Supreme Court से लालू यादव को बड़ा झटका, Land for Jobs Scam में FIR रद्द करने से इनकार

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कथित 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया, जिससे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को कानूनी झटका लगा। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें कार्यवाही के दौरान निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। इसे भी पढ़ें: Sabarimala Hearing: 'मंदिरों में रोक से बंटेगा हिंदू धर्म', Supreme Court की अहम टिप्पणीन्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हालांकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव (77) को सुनवाई के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी। सर्वोच्च अदालत ने यादव को इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की व्यावहरिकता का मुद्दा उठाने की अनुमति दी। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने 24 मार्च को राजद प्रमुख को एक बड़ा झटका देते हुए उनके और उनके परिवार से जुड़े ‘‘जमीन के बदले नौकरी’’ मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद की इस दलील को खारिज कर दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारियों ने बताया कि जमीन के बदले नौकरी का यह कथित मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है।  इसे भी पढ़ें: Pawan Khera की बढ़ी मुश्किलें, Transit Bail के खिलाफ Supreme Court पहुंची Assam सरकारअधिकारियों के अनुसार ये नियुक्तियां भर्ती किए गए लोगों द्वारा राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर कथित तौर पर उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई भूमि के बदले की गई थीं। यादव ने दलील दी थी कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, जांच की प्रक्रिया और बाद में दाखिल आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरोने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली थी।

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Apr 14, 2026 - 09:34
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Supreme Court से लालू यादव को बड़ा झटका, Land for Jobs Scam में FIR रद्द करने से इनकार
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कथित 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया, जिससे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को कानूनी झटका लगा। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें कार्यवाही के दौरान निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी।
 

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न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हालांकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव (77) को सुनवाई के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी। सर्वोच्च अदालत ने यादव को इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की व्यावहरिकता का मुद्दा उठाने की अनुमति दी। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने 24 मार्च को राजद प्रमुख को एक बड़ा झटका देते हुए उनके और उनके परिवार से जुड़े ‘‘जमीन के बदले नौकरी’’ मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था। 

अदालत ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद की इस दलील को खारिज कर दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारियों ने बताया कि जमीन के बदले नौकरी का यह कथित मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ‘ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है। 
 

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अधिकारियों के अनुसार ये नियुक्तियां भर्ती किए गए लोगों द्वारा राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर कथित तौर पर उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई भूमि के बदले की गई थीं। यादव ने दलील दी थी कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, जांच की प्रक्रिया और बाद में दाखिल आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरोने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली थी।

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