PM Modi के पहुंचने से पहले भारत से खूंखार हथियार लेकर निकला UAE! वैश्विक कूटनीति में सनसनी

बीती रात जब दिल्ली सो रही थी तब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर एक ऐसी हलचल हुई जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी। दिल्ली एयरपोर्ट की रैंप पर खड़ा था यूएई वायुसेना का महाबली बोइंग C17 ग्लोब मास्टर 3। चार धधकते हुए इंजन, 51 मीटर से ज्यादा चौड़े पंख और 77 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाला यह विमान भारत की धरती पर उतरा। यह कोई सामान्य लैंडिंग नहीं थी। यह लैंडिंग ठीक उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूएई दौरे पर निकलने वाले हैं। दरअसल मित्रता की असली परीक्षा संकट के समय होती है। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट का माहौल गमाया हुआ है। ईरान ने यूएई के फुजेरा पेट्रोलियम जोन पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।  जिसमें ना केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर भी सामने आई जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी। अब यूएई को अपनी डिफेंस इन्वेंटरी को तुरंत रिफिल करने की जरूरत थी और ऐसे समय में उसने दुनिया के किसी और देश की तरफ नहीं बल्कि भारत की तरफ देखा। आधिकारिक पुष्टि भले ही नहीं हो लेकिन रणनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में उतरे इस विमान में भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोट भारत डायनामिक्स और एलएटी द्वारा निर्मित घातक डिफेंस सप्लाई लोड की गई है और यह संदेश साफ दे दिया गया है कि अगर यूएई की सुरक्षा पर आंच आएगी तो भारत हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठेगा। इसे भी पढ़ें: कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशानाभारत और यूएई दोनों ही C17 ग्लोब मास्टर उड़ाते हैं। भारत के पास 11 और यूएई के पास 18 विमानों का बेड़ा है। एक ही तरह का प्लेटफार्म होने की वजह से दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और मेंटेनेंस शेयरिंग बेहद आसान हो गई है। जब यूएई का विमान दिल्ली आता है तो हमारे ग्राउंड रूट उसे अपने विमान की तरह हैंडल करते हैं। यही वो इंटर ऑपरेटिबिलिटी है जो भारत और यूएई के स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप का असली आधार है। असली नीव है। अब सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री मोदी अपनी यूरोप यात्रा के दौरान यूएई में रुकेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात भी करेंगे। जनवरी 2026 में जो लेटर ऑफ इवेंट साइन हुआ था अब उसे एक पूर्ण रक्षा समझौते में बदलने का वक्त आ गया है। इस पार्टनरशिप के छह प्रमुख स्तंभ है। पहला है मिसाइल और ड्रोन का साझा उत्पादन। अब केवल खरीदफरोख्त नहीं बल्कि मिलकर हथियार बनाए जाएंगे। दूसरा है जॉइंट आरएडी। भविष्य की तकनीक पर दोनों देशों के वैज्ञानिक साथ में काम करेंगे। तीसरा है स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग। रेगिस्तानी युद्ध और काउंटर टेररिज्म में महारत साझा करेंगे। चौथा है लॉजिस्टिक सपोर्ट। एक दूसरे के बेस और संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। पांचवा है साइबर सुरक्षा यानी कि डिजिटल खतरों से मिलकर लड़ना। आतंकवाद पर कड़ा प्रहार। कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जाएगा। अब दोस्तों इस पूरी कहानी के पीछे एक मास्टरमाइंड भी है भारत के एनएसए अजीत डोबाल। हाल ही में डोभाल साहब ने यूएई और सऊदी अरब की गुप्त यात्राएं की। मकसद साफ था ईरान इजराइल तनाव के बीच भारत के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि पश्चिमी एशिया में भारत का स्ट्रेटेजिक फुटप्रिंट इतना गहरा हो जाए कि कोई भी ताकत हमें नजरअंदाज ना कर सके। इसे भी पढ़ें: वैश्विक संकट के बीच सबसे बड़े कूटनीतिक मिशन पर निकल रहे हैं मोदी, विश्व राजनीति में होगा बड़ा उलटफेरभारत और यूएई के बीच का रिश्ता आज 100 बिलियन डॉलर के व्यापार को पार कर चुका है। 35 लाख भारतीय भाई-बहन यूएई की तरक्की में पसीना बहा रहे हैं। मेहनत कर रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का 25% हिस्सा यूएई से आता है। लेकिन अब यह रिश्ता संबंध सिर्फ तेल और रेमिटेंस तक सीमित नहीं है। अब यह रिश्ता टैंक, मिसाइल और रणनीतिक सुरक्षा का बन चुका है। वैसे आपको बता दें कि भारत और यूएई के बीच पनप रही यह नई डिफेंस केमिस्ट्री केवल कूटनीति नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का एक बड़ा संकेत है क्योंकि भारत के हथियारों की धमक पूरी दुनिया में है और यूएई भी भारत से हथियार मांग रहा है। ऐसे में क्या भारत अपने तीन सबसे घातक हथियार ब्रह्मोस आकाश और पिनाका यूएई को सौंप सकता है? यह भी समझ लेते हैं। देखिए सबसे पहले बात समंदर के सिकंदर ब्रह्मोस की। दोस्तों, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी 2.8 मैग की रफ्तार इसे किसी भी रडार की पकड़ से बाहर और किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अजय बनाती है।

PNSPNS
May 13, 2026 - 09:08
 0
PM Modi के पहुंचने से पहले भारत से खूंखार हथियार लेकर निकला UAE!  वैश्विक कूटनीति में सनसनी
बीती रात जब दिल्ली सो रही थी तब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर एक ऐसी हलचल हुई जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी। दिल्ली एयरपोर्ट की रैंप पर खड़ा था यूएई वायुसेना का महाबली बोइंग C17 ग्लोब मास्टर 3। चार धधकते हुए इंजन, 51 मीटर से ज्यादा चौड़े पंख और 77 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाला यह विमान भारत की धरती पर उतरा। यह कोई सामान्य लैंडिंग नहीं थी। यह लैंडिंग ठीक उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूएई दौरे पर निकलने वाले हैं। दरअसल मित्रता की असली परीक्षा संकट के समय होती है। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट का माहौल गमाया हुआ है। ईरान ने यूएई के फुजेरा पेट्रोलियम जोन पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।  जिसमें ना केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर भी सामने आई जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी। अब यूएई को अपनी डिफेंस इन्वेंटरी को तुरंत रिफिल करने की जरूरत थी और ऐसे समय में उसने दुनिया के किसी और देश की तरफ नहीं बल्कि भारत की तरफ देखा। आधिकारिक पुष्टि भले ही नहीं हो लेकिन रणनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में उतरे इस विमान में भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोट भारत डायनामिक्स और एलएटी द्वारा निर्मित घातक डिफेंस सप्लाई लोड की गई है और यह संदेश साफ दे दिया गया है कि अगर यूएई की सुरक्षा पर आंच आएगी तो भारत हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठेगा। 

इसे भी पढ़ें: कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशाना

भारत और यूएई दोनों ही C17 ग्लोब मास्टर उड़ाते हैं। भारत के पास 11 और यूएई के पास 18 विमानों का बेड़ा है। एक ही तरह का प्लेटफार्म होने की वजह से दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और मेंटेनेंस शेयरिंग बेहद आसान हो गई है। जब यूएई का विमान दिल्ली आता है तो हमारे ग्राउंड रूट उसे अपने विमान की तरह हैंडल करते हैं। यही वो इंटर ऑपरेटिबिलिटी है जो भारत और यूएई के स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप का असली आधार है। असली नीव है। अब सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री मोदी अपनी यूरोप यात्रा के दौरान यूएई में रुकेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात भी करेंगे। जनवरी 2026 में जो लेटर ऑफ इवेंट साइन हुआ था अब उसे एक पूर्ण रक्षा समझौते में बदलने का वक्त आ गया है। इस पार्टनरशिप के छह प्रमुख स्तंभ है। पहला है मिसाइल और ड्रोन का साझा उत्पादन। अब केवल खरीदफरोख्त नहीं बल्कि मिलकर हथियार बनाए जाएंगे। दूसरा है जॉइंट आरएडी। भविष्य की तकनीक पर दोनों देशों के वैज्ञानिक साथ में काम करेंगे। तीसरा है स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग। रेगिस्तानी युद्ध और काउंटर टेररिज्म में महारत साझा करेंगे। चौथा है लॉजिस्टिक सपोर्ट। एक दूसरे के बेस और संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। पांचवा है साइबर सुरक्षा यानी कि डिजिटल खतरों से मिलकर लड़ना। आतंकवाद पर कड़ा प्रहार। कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जाएगा। अब दोस्तों इस पूरी कहानी के पीछे एक मास्टरमाइंड भी है भारत के एनएसए अजीत डोबाल। हाल ही में डोभाल साहब ने यूएई और सऊदी अरब की गुप्त यात्राएं की। मकसद साफ था ईरान इजराइल तनाव के बीच भारत के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि पश्चिमी एशिया में भारत का स्ट्रेटेजिक फुटप्रिंट इतना गहरा हो जाए कि कोई भी ताकत हमें नजरअंदाज ना कर सके। 

इसे भी पढ़ें: वैश्विक संकट के बीच सबसे बड़े कूटनीतिक मिशन पर निकल रहे हैं मोदी, विश्व राजनीति में होगा बड़ा उलटफेर

भारत और यूएई के बीच का रिश्ता आज 100 बिलियन डॉलर के व्यापार को पार कर चुका है। 35 लाख भारतीय भाई-बहन यूएई की तरक्की में पसीना बहा रहे हैं। मेहनत कर रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का 25% हिस्सा यूएई से आता है। लेकिन अब यह रिश्ता संबंध सिर्फ तेल और रेमिटेंस तक सीमित नहीं है। अब यह रिश्ता टैंक, मिसाइल और रणनीतिक सुरक्षा का बन चुका है। वैसे आपको बता दें कि भारत और यूएई के बीच पनप रही यह नई डिफेंस केमिस्ट्री केवल कूटनीति नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का एक बड़ा संकेत है क्योंकि भारत के हथियारों की धमक पूरी दुनिया में है और यूएई भी भारत से हथियार मांग रहा है। ऐसे में क्या भारत अपने तीन सबसे घातक हथियार ब्रह्मोस आकाश और पिनाका यूएई को सौंप सकता है? यह भी समझ लेते हैं। देखिए सबसे पहले बात समंदर के सिकंदर ब्रह्मोस की। दोस्तों, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी 2.8 मैग की रफ्तार इसे किसी भी रडार की पकड़ से बाहर और किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अजय बनाती है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow