Priya Kapoor vs Rani Kapoor | दिल्ली उच्च न्यायालय ने रानी कपूर को अपना पक्ष पेश करने के लिए जारी किया नोटिस

प्रिया कपूर बनाम रानी कपूर मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रानी कपूर को नोटिस जारी किया है। अदालत ने रानी कपूर को निर्देश दिया है कि वे प्रिया कपूर द्वारा दायर याचिका पर अपना पक्ष रखें और अपनी दलीलें पेश करें। यह आदेश मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है, ताकि अदालत दोनों पक्षों के तर्कों को समझने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुँच सके।प्रिया कपूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें रानी कपूर के विरुद्ध विशिष्ट कानूनी राहत या हस्तक्षेप की मांग की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत का पालन करते हुए दूसरे पक्ष को भी सुनने का निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने प्रिया कपूर के एक आवेदन पर रानी कपूर को नोटिस जारी किया, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत झूठी गवाही के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया है और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि हलफनामे और तस्वीरों जैसे ‘‘पुख्ता सबूत’’ मौजूद हैं, जिनसे यह पता चलता है कि रानी कपूर ने ‘‘शपथपत्र पर जानबूझकर झूठा बयान’’ दिया था कि उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट डीड’ पर हस्ताक्षर नहीं किये थे या उसकी सामग्री को नहीं पढ़ा था।इसे भी पढ़ें: Anil Kapoor Film Subedar Release Date | प्राइम वीडियो पर 5 मार्च को दहाड़ेंगे अनिल कपूर! 'सूबेदार' की रिलीज डेट का हुआ एलान अदालत ने प्रिया की उस याचिका पर रानी कपूर को भी नोटिस जारी किया जिसमें उन्होंने सामग्री को छिपाने के आरोप में मुकदमे को खारिज करने का अनुरोध किया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि वादी द्वारा प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग किया गया था जो अदालत के साथ धोखाधड़ी के बराबर था। अपनी पुत्रवधू प्रिया कपूर और अन्य के खिलाफ दायर मुकदमे में रानी कपूर ने अनुरोध किया है कि उनके कथित पारिवारिक ट्रस्ट को ‘‘अमान्य’’ घोषित किया जाये। अपनी याचिका में रानी कपूर (80) ने कहा है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट के लिए ‘‘जाली, धोखाधड़ी वाले’’ दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने प्रतिवादियों- अपनी पुत्रवधू प्रिया कपूर और पोते-पोतियों समेत अन्य लोगों को किसी भी तरह से ‘‘आरके फैमिली ट्रस्ट’’ का इस्तेमाल करने या उसके समर्थन में कार्य करने से स्थायी रूप से रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। रानी कपूर की याचिका में कहा गया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की संपूर्ण संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं, और जब संपत्ति ‘‘आरके फैमिली ट्रस्ट’’ को हस्तांतरित की गई थी तब उनके साथ ‘‘सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी’’ की गई थी।इसे भी पढ़ें: Govinda ने पत्नी Ssunita Ahuja के आरोपों पर तोड़ी चुप्पी, अफेयर के इल्जामों को बताया गलत  सुरिंदर कपूर ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ समेत विभिन्न व्यवसायों के प्रवर्तक थे। याचिका में दावा किया गया है कि संजय ने अपनी मृत्यु तक रानी कपूर को कभी यह पुष्टि नहीं की कि वास्तव में उन्हें उनके सभी अधिकारों, संपत्तियों और विरासत से वंचित कर दिया गया था और न ही उन्हें कथित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ की एक प्रति प्रदान की। अर्जी में आरोप लगाया गया है, “प्रतिवादी संख्या 1 से 9 (प्रिया और अन्य) की ओर से वादी (रानी) के दिवंगत बेटे संजय कपूर के साथ दुर्भाग्यपूर्ण मिलीभगत से किए गए अवैध लेन-देन के एक जटिल जाल के जरिये वादी की सभी संपत्तियां उनकी जानकारी के बिना ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ नामक एक धोखाधड़ी पर आधारित ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गईं।” इंग्लैंड में 12 जून को पोलो मैच के दौरान बेहोश होने के बाद संजय कपूर का निधन हो गया। बताया जाता है कि उन्हें हृदयाघात हुआ था। संजय की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के दो बच्चों द्वारा अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देने वाली एक याचिका भी उच्च न्यायालय में लंबित है जिसमें बच्चों ने प्रिया कपूर पर लालची होने का आरोप लगाया है। मामले में अगली सुनवाई मार्च में होगी। View this post on Instagram A post shared by Priya S Kapur (@priyasunjaykapur)

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Feb 12, 2026 - 12:44
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Priya Kapoor vs Rani Kapoor | दिल्ली उच्च न्यायालय ने रानी कपूर को अपना पक्ष पेश करने के लिए जारी किया नोटिस

प्रिया कपूर बनाम रानी कपूर मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रानी कपूर को नोटिस जारी किया है। अदालत ने रानी कपूर को निर्देश दिया है कि वे प्रिया कपूर द्वारा दायर याचिका पर अपना पक्ष रखें और अपनी दलीलें पेश करें। यह आदेश मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है, ताकि अदालत दोनों पक्षों के तर्कों को समझने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुँच सके।

प्रिया कपूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें रानी कपूर के विरुद्ध विशिष्ट कानूनी राहत या हस्तक्षेप की मांग की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत का पालन करते हुए दूसरे पक्ष को भी सुनने का निर्णय लिया है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने प्रिया कपूर के एक आवेदन पर रानी कपूर को नोटिस जारी किया, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत झूठी गवाही के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया है और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि हलफनामे और तस्वीरों जैसे ‘‘पुख्ता सबूत’’ मौजूद हैं, जिनसे यह पता चलता है कि रानी कपूर ने ‘‘शपथपत्र पर जानबूझकर झूठा बयान’’ दिया था कि उन्होंने ‘आरके फैमिली ट्रस्ट डीड’ पर हस्ताक्षर नहीं किये थे या उसकी सामग्री को नहीं पढ़ा था।

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अदालत ने प्रिया की उस याचिका पर रानी कपूर को भी नोटिस जारी किया जिसमें उन्होंने सामग्री को छिपाने के आरोप में मुकदमे को खारिज करने का अनुरोध किया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि वादी द्वारा प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग किया गया था जो अदालत के साथ धोखाधड़ी के बराबर था। अपनी पुत्रवधू प्रिया कपूर और अन्य के खिलाफ दायर मुकदमे में रानी कपूर ने अनुरोध किया है कि उनके कथित पारिवारिक ट्रस्ट को ‘‘अमान्य’’ घोषित किया जाये।

अपनी याचिका में रानी कपूर (80) ने कहा है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट के लिए ‘‘जाली, धोखाधड़ी वाले’’ दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने प्रतिवादियों- अपनी पुत्रवधू प्रिया कपूर और पोते-पोतियों समेत अन्य लोगों को किसी भी तरह से ‘‘आरके फैमिली ट्रस्ट’’ का इस्तेमाल करने या उसके समर्थन में कार्य करने से स्थायी रूप से रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। रानी कपूर की याचिका में कहा गया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की संपूर्ण संपत्ति की एकमात्र लाभार्थी थीं, और जब संपत्ति ‘‘आरके फैमिली ट्रस्ट’’ को हस्तांतरित की गई थी तब उनके साथ ‘‘सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी’’ की गई थी।

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सुरिंदर कपूर ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ समेत विभिन्न व्यवसायों के प्रवर्तक थे। याचिका में दावा किया गया है कि संजय ने अपनी मृत्यु तक रानी कपूर को कभी यह पुष्टि नहीं की कि वास्तव में उन्हें उनके सभी अधिकारों, संपत्तियों और विरासत से वंचित कर दिया गया था और न ही उन्हें कथित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ की एक प्रति प्रदान की।

अर्जी में आरोप लगाया गया है, “प्रतिवादी संख्या 1 से 9 (प्रिया और अन्य) की ओर से वादी (रानी) के दिवंगत बेटे संजय कपूर के साथ दुर्भाग्यपूर्ण मिलीभगत से किए गए अवैध लेन-देन के एक जटिल जाल के जरिये वादी की सभी संपत्तियां उनकी जानकारी के बिना ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ नामक एक धोखाधड़ी पर आधारित ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गईं।” इंग्लैंड में 12 जून को पोलो मैच के दौरान बेहोश होने के बाद संजय कपूर का निधन हो गया। बताया जाता है कि उन्हें हृदयाघात हुआ था।

संजय की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के दो बच्चों द्वारा अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देने वाली एक याचिका भी उच्च न्यायालय में लंबित है जिसमें बच्चों ने प्रिया कपूर पर लालची होने का आरोप लगाया है। मामले में अगली सुनवाई मार्च में होगी।

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