Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan Army Chief Asim Munir ने इशारों इशारों में जो आदेश दिया था, दहशतगर्दों ने उसका तत्काल पालन करके दिखा दिया

पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के पीछे जो प्रमुख कारण उभर कर सामने आ रहे हैं उनमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ओर से हाल में दिया गया उकसाने वाला बयान भी माना जा रहा है। हम आपको याद दिला दें कि मुनीर ने हाल ही में कश्मीर को पाकिस्तान की "गले की नस" बताया था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक कोई निश्चित आकलन नहीं किया है, लेकिन कई खुफिया अधिकारियों ने कहा कि ऐसे संकेत हैं कि मुनीर के भड़काऊ भाषण, जिसमें उन्होंने मुसलमानों और हिंदुओं के साथ अलग-अलग व्यवहार की बात कही थी, उसने लश्कर के एक गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को इस हमले की योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित किया होगा। हम आपको बता दें कि टीआरएफ ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली है। खुफिया आकलन के अनुसार, लश्कर के शीर्ष कमांडर सैफुल्ला कसूरी उर्फ खालिद पर साजिश रचने का संदेह है। सूत्रों ने बताया कि रावलकोट स्थित लश्कर के दो कमांडरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिनमें से एक अबू मूसा बताया जा रहा है।हम आपको बता दें कि रिपोर्टों के मुताबिक 18 अप्रैल को मूसा ने रावलकोट में एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें उसने कहा था कि कश्मीर में जिहाद जारी रहेगा, बंदूकें चलेंगी और सिर कलम करना जारी रहेगा। उसने कहा था कि भारत गैर स्थानीय लोगों को निवास प्रमाण पत्र देकर कश्मीर की जनसांख्यिकी बदलना चाहता है। पहलगाम में जिस तरह पर्यटकों को 'कलमा' पढ़ने के लिए कहा गया और जो नहीं पढ़ पाए, उन्हें गोली मार दी गई उससे यही साबित होता है कि आतंकवादियों ने हिंदुओं को ही मारने के स्पष्ट निर्देश दिये थे।इसे भी पढ़ें: हाथ में AK47, पठानी लंबा कुर्ता... पहलगाम में 28 पर्यटकों को मारने वाले आतंकवादी की तस्वीर ऑनलाइन वायरल | Pahalgam Tourist Attackहम आपको बता दें कि पिछले सप्ताह ही इस तरह की रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारतीय खुफिया प्रतिष्ठान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख की हिंदू विरोधी बयानबाजी को पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को फिर से संगठित करने के प्रयास के रूप में देखा है। इस तरह की भी रिपोर्टें थीं कि पाकिस्तान भारत में वक्फ अधिनियम में बदलावों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का फायदा उठाना चाहता है। हम आपको बता दें कि खुफिया एजेंसियों का प्रारंभिक आकलन है कि स्थानीय सहायकों द्वारा समर्थित लगभग छह आतंकवादियों ने हमला किया। एक सूत्र ने कहा, "ऐसा लगता है कि हमलावर हमले से कुछ दिन पहले पहुंचे, रेकी की और फिर मौका देखकर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि अप्रैल की शुरुआत में, ऐसी सूचनाएँ मिली थीं कि आतंकवादियों ने कुछ होटलों की टोह ली है।बहरहाल, हम आपको एक बार फिर याद दिला दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर ने कहा था, ‘‘हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।'' इस बयान पर गौर करते हुए आप आतंकवादियों द्वारा किये गये कृत्य को देखेंगे तो पाएंगे कि मुनीर का इशारा आतंकवादी समझ गये थे और उन्होंने वही किया जो मुनीर चाहते थे।

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Apr 24, 2025 - 03:30
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Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan Army Chief Asim Munir ने इशारों इशारों में जो आदेश दिया था, दहशतगर्दों ने उसका तत्काल पालन करके दिखा दिया
पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के पीछे जो प्रमुख कारण उभर कर सामने आ रहे हैं उनमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ओर से हाल में दिया गया उकसाने वाला बयान भी माना जा रहा है। हम आपको याद दिला दें कि मुनीर ने हाल ही में कश्मीर को पाकिस्तान की "गले की नस" बताया था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक कोई निश्चित आकलन नहीं किया है, लेकिन कई खुफिया अधिकारियों ने कहा कि ऐसे संकेत हैं कि मुनीर के भड़काऊ भाषण, जिसमें उन्होंने मुसलमानों और हिंदुओं के साथ अलग-अलग व्यवहार की बात कही थी, उसने लश्कर के एक गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को इस हमले की योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित किया होगा। हम आपको बता दें कि टीआरएफ ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली है। खुफिया आकलन के अनुसार, लश्कर के शीर्ष कमांडर सैफुल्ला कसूरी उर्फ खालिद पर साजिश रचने का संदेह है। सूत्रों ने बताया कि रावलकोट स्थित लश्कर के दो कमांडरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिनमें से एक अबू मूसा बताया जा रहा है।

हम आपको बता दें कि रिपोर्टों के मुताबिक 18 अप्रैल को मूसा ने रावलकोट में एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें उसने कहा था कि कश्मीर में जिहाद जारी रहेगा, बंदूकें चलेंगी और सिर कलम करना जारी रहेगा। उसने कहा था कि भारत गैर स्थानीय लोगों को निवास प्रमाण पत्र देकर कश्मीर की जनसांख्यिकी बदलना चाहता है। पहलगाम में जिस तरह पर्यटकों को 'कलमा' पढ़ने के लिए कहा गया और जो नहीं पढ़ पाए, उन्हें गोली मार दी गई उससे यही साबित होता है कि आतंकवादियों ने हिंदुओं को ही मारने के स्पष्ट निर्देश दिये थे।

इसे भी पढ़ें: हाथ में AK47, पठानी लंबा कुर्ता... पहलगाम में 28 पर्यटकों को मारने वाले आतंकवादी की तस्वीर ऑनलाइन वायरल | Pahalgam Tourist Attack

हम आपको बता दें कि पिछले सप्ताह ही इस तरह की रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारतीय खुफिया प्रतिष्ठान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख की हिंदू विरोधी बयानबाजी को पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को फिर से संगठित करने के प्रयास के रूप में देखा है। इस तरह की भी रिपोर्टें थीं कि पाकिस्तान भारत में वक्फ अधिनियम में बदलावों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का फायदा उठाना चाहता है। हम आपको बता दें कि खुफिया एजेंसियों का प्रारंभिक आकलन है कि स्थानीय सहायकों द्वारा समर्थित लगभग छह आतंकवादियों ने हमला किया। एक सूत्र ने कहा, "ऐसा लगता है कि हमलावर हमले से कुछ दिन पहले पहुंचे, रेकी की और फिर मौका देखकर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि अप्रैल की शुरुआत में, ऐसी सूचनाएँ मिली थीं कि आतंकवादियों ने कुछ होटलों की टोह ली है।

बहरहाल, हम आपको एक बार फिर याद दिला दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर ने कहा था, ‘‘हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।'' इस बयान पर गौर करते हुए आप आतंकवादियों द्वारा किये गये कृत्य को देखेंगे तो पाएंगे कि मुनीर का इशारा आतंकवादी समझ गये थे और उन्होंने वही किया जो मुनीर चाहते थे।

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