पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची अंदरूनी कलह और बगावत अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संगठन के भीतर लगातार कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट के बीच, ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अपने कालीघाट स्थित आवास पर पार्टी के सांसदों और विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी, लेकिन इसमें जनप्रतिनिधियों की बेहद कम संख्या ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पार्टी के विशाल संख्या बल के मुकाबले इस हाई-लेवल बैठक में सिर्फ 14 जनप्रतिनिधि (8 विधायक और 6 सांसद) ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे।
जानकारी के लिए बता दें कि TMC के पास 42 सांसद (लोकसभा में 29 और राज्यसभा में 13) और पश्चिम बंगाल विधानसभा में 80 विधायक हैं। हालांकि, शुक्रवार को कोलकाता में ममता के आवास पर हुई हाई-लेवल बैठक में सिर्फ़ आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे।
बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में बीना मंडल, अशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल थे। वहीं, डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय वे छह सांसद थे जो बैठक में पहुंचे।
इस घटना ने एक बार फिर ममता के सामने बढ़ रही बगावत को उजागर किया, लेकिन पार्टी ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि यह सभी विधायकों की बैठक नहीं थी। TMC ने एक बयान में कहा, "कृपया ध्यान दें - यह 'नेशनल वर्किंग कमेटी' की बैठक थी, न कि सभी विधायकों या सांसदों की। महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी जैसे कई सांसद, जो नेशनल वर्किंग कमेटी का हिस्सा हैं, वर्चुअल तरीके से इसमें शामिल हुए थे।"
TMC में बगावत
ममता को सबसे पहले 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में बगावत का सामना करना पड़ा, जहां बागी नेताओं का नेतृत्व पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रता बनर्जी कर रहे हैं। रिताब्रता, जिन्हें संदीपन साहा के साथ पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण TMC से निकाल दिया गया था, उन्हें 57 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिससे विधानसभा में पार्टी असल में दो गुटों में बंट गई है। स्पीकर रथिंद्र बोस से मान्यता मिलने के बाद बागी गुट ने रिताब्रता को विपक्ष का नेता (LoP) घोषित कर दिया है। ममता को संसद में भी बगावत का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ दोनों सदनों के कई सदस्यों ने तृणमूल नेतृत्व के प्रति खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और खबरों के अनुसार, वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने या पार्टी को तोड़ने की योजना बना रहे हैं।
इसलिए, खबरों के अनुसार ममता लोकसभा जाने पर विचार कर रही हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री 2026 के विधानसभा चुनावों में भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी से हार गई थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, TMC लोकसभा सांसद यूसुफ पठान से बहरामपुर सीट खाली करने के लिए कह सकती है; उन्होंने 2024 के आम चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर यह सीट जीती थी। इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ममता का निचले सदन में जाना दिलचस्प होगा और संभवतः यह लोकसभा में उनके खिलाफ हो रही बगावत को दबाने की एक चाल हो सकती है।