RBI का बड़ा फैसला: Urban Cooperative Banks से अब बिना गारंटी Loan लेना होगा आसान!

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसमें शहरी सहकारी बैंकों के लिए कुल परिसंपत्ति में असुरक्षित माने जाने वाले यानी बिना गारंटी वाले कर्ज का हिस्सा दोगुना कर 20 प्रतिशत तक करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों की समीक्षा के मसौदे के अनुसार, केंद्रीय बैंक व्यक्तिगत ऋण सीमा बढ़ाने और असुरक्षित ऋणों की परिको तर्कसंगत बनाने, इन ऋणों की व्यक्तिगत सीमा बढ़ाने और ऐसे कर्ज के लिए कुल सीमा को संशोधित करने का प्रस्ताव कर रहा है। आरबीआई ने कहा कि उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थान, संबंधित पक्ष और आम जनता चार मार्च, 2026 तक मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि आरबीआई ने कुल परिसंपत्तियों में असुरक्षित कर्ज की सीमा को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘हालांकि इस सीमा से अधिक अतिरिक्त असुरक्षित ऋण केवल प्राथमिकता क्षेत्र के पात्र ऋणों के संबंध में ही स्वीकृत होंगे, जो प्रति उधारकर्ता 50,000 रुपये की मौद्रिक सीमा पर निर्भर होगा।’’ इसके अलावा, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए सदस्यों को ऋण देने की सीमा को भी बढ़ाकर प्रति उधारकर्ता 2.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। तीसरे और चौथे स्तर की शहरी सहकारी समितियों (यूसीबी) के लिए आवास ऋण की अवधि और स्थगन संबंधी आवश्यकताओं को विनियमन से मुक्त करने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने इस महीने की मौद्रिक नीति समीक्षा में शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण मानदंडों की समीक्षा की घोषणा की थी। मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि यूसीबी की प्रबंधन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय बैंक मिशन-सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) शुरू करेगा। मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘‘इस मिशन का उद्देश्य यूसीबी से जुड़े 1.4 लाख से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है।

PNSPNS
Feb 12, 2026 - 12:44
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RBI का बड़ा फैसला: Urban Cooperative Banks से अब बिना गारंटी Loan लेना होगा आसान!

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसमें शहरी सहकारी बैंकों के लिए कुल परिसंपत्ति में असुरक्षित माने जाने वाले यानी बिना गारंटी वाले कर्ज का हिस्सा दोगुना कर 20 प्रतिशत तक करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण नियमों की समीक्षा के मसौदे के अनुसार, केंद्रीय बैंक व्यक्तिगत ऋण सीमा बढ़ाने और असुरक्षित ऋणों की परिको तर्कसंगत बनाने, इन ऋणों की व्यक्तिगत सीमा बढ़ाने और ऐसे कर्ज के लिए कुल सीमा को संशोधित करने का प्रस्ताव कर रहा है।

आरबीआई ने कहा कि उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थान, संबंधित पक्ष और आम जनता चार मार्च, 2026 तक मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि आरबीआई ने कुल परिसंपत्तियों में असुरक्षित कर्ज की सीमा को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘हालांकि इस सीमा से अधिक अतिरिक्त असुरक्षित ऋण केवल प्राथमिकता क्षेत्र के पात्र ऋणों के संबंध में ही स्वीकृत होंगे, जो प्रति उधारकर्ता 50,000 रुपये की मौद्रिक सीमा पर निर्भर होगा।’’ इसके अलावा, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए सदस्यों को ऋण देने की सीमा को भी बढ़ाकर प्रति उधारकर्ता 2.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।

तीसरे और चौथे स्तर की शहरी सहकारी समितियों (यूसीबी) के लिए आवास ऋण की अवधि और स्थगन संबंधी आवश्यकताओं को विनियमन से मुक्त करने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने इस महीने की मौद्रिक नीति समीक्षा में शहरी सहकारी बैंकों के लिए ऋण मानदंडों की समीक्षा की घोषणा की थी। मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि यूसीबी की प्रबंधन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय बैंक मिशन-सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) शुरू करेगा। मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘‘इस मिशन का उद्देश्य यूसीबी से जुड़े 1.4 लाख से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है।

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