Sarvepalli Radhakrishnan Death Anniversary: Nehru ने Radhakrishnan को क्यों भेजा था Soviet Union? जानें President बनने तक का पूरा सफर

महान दार्शनिक और शिक्षक सर्वपल्ली राधाकृष्णन का 17 अप्रैल को निधन हो गया था। डॉ राधाकृष्णन ने पूरी दुनिया को भारत के दर्शन शास्त्र से परिचय कराया था। वह देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। वह 10 सालों तक बतौर उपराष्ट्रपति जिम्मेदारी निभाने के बाद 13 मई 1962 को डॉ राधाकृष्णन को देश का दूसरा राष्ट्रपति बनाया गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर डॉ राधाकृष्णन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारतत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के चित्तूर जिले के तिरुत्तनी गांव में 05 सितंबर 1888 को राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। राधाकृष्णन के पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और मां का नाम सीताम्मा था। शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1918 में उनको मैसूर महाविद्यालय में दर्शन शास्त्र का सहायक प्रध्यापक नियुक्त किया गया। फिर बाद में वह उसी कॉलेज में प्राध्यापक भी बने।राजनीति में आएसाल 1947 में देश की आजादी के बाद पंडित नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। तब पंडित नेहरू ने डॉ. राधाकृष्णन से सोवियत संघ में राजदूत के रूप में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने नेहरू की बात मानी और साल 1947 से 1949 तक संविधान सभा के सदस्य के रूप में काम किया। फिर साल 1952 तक वह रूस में भारत के राजदूत बनकर रहे। वहीं 13 मई 1952 को डॉ राधाकृष्णन को देश का पहला उपराष्ट्रपति बने थे। साल 1952 से लेकर 1962 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे।लेखनभारतीय दर्शनशास्त्र और धर्म पर डॉ. राधाकृष्णन ने कई किताबें लिखी। जिनमें 'धर्म और समाज', 'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन', और 'भारत और विश्व' प्रमुख है। वह एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में आज भी डॉ राधाकृष्णन सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। मरणोपरांत साल 1975 में अमेरिकी सरकार ने उनको 'टेम्पल्टन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसे भी पढ़ें: Chandrashekhar Birth Anniversary: वो PM जिसने Padyatra से नापी Politics की राह, जानें 'युवा तुर्क' Chandrashekhar की कहानीपुरस्कारसाल 1954 में डॉ राधाकृष्णन को 'भारत रत्न' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उनको पीस प्राइज आफ द जर्मन बुक ट्रेड से भी सम्मानित किया गया। ब्रिटिश शासनकाल में राधाकृष्णन को 'सर' की उपाधि दी गई थी। वहीं इंग्लैंड सरकार ने उनको 'ऑर्डर ऑफ मेरिट' सम्मान से भी सम्मानित किया था। जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन के द्वारा साल 1961 में उनको 'विश्व शांति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।मृत्युडॉ राधाकृष्णन का 17 अप्रैल 1975 को निधन हो गया था।

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Apr 18, 2026 - 09:00
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Sarvepalli Radhakrishnan Death Anniversary: Nehru ने Radhakrishnan को क्यों भेजा था Soviet Union? जानें President बनने तक का पूरा सफर
महान दार्शनिक और शिक्षक सर्वपल्ली राधाकृष्णन का 17 अप्रैल को निधन हो गया था। डॉ राधाकृष्णन ने पूरी दुनिया को भारत के दर्शन शास्त्र से परिचय कराया था। वह देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। वह 10 सालों तक बतौर उपराष्ट्रपति जिम्मेदारी निभाने के बाद 13 मई 1962 को डॉ राधाकृष्णन को देश का दूसरा राष्ट्रपति बनाया गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर डॉ राधाकृष्णन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के चित्तूर जिले के तिरुत्तनी गांव में 05 सितंबर 1888 को राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। राधाकृष्णन के पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और मां का नाम सीताम्मा था। शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1918 में उनको मैसूर महाविद्यालय में दर्शन शास्त्र का सहायक प्रध्यापक नियुक्त किया गया। फिर बाद में वह उसी कॉलेज में प्राध्यापक भी बने।

राजनीति में आए

साल 1947 में देश की आजादी के बाद पंडित नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। तब पंडित नेहरू ने डॉ. राधाकृष्णन से सोवियत संघ में राजदूत के रूप में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने नेहरू की बात मानी और साल 1947 से 1949 तक संविधान सभा के सदस्य के रूप में काम किया। फिर साल 1952 तक वह रूस में भारत के राजदूत बनकर रहे। वहीं 13 मई 1952 को डॉ राधाकृष्णन को देश का पहला उपराष्ट्रपति बने थे। साल 1952 से लेकर 1962 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे।

लेखन

भारतीय दर्शनशास्त्र और धर्म पर डॉ. राधाकृष्णन ने कई किताबें लिखी। जिनमें 'धर्म और समाज', 'गौतम बुद्ध : जीवन और दर्शन', और 'भारत और विश्व' प्रमुख है। वह एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में आज भी डॉ राधाकृष्णन सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। मरणोपरांत साल 1975 में अमेरिकी सरकार ने उनको 'टेम्पल्टन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। 

इसे भी पढ़ें: Chandrashekhar Birth Anniversary: वो PM जिसने Padyatra से नापी Politics की राह, जानें 'युवा तुर्क' Chandrashekhar की कहानी

पुरस्कार

साल 1954 में डॉ राधाकृष्णन को 'भारत रत्न' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उनको पीस प्राइज आफ द जर्मन बुक ट्रेड से भी सम्मानित किया गया। ब्रिटिश शासनकाल में राधाकृष्णन को 'सर' की उपाधि दी गई थी। वहीं इंग्लैंड सरकार ने उनको 'ऑर्डर ऑफ मेरिट' सम्मान से भी सम्मानित किया था। जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन के द्वारा साल 1961 में उनको 'विश्व शांति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।

मृत्यु

डॉ राधाकृष्णन का 17 अप्रैल 1975 को निधन हो गया था।

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