Operation Sindoor पर KBC एपिसोड विवाद में घिरा, शो में महिला सैन्य अधिकारियों की वर्दी में मौजूदगी पर उठे सवाल

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकप्रिय टीवी क्विज़ शो कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में तीन महिला सैन्य अधिकारियों— कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और मेजर प्रेरणा देवस्थली की उपस्थिति को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं हैं। केरल कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर कहा कि किसी गंभीर और पेशेवर सैन्य परंपरा वाले देश में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वर्दीधारी अधिकारी एक निजी मनोरंजन शो में वह भी पूरी वर्दी में, किसी फिल्म अभिनेता को किसी सैन्य अभियान की रणनीति समझाएं। पार्टी ने आरोप लगाया, “तीन वर्दीधारी अधिकारी एक प्राइवेट एंटरटेनमेंट शो में बैठकर एक बॉलीवुड अभिनेता को ऑपरेशन की योजना समझा रहे हैं। यह नए भारत का नजारा है, जो नरेंद्र मोदी के शासन में दिख रहा है।”वहीं शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस कार्यक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस निजी चैनल पर ये अधिकारी बुलाए गए हैं, उसकी मूल कंपनी सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट (2023–2031) के प्रसारण अधिकार रखती है और वह भारत-पाकिस्तान मैचों से राजस्व कमाएगी। उन्होंने कहा, ''“हमारी वीर महिला अधिकारी, जो ऑपरेशन सिंदूर का चेहरा बनीं, उन्हें एक निजी मनोरंजन चैनल ने अपने शो में बुलाया है। यही चैनल भारत-पाक मैचों से मुनाफा कमाएगा। अब इन बिंदुओं को जोड़कर देखिए।”इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: Pakistan-US Counterterrorism Talks, Shehbaz Sharif Statement और Ireland Racist Attacks से जुड़े मुद्दों का विश्लेषणहम आपको बता दें कि टीवी शो का प्रोमो और संदेश कार्यक्रम का टीज़र हाल ही में जारी हुआ, जिसमें अमिताभ बच्चन इन अधिकारियों का भव्य स्वागत करते नज़र आ रहे हैं। प्रोमो में कर्नल कुरैशी यह कहते हुए दिखती हैं- “पाकिस्तान बार-बार इस तरह की आतंकी घटनाएं करता रहा है। इसका जवाब देना ज़रूरी था और इसी वजह से ऑपरेशन सिंदूर की योजना बनाई गई।”देखा जाये तो यह विवाद सिर्फ एक टीवी उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो बड़े मुद्दों को छूता है। सवाल उठता है कि क्या वर्दीधारी अधिकारियों को मनोरंजन कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए, विशेषकर जब उसमें संवेदनशील सैन्य अभियानों की चर्चा हो? इसके अलावा सवाल उठता है कि क्या ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा बलों की वीरता को आम जनता तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम हैं, या फिर यह सैन्य पेशेवरता को हल्का करने का जोखिम उठाते हैं?देखा जाये तो भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों की पेशेवर छवि हमेशा संयम, अनुशासन और संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता पर आधारित रही है। पश्चिमी देशों में भी युद्ध नायकों को टीवी और मीडिया में बुलाया जाता है, लेकिन अक्सर यह पूर्व सैनिक या रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। वहीं, भारत में इस तरह की सार्वजनिक उपस्थिति अपेक्षाकृत नई है, जो शायद सैन्य-जनसंपर्क रणनीति के बदलते स्वरूप को दिखाती है।हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि इस तरह की उपस्थिति से सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने का खतरा है, खासकर जब कार्यक्रम किसी ऐसे चैनल पर हो जो भारत-पाक मुकाबलों से व्यावसायिक लाभ कमाता हो।बहरहाल, यह बहस आगे भी जारी रहेगी कि वर्दीधारी अधिकारियों की सार्वजनिक और मनोरंजन माध्यमों में उपस्थिति कहाँ तक जायज़ है। एक ओर यह कदम जनता में देशभक्ति और सेना के प्रति गर्व की भावना बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह सैन्य पेशेवरता और गोपनीयता की सीमाओं पर सवाल खड़े करता है।

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Aug 14, 2025 - 04:30
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Operation Sindoor पर KBC एपिसोड विवाद में घिरा, शो में महिला सैन्य अधिकारियों की वर्दी में मौजूदगी पर उठे सवाल
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकप्रिय टीवी क्विज़ शो कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में तीन महिला सैन्य अधिकारियों— कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और मेजर प्रेरणा देवस्थली की उपस्थिति को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं हैं। केरल कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर कहा कि किसी गंभीर और पेशेवर सैन्य परंपरा वाले देश में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वर्दीधारी अधिकारी एक निजी मनोरंजन शो में वह भी पूरी वर्दी में, किसी फिल्म अभिनेता को किसी सैन्य अभियान की रणनीति समझाएं। पार्टी ने आरोप लगाया, “तीन वर्दीधारी अधिकारी एक प्राइवेट एंटरटेनमेंट शो में बैठकर एक बॉलीवुड अभिनेता को ऑपरेशन की योजना समझा रहे हैं। यह नए भारत का नजारा है, जो नरेंद्र मोदी के शासन में दिख रहा है।”

वहीं शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस कार्यक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस निजी चैनल पर ये अधिकारी बुलाए गए हैं, उसकी मूल कंपनी सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट (2023–2031) के प्रसारण अधिकार रखती है और वह भारत-पाकिस्तान मैचों से राजस्व कमाएगी। उन्होंने कहा, ''“हमारी वीर महिला अधिकारी, जो ऑपरेशन सिंदूर का चेहरा बनीं, उन्हें एक निजी मनोरंजन चैनल ने अपने शो में बुलाया है। यही चैनल भारत-पाक मैचों से मुनाफा कमाएगा। अब इन बिंदुओं को जोड़कर देखिए।”

इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: Pakistan-US Counterterrorism Talks, Shehbaz Sharif Statement और Ireland Racist Attacks से जुड़े मुद्दों का विश्लेषण

हम आपको बता दें कि टीवी शो का प्रोमो और संदेश कार्यक्रम का टीज़र हाल ही में जारी हुआ, जिसमें अमिताभ बच्चन इन अधिकारियों का भव्य स्वागत करते नज़र आ रहे हैं। प्रोमो में कर्नल कुरैशी यह कहते हुए दिखती हैं- “पाकिस्तान बार-बार इस तरह की आतंकी घटनाएं करता रहा है। इसका जवाब देना ज़रूरी था और इसी वजह से ऑपरेशन सिंदूर की योजना बनाई गई।”

देखा जाये तो यह विवाद सिर्फ एक टीवी उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो बड़े मुद्दों को छूता है। सवाल उठता है कि क्या वर्दीधारी अधिकारियों को मनोरंजन कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए, विशेषकर जब उसमें संवेदनशील सैन्य अभियानों की चर्चा हो? इसके अलावा सवाल उठता है कि क्या ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा बलों की वीरता को आम जनता तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम हैं, या फिर यह सैन्य पेशेवरता को हल्का करने का जोखिम उठाते हैं?

देखा जाये तो भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों की पेशेवर छवि हमेशा संयम, अनुशासन और संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता पर आधारित रही है। पश्चिमी देशों में भी युद्ध नायकों को टीवी और मीडिया में बुलाया जाता है, लेकिन अक्सर यह पूर्व सैनिक या रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। वहीं, भारत में इस तरह की सार्वजनिक उपस्थिति अपेक्षाकृत नई है, जो शायद सैन्य-जनसंपर्क रणनीति के बदलते स्वरूप को दिखाती है।

हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि इस तरह की उपस्थिति से सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने का खतरा है, खासकर जब कार्यक्रम किसी ऐसे चैनल पर हो जो भारत-पाक मुकाबलों से व्यावसायिक लाभ कमाता हो।

बहरहाल, यह बहस आगे भी जारी रहेगी कि वर्दीधारी अधिकारियों की सार्वजनिक और मनोरंजन माध्यमों में उपस्थिति कहाँ तक जायज़ है। एक ओर यह कदम जनता में देशभक्ति और सेना के प्रति गर्व की भावना बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह सैन्य पेशेवरता और गोपनीयता की सीमाओं पर सवाल खड़े करता है।

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