले ही पश्चिम एशिया का संकट भौगोलिक रूप से दूर दिखाई देता हो, लेकिन इसका आर्थिक असर गोवा जैसे पर्यटन आधारित राज्य पर पड़ सकता है।गौरतलब है कि गोवा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन उद्योग पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि होटल और भोजनालय प्रभावित होते हैं तो इससे कई सहायक व्यवसायों पर भी असर पड़ सकता है।मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले में केंद्र सरकार के साथ तुरंत संवाद किया जाए और गैस आपूर्ति से जुड़े वितरकों और आपूर्ति नेटवर्क के साथ भी चर्चा की जाए।संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए। इसके साथ ही राज्य प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोका जा सके।बता दें कि संगठन ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस संकट के दौरान सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए रसोई गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।इस मामले पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की किसी तरह की कमी नहीं है, हालांकि व्यावसायिक गैस आपूर्ति के मामले में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के संपर्क में है और केंद्र द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

PNSPNS
Mar 12, 2026 - 10:04
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West Asia Crisis की आंच: Goa के Hotels-Restaurants पर लटकी तालाबंदी की तलवार, गैस सप्लाई ठप
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गोवा में होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है।

मौजूद जानकारी के अनुसार गोवा के पर्यटन और यात्रा कारोबार का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र भेजकर कहा है कि यदि व्यावसायिक रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो राज्य के कई भोजनालय और होटल बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।

बता दें कि संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसके चलते देश में व्यावसायिक रसोई गैस की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस की आपूर्ति कुछ जरूरी क्षेत्रों जैसे शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों के लिए सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। ऐसे में होटल और भोजनालयों के लिए मिलने वाली गैस आपूर्ति सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन का कहना है कि गोवा में अधिकांश रेस्तरां, समुद्र तट पर बने भोजनालय और खानपान सेवाएं रसोई गैस पर ही निर्भर हैं। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो इन व्यवसायों को संचालन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि संगठन ने यह भी कहा है कि मौजूदा समय में उपलब्ध लगभग पच्चीस दिन का गैस भंडार पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भले ही पश्चिम एशिया का संकट भौगोलिक रूप से दूर दिखाई देता हो, लेकिन इसका आर्थिक असर गोवा जैसे पर्यटन आधारित राज्य पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि गोवा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन उद्योग पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि होटल और भोजनालय प्रभावित होते हैं तो इससे कई सहायक व्यवसायों पर भी असर पड़ सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले में केंद्र सरकार के साथ तुरंत संवाद किया जाए और गैस आपूर्ति से जुड़े वितरकों और आपूर्ति नेटवर्क के साथ भी चर्चा की जाए।

संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए। इसके साथ ही राज्य प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोका जा सके।

बता दें कि संगठन ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस संकट के दौरान सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए रसोई गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

इस मामले पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की किसी तरह की कमी नहीं है, हालांकि व्यावसायिक गैस आपूर्ति के मामले में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के संपर्क में है और केंद्र द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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