Strait of Hormuz US Military Strikes | आसमान से बरसीं अमेरिकी मिसाइलें! ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले से दुनिया सन्न, वैश्विक अर्थव्यवस्था में महाभूकंप!

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा की जीवनरेखा कहे जाने वाले होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। बुधवार तड़के अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए भीषण हमलों ने मध्य पूर्व को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह सैन्य कार्रवाई उस वक्त हुई जब महज कुछ ही घंटे पहले इस रणनीतिक जलमार्ग में तीन वाणिज्यिक पोतों (Commercial Vessels) को निशाना बनाया गया था। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि युद्ध समाप्त करने के लिए हुए हालिया अंतरिम समझौते के भविष्य पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।अंतरिम शांति समझौते को बड़ा झटकायह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पक्ष 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर थे। इस कूटनीतिक वार्ता का मुख्य उद्देश्य होरमुज़ जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए पूरी तरह से फिर से खोलना, तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को प्रतिबंधित करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना था।बुधवार को हुए इस नाटकीय घटनाक्रम ने इन संवेदनशील वार्ताओं को पटरी से उतार दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों से उन कूटनीतिक प्रयासों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं जो पिछले कुछ हफ्तों से युद्धविराम की जमीन तैयार कर रहे थे। एक तरफ जहाँ बातचीत के जरिए शांति का रास्ता तलाशा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ जमीन और समुद्र पर बढ़ती सैन्य आक्रामकता ने इस अंतरिम समझौते को ढहने की कगार पर पहुंचा दिया है।इसे भी पढ़ें: Iran का बड़ा दावा: Ayatollah Khamenei बनेंगे 'दूसरे Imam Hussain', याद रखी जाएगी शहादत ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि अमेरिकी बलों ने एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाए जाने और उन पर हमला किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ये हमले किए। अमेरिका के अधिकारी ने कहा कि सेना ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय निगरानी प्रणालियों, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों तथा पोत-रोधी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के प्रक्षेपण स्थलों को निशाना बना रही है। अधिकारी ने कहा कि ईरान की बंदरगाह सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हमले कई घंटों तक जारी रह सकते हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। ईरान के सरकारी मीडिया ने केशम और बंदर अब्बास में धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। पिछले महीने के अंत में भी पोतों पर ईरान के हमलों और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। तीन टैंकरों पर ईरान द्वारा हमला किए जाने के कुछ घंटों बाद अमेरिका ने वह लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसके तहत अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के अंतरिम समझौते के हिस्से के रूप में ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी।इसे भी पढ़ें: Iran का बड़ा दावा: Ayatollah Khamenei बनेंगे 'दूसरे Imam Hussain', याद रखी जाएगी शहादत  वैश्विक चिंताएं और आगे की राहहोरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यहाँ होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य झड़प का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।बुधवार तड़के शुरू हुआ यह सैन्य टकराव यह साफ करता है कि मध्य पूर्व में शांति की राह कितनी नाजुक है। अंतरिम समझौते के मलबे पर अब एक पूर्णकालिक युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। क्या दोनों देश एक बार फिर कूटनीति की मेज पर लौटेंगे, या यह चिंगारी एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगी, यह आने वाले कुछ घंटे और दोनों देशों के नेतृत्व के अगले कदम तय करेंगे।Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 

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Jul 8, 2026 - 16:34
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Strait of Hormuz US Military Strikes | आसमान से बरसीं अमेरिकी मिसाइलें! ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले से दुनिया सन्न, वैश्विक अर्थव्यवस्था में महाभूकंप!

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा की जीवनरेखा कहे जाने वाले होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। बुधवार तड़के अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए भीषण हमलों ने मध्य पूर्व को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह सैन्य कार्रवाई उस वक्त हुई जब महज कुछ ही घंटे पहले इस रणनीतिक जलमार्ग में तीन वाणिज्यिक पोतों (Commercial Vessels) को निशाना बनाया गया था। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि युद्ध समाप्त करने के लिए हुए हालिया अंतरिम समझौते के भविष्य पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

अंतरिम शांति समझौते को बड़ा झटका

यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पक्ष 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर थे। इस कूटनीतिक वार्ता का मुख्य उद्देश्य होरमुज़ जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए पूरी तरह से फिर से खोलना, तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को प्रतिबंधित करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना था।

बुधवार को हुए इस नाटकीय घटनाक्रम ने इन संवेदनशील वार्ताओं को पटरी से उतार दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों से उन कूटनीतिक प्रयासों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं जो पिछले कुछ हफ्तों से युद्धविराम की जमीन तैयार कर रहे थे। एक तरफ जहाँ बातचीत के जरिए शांति का रास्ता तलाशा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ जमीन और समुद्र पर बढ़ती सैन्य आक्रामकता ने इस अंतरिम समझौते को ढहने की कगार पर पहुंचा दिया है।

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‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि अमेरिकी बलों ने एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाए जाने और उन पर हमला किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ये हमले किए। अमेरिका के अधिकारी ने कहा कि सेना ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय निगरानी प्रणालियों, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों तथा पोत-रोधी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के प्रक्षेपण स्थलों को निशाना बना रही है।

अधिकारी ने कहा कि ईरान की बंदरगाह सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हमले कई घंटों तक जारी रह सकते हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। ईरान के सरकारी मीडिया ने केशम और बंदर अब्बास में धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। पिछले महीने के अंत में भी पोतों पर ईरान के हमलों और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। तीन टैंकरों पर ईरान द्वारा हमला किए जाने के कुछ घंटों बाद अमेरिका ने वह लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसके तहत अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के अंतरिम समझौते के हिस्से के रूप में ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी।

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 वैश्विक चिंताएं और आगे की राह

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यहाँ होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य झड़प का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

बुधवार तड़के शुरू हुआ यह सैन्य टकराव यह साफ करता है कि मध्य पूर्व में शांति की राह कितनी नाजुक है। अंतरिम समझौते के मलबे पर अब एक पूर्णकालिक युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। क्या दोनों देश एक बार फिर कूटनीति की मेज पर लौटेंगे, या यह चिंगारी एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगी, यह आने वाले कुछ घंटे और दोनों देशों के नेतृत्व के अगले कदम तय करेंगे।

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