PM मोदी पर बनाए कार्टून को सुप्रीम कोर्ट ने 'भड़काऊ' बताया, कार्टूनिस्ट को फटकारा, गिरफ्तारी पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोपी कार्टूनिस्ट को मंगलवार को संरक्षण प्रदान किया। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि अगर उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई और आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की, तो राज्य कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। शीर्ष अदालत कथित अपमानजनक ऑनलाइन पोस्ट से नाराज़ थी और उसने कहा लोग किसी को भी, कुछ भी कह देते हैं। हेमंत मालवीय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 3 जुलाई को पारित उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी जिसमें उन्हें अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।इसे भी पढ़ें: भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का बड़ा बयानप्रधानमंत्री और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून ऑनलाइन साझा करने के आरोपी कार्टूनिस्ट को उच्चतम न्यायालय का संरक्षण मिला। सोशल मीडिया पोस्ट आपत्तिजनक, सभी तरह के दंडनीय प्रावधान लागू हो सकते हैं। लोग किसी को भी कुछ भी कह देते हैं। हमें इस बारे में कुछ तो करना होगा। वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी की शिकायत पर मई में इंदौर के लसूड़िया पुलिस थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।इसे भी पढ़ें: छंटनी का नोटिस जल्द आने वाला है! 1,300 से अधिक राजनयिकों और सिविल सेवकों को निकालने की योजना में ट्रंप प्रशासनजोशी ने आरोप लगाया कि मालवीय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अगस्त के बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मालवीय की ओर से कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है तो शिकायतकर्ता अदालत आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जो भी आपत्तिजनक टिप्पणी सोशल मीडिया से हटाना चाहती हैं वो हटाएं। 

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Jul 16, 2025 - 04:30
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PM मोदी पर बनाए कार्टून को सुप्रीम कोर्ट ने 'भड़काऊ' बताया, कार्टूनिस्ट को फटकारा, गिरफ्तारी पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोपी कार्टूनिस्ट को मंगलवार को संरक्षण प्रदान किया। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि अगर उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई और आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की, तो राज्य कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। शीर्ष अदालत कथित अपमानजनक ऑनलाइन पोस्ट से नाराज़ थी और उसने कहा लोग किसी को भी, कुछ भी कह देते हैं। हेमंत मालवीय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 3 जुलाई को पारित उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी जिसमें उन्हें अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।

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प्रधानमंत्री और आरएसएस कार्यकर्ताओं के कथित आपत्तिजनक कार्टून ऑनलाइन साझा करने के आरोपी कार्टूनिस्ट को उच्चतम न्यायालय का संरक्षण मिला। सोशल मीडिया पोस्ट आपत्तिजनक, सभी तरह के दंडनीय प्रावधान लागू हो सकते हैं। लोग किसी को भी कुछ भी कह देते हैं। हमें इस बारे में कुछ तो करना होगा। वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी की शिकायत पर मई में इंदौर के लसूड़िया पुलिस थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

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जोशी ने आरोप लगाया कि मालवीय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत मालवीय को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अगस्त के बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मालवीय की ओर से कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है तो शिकायतकर्ता अदालत आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जो भी आपत्तिजनक टिप्पणी सोशल मीडिया से हटाना चाहती हैं वो हटाएं। 

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