अमेरिका की गोद में बैठे पाकिस्तान को चीन ने एक ऐसा झटका दिया है कि पूरा इस्लामाबाद इस वक्त हिल गया है। अमेरिका को बॉस बनाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान की अब चीन ने एक ऐसे तरीके से हेकड़ी निकाली है कि उसकी कमर टूटती हुई नजर आ रही है। कहावत आपने सुनी होगी कि गरीबी में आटा गीला और इस वक्त यह कहावत पाकिस्तान पर एकदम फिट बैठती नजर आ रही है। पहले से ही कंगाली ऊपर से कर्ज का पहाड़ और अब सबसे बड़ा झटका। खुद चीन की कंपनी ने पाकिस्तान में काम बंद कर दिया है। दरअसल बता दें कि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी कि सीपीईसी जिसे पाकिस्तान अपनी लाइफ लाइन बताता रहा उसी सीपीईसी के सबसे अहम प्रोजेक्ट गदर पोर्ट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई।
ग्वादर फ्री जोन में काम कर रही चीनी कंपनी अपनी फैक्ट्री बंद कर चुकी है। सिर्फ बंद ही नहीं बल्कि सभी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता यहां से दिखा दिया गया। कारण क्या बताया गया? कंपनी ने यह साफ कहा है कि खराब कारोबारी यहां पर माहौल है। ऑपरेशनल दिक्कतें हैं। शिपमेंट अटक गई है। एक्सपोर्ट पूरी तरीके से रुक गया है और यहां पर लगातार घाटा हो रहा है। यानी जिस पाकिस्तान को चीन अरबों डॉलर देकर खड़ा करना चाहता था वही पाकिस्तान अपने ही सिस्टम से विदेशी निवेशकों को भगाने में लगा हुआ है। अब जरा सीपीईसी का पूरा खेल समझिए। साल 2015 में करीब 60 अरब डॉलर के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। मकसद था चीन को ग्वादर के जरिए अरब सागर तक सीधी पहुंच देना। लेकिन आज हालात क्या है उसे देखिए। प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा खतरे में है। जहां चीनी नागरिक भी सुरक्षित नहीं है और अब कंपनियों को पीछे हटना पड़ रहा है।
भारत को इससे क्या फायदा?
सबसे बड़ा फायदा स्ट्रेटेजिक राहत। ग्वादर पोर्ट को चीन गेम चेंजर बताता था जो भारत के लिए समुद्री घेराबंदी का हिस्सा था। लेकिन अगर वहीं प्रोजेक्ट अटकने लगे तो भारत पर दबाव अपने आप कम हो जाता है। दूसरा फायदा इंडिया की ग्लोबल इमेज मजबूत। जब विदेशी कंपनियां पाकिस्तान से निकलतीहैं तो वह स्टेबल और सुरक्षित मार्केट ढूंढती है और यहां भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आता है। मजबूत कानून, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बहुत बड़ा बाजार और सुरक्षा बहुत ज्यादा। तीसरा फायदा ट्रेड और पोर्ट्स में भड़कत। भारत पहले ही चबहार पोर्ट जहां पर ईरान काम कर रहा है और जो अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच का एक बड़ा रास्ता है अगर ग्वादर कमजोर पड़ता है तो चबाहार की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। चौथा फायदा चीन की रणनीति को झटका। चीन का स्ट्रिंग ऑफ पल्स प्लांट जिसमें हिंद महासागर के चारों तरफ अपने पोर्ट्स बनाना शामिल है। उसमें ग्वादर एक अहम कड़ी था और अगर वही कड़ी कमजोर हो जाए तो पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। धराशाई हो सकता है। पांचवा फायदा निवेश का डायवर्जन।