Makar Sankranti 2026: Suryadev का मकर राशि में प्रवेश, जानें Makar Sankranti 2026 का समय और मुहूर्त

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व स्नान-दान आदि के लिए बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है। इस पर्व को देशभर में कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। बता दें कि मकर संक्रांति का पर्व सूर्य भगवान के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह वह पल होता है, जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। साथ ही इस दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ काल शुरू होता है।वहीं कई वर्षों बाद मकर संक्रांति और एकादशी का ऐसा संयोग बना है, जिससे इस दिन दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस दिन दान और पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन दोपहर 03:13 मिनट पर मकर राशि में सूर्य गोचर करेंगे। यही वजह है कि इस समय को दिन का सबसे पुण्य काल माना जा रहा है। इसके अलावा 14 जनवरी को सूर्योदय से लेकर शाम 05:52 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। इस अवधि में सूर्य देव और भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-उपासना कर सकते हैं। वहीं सुबह 07:15 मिनट से दोपहर 03:03 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस दौरान सुबह 07:15 मिनट से 03:03 मिनट तक अमृत सिद्धि योग भी रहेगा।दान-पुण्य के कार्यइस बार मकर संक्रांति के मौके पर षटतिला एकादशी का भी संयोग बना है। क्योंकि एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन चावल का सेवन नहीं करें। वहीं आज चावल का दान भी नहीं करना चाहिए। आप अगले दिन यानी की 15 जनवरी 2026 को द्वादशी तिथि पर खिचड़ी का दान व सेवन कर सकते हैं। हालांकि आप मकर संक्रांति पर गुड़ और तिल का सेवन कर सकते हैं और इसका दान भी कर सकते हैं।महत्वमकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, सूर्य आराधना और तीर्थ स्थलों पर स्नान-दान से पुण्यफल मिलता है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है। वहीं तीर्थराज प्रयाग में और गंगा सागर में स्नान करने को महास्नान की संज्ञा दी गई है।

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Jan 15, 2026 - 14:05
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Makar Sankranti 2026: Suryadev का मकर राशि में प्रवेश, जानें Makar Sankranti 2026 का समय और मुहूर्त
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व स्नान-दान आदि के लिए बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है। इस पर्व को देशभर में कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। बता दें कि मकर संक्रांति का पर्व सूर्य भगवान के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह वह पल होता है, जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। साथ ही इस दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ काल शुरू होता है।

वहीं कई वर्षों बाद मकर संक्रांति और एकादशी का ऐसा संयोग बना है, जिससे इस दिन दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस दिन दान और पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन दोपहर 03:13 मिनट पर मकर राशि में सूर्य गोचर करेंगे। यही वजह है कि इस समय को दिन का सबसे पुण्य काल माना जा रहा है। इसके अलावा 14 जनवरी को सूर्योदय से लेकर शाम 05:52 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। इस अवधि में सूर्य देव और भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-उपासना कर सकते हैं। वहीं सुबह 07:15 मिनट से दोपहर 03:03 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस दौरान सुबह 07:15 मिनट से 03:03 मिनट तक अमृत सिद्धि योग भी रहेगा।

दान-पुण्य के कार्य

इस बार मकर संक्रांति के मौके पर षटतिला एकादशी का भी संयोग बना है। क्योंकि एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन चावल का सेवन नहीं करें। वहीं आज चावल का दान भी नहीं करना चाहिए। आप अगले दिन यानी की 15 जनवरी 2026 को द्वादशी तिथि पर खिचड़ी का दान व सेवन कर सकते हैं। हालांकि आप मकर संक्रांति पर गुड़ और तिल का सेवन कर सकते हैं और इसका दान भी कर सकते हैं।

महत्व

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, सूर्य आराधना और तीर्थ स्थलों पर स्नान-दान से पुण्यफल मिलता है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है। वहीं तीर्थराज प्रयाग में और गंगा सागर में स्नान करने को महास्नान की संज्ञा दी गई है।

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