Madhav Sadashiv Golwalkar Death Anniversary: RSS के वो 'गुरुजी' जिनके दौर में लगा था बैन, Indira Gandhi से भी था कनेक्शन

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक रहे माधव सदाशिव राव गोलवलकर का 05 जून को निधन हो गया था। सरसंघचालक के रूप में गुरुजी के नेतृत्व के 33 साल काफी चुनौतीपूर्ण लेकिन उपलब्धियों से भरे रहे। माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर के कार्यकाल में महात्मा गांधी हत्याकांड के बाद संघ ने पहले प्रतिबंध का सफलतापूर्वक सामना किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ संघ को संगठित रखा बल्कि संघ का व्यापक विस्तार भी किया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर माधवराव सदाशिव गोलवलकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारबता दें कि 19 फरवरी 1906 को माधवराव सदाशिव राव गोलवरकर का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1929 में बीएचयू से प्राणिशास्त्र में एम.एस.सी पास किया। वह विश्वविद्यालय से ही संघ के संपर्क में आए और साल 1933 में उनकी नागपुर वापसी हुई। यहां पर उनका संघ संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार से संपर्क बढ़ा। गोलवरकर ने कानून की पढ़ाई भी की थी।सरसंघचालक का पदसाल 1936 में आध्यात्म की खोज के लिए गोलवरकर बंगाल के सरगाची के लिए रवाना हुए। यहां पर उन्होंने रामकृष्ण मठ के स्वामी अखंडानंद की सेवा में दो साल बिताए। फिर वापसी पर हेडगेवार ने उनको अपना जीवन संघ को समर्पित करने के लिए राजी कर लिया। साल 1940 में जब RSS प्रमुख का निधन हुआ, तो 34 साल की उम्र में गोलवलकर ने सरसंघचालक का पदभार संभाला।RSS पर प्रतिबंधसाल 1947 में भारत विभाजन के दौर से गुजर रहा था। इस दौरान गांधी ने गोलवलकर से मुलाकात की और बताया कि इन दंगों में आरएसएस के शामिल होने की बात सुन रहे हैं। हालांकि गोलवलकर ने गांधी को आश्वस्त किया कि मुसलमानों की हत्या के पीछे RSS नहीं है। संघ सिर्फ हिंदुस्तान की रक्षा चाहता था। वहीं गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की। जोकि कट्टरपंथी हिंदू राष्ट्रवादी था। नाथूराम RSS के सदस्य थे। संघ का कहना था कि नाथूराम ने हत्या करने से पहले संघ की सदस्यता छोड़ दी थी।लेकिन इस घटना के बाद गोलवलकर और आरएसएस के सदस्यों को फरवरी 1948 में गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं तत्कालीन गृहमंत्री पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया। फिर 09 दिसंबर 1948 में गोलवलकर ने दिल्ली में शुरू किए गए सत्याग्रह के साथ आरएसएस पर प्रतिबंध को चुनौती देने का फैसला किया। वहीं जुलाई 1949 में RSS के भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा लेने के बाद ही इस पर लगा प्रतिबंध हटा।मृत्युसाल 1972-73 में गोलवलकर ने आखिरी बार देश भर में एक दौरा किया था। यह दौरा बांग्लादेश लिबरेशन वॉर में पाकिस्तान पर भारत की जीत के ठीक बाद था। इसके लिए गोलवलकर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को बधाई दी थी। वहीं मार्च 1973 में गोलवलकर आखिरी बार नागपुर लौटे। वहीं 05 जून 1973 में माधवराव सदाशिव राव गोलवरकर का निधन हो गया।

PNSPNS
Jun 6, 2026 - 11:08
 0
Madhav Sadashiv Golwalkar Death Anniversary: RSS के वो 'गुरुजी' जिनके दौर में लगा था बैन, Indira Gandhi से भी था कनेक्शन
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक रहे माधव सदाशिव राव गोलवलकर का 05 जून को निधन हो गया था। सरसंघचालक के रूप में गुरुजी के नेतृत्व के 33 साल काफी चुनौतीपूर्ण लेकिन उपलब्धियों से भरे रहे। माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर के कार्यकाल में महात्मा गांधी हत्याकांड के बाद संघ ने पहले प्रतिबंध का सफलतापूर्वक सामना किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ संघ को संगठित रखा बल्कि संघ का व्यापक विस्तार भी किया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर माधवराव सदाशिव गोलवलकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

बता दें कि 19 फरवरी 1906 को माधवराव सदाशिव राव गोलवरकर का जन्म हुआ था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1929 में बीएचयू से प्राणिशास्त्र में एम.एस.सी पास किया। वह विश्वविद्यालय से ही संघ के संपर्क में आए और साल 1933 में उनकी नागपुर वापसी हुई। यहां पर उनका संघ संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार से संपर्क बढ़ा। गोलवरकर ने कानून की पढ़ाई भी की थी।

सरसंघचालक का पद

साल 1936 में आध्यात्म की खोज के लिए गोलवरकर बंगाल के सरगाची के लिए रवाना हुए। यहां पर उन्होंने रामकृष्ण मठ के स्वामी अखंडानंद की सेवा में दो साल बिताए। फिर वापसी पर हेडगेवार ने उनको अपना जीवन संघ को समर्पित करने के लिए राजी कर लिया। साल 1940 में जब RSS प्रमुख का निधन हुआ, तो 34 साल की उम्र में गोलवलकर ने सरसंघचालक का पदभार संभाला।

RSS पर प्रतिबंध

साल 1947 में भारत विभाजन के दौर से गुजर रहा था। इस दौरान गांधी ने गोलवलकर से मुलाकात की और बताया कि इन दंगों में आरएसएस के शामिल होने की बात सुन रहे हैं। हालांकि गोलवलकर ने गांधी को आश्वस्त किया कि मुसलमानों की हत्या के पीछे RSS नहीं है। संघ सिर्फ हिंदुस्तान की रक्षा चाहता था। वहीं गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की। जोकि कट्टरपंथी हिंदू राष्ट्रवादी था। नाथूराम RSS के सदस्य थे। संघ का कहना था कि नाथूराम ने हत्या करने से पहले संघ की सदस्यता छोड़ दी थी।

लेकिन इस घटना के बाद गोलवलकर और आरएसएस के सदस्यों को फरवरी 1948 में गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं तत्कालीन गृहमंत्री पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया। फिर 09 दिसंबर 1948 में गोलवलकर ने दिल्ली में शुरू किए गए सत्याग्रह के साथ आरएसएस पर प्रतिबंध को चुनौती देने का फैसला किया। वहीं जुलाई 1949 में RSS के भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा लेने के बाद ही इस पर लगा प्रतिबंध हटा।

मृत्यु

साल 1972-73 में गोलवलकर ने आखिरी बार देश भर में एक दौरा किया था। यह दौरा बांग्लादेश लिबरेशन वॉर में पाकिस्तान पर भारत की जीत के ठीक बाद था। इसके लिए गोलवलकर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को बधाई दी थी। वहीं मार्च 1973 में गोलवलकर आखिरी बार नागपुर लौटे। वहीं 05 जून 1973 में माधवराव सदाशिव राव गोलवरकर का निधन हो गया।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow