Missile Attack UAE | खाड़ी में फिर मंडराए युद्ध के बादल! यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमला, होर्मुज़ में अमेरिकी जहाजों पर गोलाबारी

खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थायी युद्धविराम एक बार फिर गहरे संकट में है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार तड़के घोषणा की कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense System) देश की ओर दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों का "सक्रिय रूप से मुकाबला" कर रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही घंटों पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना और ईरानी बलों के बीच सीधी झड़प हुई थी।इसे भी पढ़ें: ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया 'गैर-कानूनी' मंत्रालय ने निवासियों को सलाह दी कि वे हवाई हमलों में गिराए गए प्रक्षेपास्त्रों के किसी भी मलबे या टुकड़ों के पास न जाएं, उनकी तस्वीरें न लें या उन्हें छुएं नहीं। इससे कुछ घंटे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने बृहस्पतिवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के तीन जहाजों पर ईरानी हमलों को रोका और अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।  ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ‘‘बिना किसी उकसावे के बावजूद किए गए ईरानी हमलों’’ को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी पोत को नुकसान नहीं पहुंचा है। उसने कहा कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहती लेकिन ‘‘अमेरिकी बलों की रक्षा के लिए तैनात और तैयार है।’’ इसे भी पढ़ें: IndiGo Flight में Mahua Moitra के खिलाफ नारेबाजी, 'चोर TMC चोर' और 'जय श्री राम' के नारों से मची खलबली   अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि हिंसा के बावजूद युद्धविराम कायम है। अमेरिका और ईरान के बीच आठ अप्रैल से युद्धविराम काफी हद तक कायम है। पिछले महीने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता युद्ध को समाप्त कराने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रही। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे। यूएई जैसे व्यापारिक केंद्र पर हमला और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (होर्मुज़) में सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। यदि यह हिंसा नहीं रुकी, तो 8 अप्रैल का नाज़ुक शांति समझौता पूरी तरह टूट सकता है।  International News in Hindi Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 

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May 8, 2026 - 10:12
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Missile Attack UAE | खाड़ी में फिर मंडराए युद्ध के बादल! यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमला, होर्मुज़ में अमेरिकी जहाजों पर गोलाबारी

खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थायी युद्धविराम एक बार फिर गहरे संकट में है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार तड़के घोषणा की कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense System) देश की ओर दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों का "सक्रिय रूप से मुकाबला" कर रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही घंटों पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना और ईरानी बलों के बीच सीधी झड़प हुई थी।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया 'गैर-कानूनी'

 

मंत्रालय ने निवासियों को सलाह दी कि वे हवाई हमलों में गिराए गए प्रक्षेपास्त्रों के किसी भी मलबे या टुकड़ों के पास न जाएं, उनकी तस्वीरें न लें या उन्हें छुएं नहीं। इससे कुछ घंटे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने बृहस्पतिवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के तीन जहाजों पर ईरानी हमलों को रोका और अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
 
‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ‘‘बिना किसी उकसावे के बावजूद किए गए ईरानी हमलों’’ को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी पोत को नुकसान नहीं पहुंचा है। उसने कहा कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहती लेकिन ‘‘अमेरिकी बलों की रक्षा के लिए तैनात और तैयार है।’’
 

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि हिंसा के बावजूद युद्धविराम कायम है। अमेरिका और ईरान के बीच आठ अप्रैल से युद्धविराम काफी हद तक कायम है। पिछले महीने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता युद्ध को समाप्त कराने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रही। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे।
 
यूएई जैसे व्यापारिक केंद्र पर हमला और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (होर्मुज़) में सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। यदि यह हिंसा नहीं रुकी, तो 8 अप्रैल का नाज़ुक शांति समझौता पूरी तरह टूट सकता है। 
 
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