Tamil Nadu Election Issues: क्या परिसीमन बनेगा Game Changer? Tamil Nadu Election में DMK ने इस मुद्दे से बदला पूरा खेल

तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने चुनाव कैंपेन का थीम बदल दिया है। पहले डीएमके के कैंपेन में क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषा और विकास जैसे मुद्दे छाए हुए थे। लेकिन अब यह सारे मुद्दे पीछे छूट गए हैं। लेकिन अब सत्ताधारी डीएमके का पूरा फोकस अब परिसीमन के मुद्दे पर आ टिका है। दरअसल, परिसीमन के मुद्दे पर एमके स्टालिन कड़ा विरोध पहले ही कर चुके हैं। स्टालिन ने काला झंडा फहराकर परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया है। डीएमके के साथ कांग्रेस पार्टी का तमिलनाडु में चुनावी गठबंधन तो है, वहीं सपोर्ट में राहुल गांधी भी परिसीमन का विरोध कर रहे हैं।परिसीमन का मुद्दाइस बीच परिसीमन का मुद्दा सामने आया है। वहीं संसद के विशेष सत्र के समय ने राज्य के कई विश्लेषकों को चौंकाया है। क्योंकि संसद की घटनाएं तमिलनाडु के चुनावी नैरेटिव को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगी। यह मुद्दा डीएमके के अनुकूल है। वहीं डीएमके ने इस मुद्दे को राज्य के खिलाफ भेदभाव के सबसे बड़े सबूत के तौर पर पेश करने की रणनीति में बड़ी महारत हासिल कर ली है।इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Election Issues: Tamil Nadu में फिर 'भाषा युद्ध', NEP को लेकर CM Stalin और Dharmendra Pradhan में बढ़ा टकरावबता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से लाया गया रहा यह बिल लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। लेकिन बिल में लिखित रूप से किसी फॉर्मूले या फिर अनुपात की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन केंद्र ने संसद में यह आश्वासन देने की बात कही है कि प्रदेशों के लिए एक समान 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। न कि जनसंख्या के आधार पर। लेकिन इस तरह का आश्वासन भी विवादास्पद है। क्योंकि यह सभी नागरिकों के समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के उद्देश्य को कमजोर करता है।लेकिन यह बढ़ोतरी क्यों की जा रही है और इतनी जल्दबाजी किस लिए है, यह अभी तक पहेली है। यह तर्क इतने जटिल हैं कि चुनाव के शोर में जनता के लिए इनको समझ पाना मुश्किल है। वहीं यह मुद्दा संतुलित बहस की जगह भावनाओं और प्रचार को बढ़ावा देगा। जबकि यह ऐसा विषय है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को आकार देने वाला है।

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Apr 22, 2026 - 11:45
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Tamil Nadu Election Issues: क्या परिसीमन बनेगा Game Changer? Tamil Nadu Election में DMK ने इस मुद्दे से बदला पूरा खेल
तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने चुनाव कैंपेन का थीम बदल दिया है। पहले डीएमके के कैंपेन में क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषा और विकास जैसे मुद्दे छाए हुए थे। लेकिन अब यह सारे मुद्दे पीछे छूट गए हैं। लेकिन अब सत्ताधारी डीएमके का पूरा फोकस अब परिसीमन के मुद्दे पर आ टिका है। दरअसल, परिसीमन के मुद्दे पर एमके स्टालिन कड़ा विरोध पहले ही कर चुके हैं। स्टालिन ने काला झंडा फहराकर परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया है। डीएमके के साथ कांग्रेस पार्टी का तमिलनाडु में चुनावी गठबंधन तो है, वहीं सपोर्ट में राहुल गांधी भी परिसीमन का विरोध कर रहे हैं।

परिसीमन का मुद्दा

इस बीच परिसीमन का मुद्दा सामने आया है। वहीं संसद के विशेष सत्र के समय ने राज्य के कई विश्लेषकों को चौंकाया है। क्योंकि संसद की घटनाएं तमिलनाडु के चुनावी नैरेटिव को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगी। यह मुद्दा डीएमके के अनुकूल है। वहीं डीएमके ने इस मुद्दे को राज्य के खिलाफ भेदभाव के सबसे बड़े सबूत के तौर पर पेश करने की रणनीति में बड़ी महारत हासिल कर ली है।

इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Election Issues: Tamil Nadu में फिर 'भाषा युद्ध', NEP को लेकर CM Stalin और Dharmendra Pradhan में बढ़ा टकराव

बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से लाया गया रहा यह बिल लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। लेकिन बिल में लिखित रूप से किसी फॉर्मूले या फिर अनुपात की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन केंद्र ने संसद में यह आश्वासन देने की बात कही है कि प्रदेशों के लिए एक समान 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। न कि जनसंख्या के आधार पर। लेकिन इस तरह का आश्वासन भी विवादास्पद है। क्योंकि यह सभी नागरिकों के समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के उद्देश्य को कमजोर करता है।

लेकिन यह बढ़ोतरी क्यों की जा रही है और इतनी जल्दबाजी किस लिए है, यह अभी तक पहेली है। यह तर्क इतने जटिल हैं कि चुनाव के शोर में जनता के लिए इनको समझ पाना मुश्किल है। वहीं यह मुद्दा संतुलित बहस की जगह भावनाओं और प्रचार को बढ़ावा देगा। जबकि यह ऐसा विषय है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को आकार देने वाला है।

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