Neil Armstrong Death Anniversary: Korean War में मौत को मात देने वाले Neil Armstrong कैसे बने Moon Hero

आज ही के दिन यानी की 25 अगस्त को चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान नील आर्मस्ट्रॉन्ग का निधन हो गया था। अमेरिका के रियल हीरो रहे नील का यह बचपन का सपना था कि उनको स्पेस जाना है। वहीं चंद्रमा तक के सफर में उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया। लेकिन इसके बाद उन्होंने खुद को प्रचार से दूर रखा। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर नील आर्मस्ट्रॉन्ग के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारओहियो के वापाकाओनेटा में 05 अगस्त 1930 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम स्टीफन कोयनिंग ओहिया राज्य सरकार में ऑडिटर थे। बचपन से ही नील को हवा में उड़ने का शौक था। उनको सिर्फ 6 साल की उम्र में दुनिया के सबसे लोकप्रिय विमान में उड़ने का अनुभव हुआ था। वह 15 साल की उम्र तक इतना अनुभव प्राप्त कर चुके थे कि वह खुद विमान उड़ा सकें।इसे भी पढ़ें: Vikram Sarabhai Birth Anniversary: Dr Vikram Sarabhai ने कैसे रखा भारत के Space Program का आधार, जानिए रोचक तथ्यनेवी में एविएटर16 साल की उम्र में नील ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से पहले स्टूडेंट फ्लाइट सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया था। इस दौरान उनको स्काउट में भी ईगल स्काउट की रैंक मिली और सिल्वर बफैलो अवार्ड मिला था। इसके बाद उन्होंने एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने US नेवी में एविएटर के रूप में भी सेवा दी। कोरिया युद्ध में बची जानसाल 1950 में वह क्वालिफाइड नेवल एविएटर बने। इसके बाद उनको अनुभव के साथ फाइटर बॉम्बर भी उड़ाने का मौका मिला। साल 1951 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग को कोरिया युद्ध में टोही विमान उड़ाने की जिम्मेदारी मिली। उनको निचली दूरी पर उड़ान भरते हुए सेफ जगह में आकर विमान से कूदना पड़ा। वहीं इस हादसे में नील को कोई नुकसान नहीं हुआ।अंतरिक्ष यात्री बनने का सफरफिर आर्मस्ट्रॉन्ग यूनाइटेड स्टेट नेवी रिजर्व में एन्साइन बने। साल 1953 तक सक्रिय ड्यूटी करने के बाद वह 1960 तक रिजर्व में रहे। इस बीच उन्होंने कई तरह के विमानों को उड़ाने का अनुभव लिया। साल 1958 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग अमेरिकी एयर फोर्स के मैन इन स्पेस सूनेस्ट कार्यक्रम में चुने गए, लेकिन बाद में वह कार्यक्रम रद्द हो गया।अयोग्य थे नीलसिविलयम टेस्ट पायलट होने के कारण वह अंतरिक्ष यात्री होने की योग्यता नहीं रखते थे। साल 1962 में प्रोजेक्ट जेमिनी के लिए आवेदन मांगे गए। जिसके लिए सिविलयन टेस्ट पायलटों को योग्य माना गया था। सितंबर 1962 में नील को नासा ने बुलासा और वह नासा एरोनॉट्सकॉर्प के लिए सिलेक्ट हुए। नील इस ग्रुप में चुने गए दो सिविलियन पायलट में से एक थे। फिर वह जेमिनी अभियान तीन बार अंतरिक्ष गए।चंद्रयात्रा के लिए सिलेक्शनअपोलो-1 अभियान के बाद नील 18 अंतरिक्ष यात्रियों के दल में शामिल हुए, जिनको चंद्रमा पर जाना था। एक बार लूनार लैंडिंग की प्रैक्टिस के दौरान जब उनका विमान उतर रहा था, तो सही समय पर पैराशूट खोलने के कारण वह बच गए थे। आर्मस्ट्रॉन्ग को अपोलो-11 के क्रू के लिए कमांडर चुना गया। वहीं 20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए। अपना मिशन पूरा करने के बाद वह 2 साल तक नासा पर रहे। फिर उन्होंने ओहियो में इंजिनियरिंग का शिक्षण कार्य किया था। लेकिन साल 1980 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने शिक्षण कार्य भी छोड़ दिया।मृत्युवहीं 25 अगस्त 2012 को 82 साल की उम्र में नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने ओहिया में आखिरी सांस ली।

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Aug 26, 2026 - 04:31
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Neil Armstrong Death Anniversary: Korean War में मौत को मात देने वाले Neil Armstrong कैसे बने Moon Hero
आज ही के दिन यानी की 25 अगस्त को चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान नील आर्मस्ट्रॉन्ग का निधन हो गया था। अमेरिका के रियल हीरो रहे नील का यह बचपन का सपना था कि उनको स्पेस जाना है। वहीं चंद्रमा तक के सफर में उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया। लेकिन इसके बाद उन्होंने खुद को प्रचार से दूर रखा। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर नील आर्मस्ट्रॉन्ग के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

ओहियो के वापाकाओनेटा में 05 अगस्त 1930 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम स्टीफन कोयनिंग ओहिया राज्य सरकार में ऑडिटर थे। बचपन से ही नील को हवा में उड़ने का शौक था। उनको सिर्फ 6 साल की उम्र में दुनिया के सबसे लोकप्रिय विमान में उड़ने का अनुभव हुआ था। वह 15 साल की उम्र तक इतना अनुभव प्राप्त कर चुके थे कि वह खुद विमान उड़ा सकें।

इसे भी पढ़ें: Vikram Sarabhai Birth Anniversary: Dr Vikram Sarabhai ने कैसे रखा भारत के Space Program का आधार, जानिए रोचक तथ्य

नेवी में एविएटर

16 साल की उम्र में नील ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से पहले स्टूडेंट फ्लाइट सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया था। इस दौरान उनको स्काउट में भी ईगल स्काउट की रैंक मिली और सिल्वर बफैलो अवार्ड मिला था। इसके बाद उन्होंने एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने US नेवी में एविएटर के रूप में भी सेवा दी। 

कोरिया युद्ध में बची जान

साल 1950 में वह क्वालिफाइड नेवल एविएटर बने। इसके बाद उनको अनुभव के साथ फाइटर बॉम्बर भी उड़ाने का मौका मिला। साल 1951 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग को कोरिया युद्ध में टोही विमान उड़ाने की जिम्मेदारी मिली। उनको निचली दूरी पर उड़ान भरते हुए सेफ जगह में आकर विमान से कूदना पड़ा। वहीं इस हादसे में नील को कोई नुकसान नहीं हुआ।

अंतरिक्ष यात्री बनने का सफर

फिर आर्मस्ट्रॉन्ग यूनाइटेड स्टेट नेवी रिजर्व में एन्साइन बने। साल 1953 तक सक्रिय ड्यूटी करने के बाद वह 1960 तक रिजर्व में रहे। इस बीच उन्होंने कई तरह के विमानों को उड़ाने का अनुभव लिया। साल 1958 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग अमेरिकी एयर फोर्स के मैन इन स्पेस सूनेस्ट कार्यक्रम में चुने गए, लेकिन बाद में वह कार्यक्रम रद्द हो गया।

अयोग्य थे नील

सिविलयम टेस्ट पायलट होने के कारण वह अंतरिक्ष यात्री होने की योग्यता नहीं रखते थे। साल 1962 में प्रोजेक्ट जेमिनी के लिए आवेदन मांगे गए। जिसके लिए सिविलयन टेस्ट पायलटों को योग्य माना गया था। सितंबर 1962 में नील को नासा ने बुलासा और वह नासा एरोनॉट्सकॉर्प के लिए सिलेक्ट हुए। नील इस ग्रुप में चुने गए दो सिविलियन पायलट में से एक थे। फिर वह जेमिनी अभियान तीन बार अंतरिक्ष गए।

चंद्रयात्रा के लिए सिलेक्शन

अपोलो-1 अभियान के बाद नील 18 अंतरिक्ष यात्रियों के दल में शामिल हुए, जिनको चंद्रमा पर जाना था। एक बार लूनार लैंडिंग की प्रैक्टिस के दौरान जब उनका विमान उतर रहा था, तो सही समय पर पैराशूट खोलने के कारण वह बच गए थे। आर्मस्ट्रॉन्ग को अपोलो-11 के क्रू के लिए कमांडर चुना गया। वहीं 20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए। अपना मिशन पूरा करने के बाद वह 2 साल तक नासा पर रहे। फिर उन्होंने ओहियो में इंजिनियरिंग का शिक्षण कार्य किया था। लेकिन साल 1980 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने शिक्षण कार्य भी छोड़ दिया।

मृत्यु

वहीं 25 अगस्त 2012 को 82 साल की उम्र में नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने ओहिया में आखिरी सांस ली।

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