Sri Lankan Cancel MP Pensions | श्रीलंका में ऐतिहासिक बदलाव: सांसदों की पेंशन खत्म, दिसानायके सरकार ने पूरा किया चुनावी वादा

श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान कर एक मिसाल कायम की है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति देखने को मिली।श्रीलंका के सांसदों ने पेंशन रद्द करने के पक्ष में किया मतदान  सांसदों ने 225 सदस्यीय सदन में 154 मतों से विधेयक पारित कर दिया, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े। शेष विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। इससे पहले श्रीलंका में सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन पाने के हकदार होते थे। नए कानून के तहत, जो लोग पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए पात्र हैं, उन्हें भी पेंशन का भुगतान नहीं किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: Champions League | विजयी गोल करने के बाद विनीसियस जूनियर का नस्लीय दुर्व्यवहार का आरोप, रियाल मैड्रिड की जीत पर विवाद का साया वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया। इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।इसे भी पढ़ें: RJD Expansion Strategy | राजद का मिशन 'राष्ट्रीय पार्टी', Tejashwi Yadav ने बिहार से बाहर विस्तार का किया शंखनाद  श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।

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Feb 18, 2026 - 10:58
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Sri Lankan Cancel MP Pensions | श्रीलंका में ऐतिहासिक बदलाव: सांसदों की पेंशन खत्म, दिसानायके सरकार ने पूरा किया चुनावी वादा

श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान कर एक मिसाल कायम की है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति देखने को मिली।

श्रीलंका के सांसदों ने पेंशन रद्द करने के पक्ष में किया मतदान 

सांसदों ने 225 सदस्यीय सदन में 154 मतों से विधेयक पारित कर दिया, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े। शेष विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। इससे पहले श्रीलंका में सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन पाने के हकदार होते थे। नए कानून के तहत, जो लोग पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए पात्र हैं, उन्हें भी पेंशन का भुगतान नहीं किया जाएगा।

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वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया।

इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।

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श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।

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