Shri Krishna Famous Temples: मथुरा-वृंदावन से द्वारका तक, कान्हा के इन 9 धामों में बसती है दिव्यता

महाभारत और पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण का जीवनकाल 125 साल का बताया गया है। लेकिन अपने जीवनकाल में शायद ही श्रीकृष्ण लंबे समय तक एक स्थान पर रहे हों। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अलग-अलग चरणों में बीता। खतरे के माहौल को देखते हुए बचपन छिपकर बिताया। यौवन काल प्रेम और विरह से भरा, वयस्क जीवन जिम्मेदारियों से भरा और आखिर में वैराग्य और एकांत से जुड़ी यादें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जन्म से लेकर वैराग्य तक भगवान श्रीकृष्ण के 9 पवित्र धाम के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर आज भी दिव्यता गूंजती है।मथुराभगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मंदिर और विश्राम घाट है।उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि है।इसे भी पढ़ें: Mysterious Shiv Mandir: 400 साल पुराना अद्भुत Shiv Mandir, नंदी के मुख से बहती है Mysterious धारा, स्रोत आज भी अज्ञातगोकुलजन्म के बाद श्रीकृष्ण का पालन-पोषण नंद बाबा के घर गोकुल में ही हुआ था।यहां के मुख्य स्थल नंद भवन और रमणरेती है।आज भी यहां की गलियां बाल कृष्ण की लीलाओं की गवाही देती है।यहां पर आज भी मां यशोदा की लोरियां और घर-घर में श्रीकृष्ण के माखन चुराने की कथाएं प्रचलित हैं।वृंदावनवृंदावन श्रीराधा-कृष्ण की रासलीलाओं का पावन स्थल है।वृंदावन के प्रमुख मंदिर प्रेम मंदिर और बांके बिहारी मंदिर है।यहां का हर कोना प्रेम और भक्ति से सराबोर रहता है।यहां पर रात के समय राधा रानी और गोपियों की मौजूदगी को महसूस किया जा सकता है।नंदगांवनंदगांव भगवान श्रीकृष्ण के किशोर काल से जुड़ा है।यहां का मुख्य आकर्षण नंद राय मंदिर है।बरसानायह गांव राधा जी का गांव माना जाता है।यहां पर लाडली जी का मंदिर है। वहीं बरसाना की लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है।उज्जैनउज्जैन में श्रीकृष्ण ने गुरु संदीपनि के आश्रम में शिक्षा ली थी।यहां पर आज भी संदीपनि ऋषि का आज भी दर्शनीय है।यहां पर श्रीकृष्ण की सुदामा से मित्रता हुई थी।द्वारकामथुरा छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका को अपनी राजधानी बनाया था।यहां का मुख्य आकर्षण द्वारकाधीश मंदिर है।द्वारकाधीश मंदिर चार धामों में से एक प्रमुख धाम है।कुरुक्षेत्रमहाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।यहां का विशेष स्थल ज्योतिसर है।यह स्थान कर्म और धर्म का प्रतीक है।सोमनाथमाना जाता है कि श्रीकृष्ण ने यहीं प्रभास क्षेत्र में देह त्याग किया था।सोमनाथ मंदिर के पास स्थित यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

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Apr 22, 2026 - 11:46
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Shri Krishna Famous Temples: मथुरा-वृंदावन से द्वारका तक, कान्हा के इन 9 धामों में बसती है दिव्यता
महाभारत और पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण का जीवनकाल 125 साल का बताया गया है। लेकिन अपने जीवनकाल में शायद ही श्रीकृष्ण लंबे समय तक एक स्थान पर रहे हों। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अलग-अलग चरणों में बीता। खतरे के माहौल को देखते हुए बचपन छिपकर बिताया। यौवन काल प्रेम और विरह से भरा, वयस्क जीवन जिम्मेदारियों से भरा और आखिर में वैराग्य और एकांत से जुड़ी यादें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जन्म से लेकर वैराग्य तक भगवान श्रीकृष्ण के 9 पवित्र धाम के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर आज भी दिव्यता गूंजती है।

मथुरा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। 
यहां पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मंदिर और विश्राम घाट है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि है।

इसे भी पढ़ें: Mysterious Shiv Mandir: 400 साल पुराना अद्भुत Shiv Mandir, नंदी के मुख से बहती है Mysterious धारा, स्रोत आज भी अज्ञात


गोकुल

जन्म के बाद श्रीकृष्ण का पालन-पोषण नंद बाबा के घर गोकुल में ही हुआ था।
यहां के मुख्य स्थल नंद भवन और रमणरेती है।
आज भी यहां की गलियां बाल कृष्ण की लीलाओं की गवाही देती है।
यहां पर आज भी मां यशोदा की लोरियां और घर-घर में श्रीकृष्ण के माखन चुराने की कथाएं प्रचलित हैं।

वृंदावन

वृंदावन श्रीराधा-कृष्ण की रासलीलाओं का पावन स्थल है।
वृंदावन के प्रमुख मंदिर प्रेम मंदिर और बांके बिहारी मंदिर है।
यहां का हर कोना प्रेम और भक्ति से सराबोर रहता है।
यहां पर रात के समय राधा रानी और गोपियों की मौजूदगी को महसूस किया जा सकता है।

नंदगांव

नंदगांव भगवान श्रीकृष्ण के किशोर काल से जुड़ा है।
यहां का मुख्य आकर्षण नंद राय मंदिर है।

बरसाना

यह गांव राधा जी का गांव माना जाता है।
यहां पर लाडली जी का मंदिर है। वहीं बरसाना की लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है।

उज्जैन

उज्जैन में श्रीकृष्ण ने गुरु संदीपनि के आश्रम में शिक्षा ली थी।
यहां पर आज भी संदीपनि ऋषि का आज भी दर्शनीय है।
यहां पर श्रीकृष्ण की सुदामा से मित्रता हुई थी।

द्वारका

मथुरा छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका को अपनी राजधानी बनाया था।
यहां का मुख्य आकर्षण द्वारकाधीश मंदिर है।
द्वारकाधीश मंदिर चार धामों में से एक प्रमुख धाम है।

कुरुक्षेत्र

महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।
यहां का विशेष स्थल ज्योतिसर है।
यह स्थान कर्म और धर्म का प्रतीक है।

सोमनाथ

माना जाता है कि श्रीकृष्ण ने यहीं प्रभास क्षेत्र में देह त्याग किया था।
सोमनाथ मंदिर के पास स्थित यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

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