विदेश में खरीदारी को लेकर भारतीय उपभोक्ताओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार डील्स धमाका नाम के मंच के संस्थापक विनीत के ने दावा किया है कि अब अमेरिका में खरीदारी भारतीयों के लिए काफी महंगी हो गई है और पहले जैसा फायदा नहीं रह गया है। उनके इस बयान के बाद सामाजिक मंचों पर इस मुद्दे पर काफी चर्चा देखने को मिल रही है।
बताते चलें कि विनीत के ने अपने हालिया अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस बार अमेरिका में उनका खरीदारी बिल सामान्य से सिर्फ करीब तीस प्रतिशत ही रहा, जो यह दिखाता है कि खर्च करने की क्षमता में बड़ा बदलाव आया है। गौरतलब है कि उन्होंने इसकी प्रमुख वजह रुपये के कमजोर होने को बताया है, जहां डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा लगभग पचानवे रुपये के आसपास पहुंच गई है। इसके साथ ही वैश्विक महंगाई ने भी विदेशी बाजारों में सामान को महंगा बना दिया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार विनीत के ने यह भी सलाह दी कि अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बेहतर यही है कि वे महंगे उपकरण, जैसे कि स्मार्टफोन, भारत में ही खरीदें क्योंकि कीमतों का अंतर अब काफी कम हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप में खरीदारी की स्थिति अमेरिका से भी ज्यादा महंगी हो चुकी है।
इस मुद्दे पर आम लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कई उपयोगकर्ताओं का कहना है कि पहले जो खरीद क्षमता का अंतर था, जिसमें डॉलर कमाने वालों को ज्यादा फायदा मिलता था, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि अब भारत में छूट और अन्य लाभों के बाद कीमतें लगभग बराबर हो जाती हैं, जिससे विदेश से खरीदने का फायदा कम हो गया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा होता है, जिसमें कच्चा तेल, उर्वरक और तकनीकी उपकरण शामिल हैं। इससे देश के अंदर भी महंगाई बढ़ती है और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ता है। गौरतलब है कि यही कारण है कि अब विदेश में खरीदारी पहले जितनी आकर्षक नहीं रह गई है और लोग घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
बदलते आर्थिक हालात, कमजोर होती मुद्रा और वैश्विक महंगाई ने भारतीय उपभोक्ताओं के खरीदारी के तरीके को प्रभावित किया है और अब विदेश के बजाय भारत में खरीदारी करना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प बनता जा रहा है।