Maharashtra Assembly ने भूमि उप-विभाजन नियमों को आसान बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दी

महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार को एक संशोधन विधेयक पारित किया जिसमें शहरी क्षेत्रों में छोटे भूखंडों के उपविभाजन पर प्रतिबंधों को कम करने का प्रावधान है। इस कानून से लगभग तीन करोड़ निवासियों को लाभ होगा। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 को सदन में पेश किया जहां बहस के बाद इसे पारित कर दिया गया। बावनकुले ने सदन को बताया कि यह विधायी प्रावधान उन लगभग 60 लाख परिवारों, यानी करीब तीन करोड़ निवासियों को लाभ पहुंचाएगा, जो शहरों में छोटे ‘गुंठेवारी’ भूखंडों (कृषि भूमि को अनुमति के बगैर छोटे आवासीय भूखंडों में बांट देना) पर रहते हैं। संशोधन के साथ अब इन छोटे भूखंडों की खरीद-बिक्री सरल हो जाएगी, और जमीन मालिक अब 7/12 भूमि खसरा दस्तावेज में अपना नाम स्वतंत्र रूप से दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही उन क्षेत्रों में जहां विकास योजना या क्षेत्रीय योजना पहले से स्वीकृत थी, वहां जिलाधिकारियों से बार-बार गैर-कृषि अनुमति लेने की शर्त हटा दी गई है। इसके स्थान पर भू-स्वामी अब केवल एक ही बार प्रीमियम का भुगतान कर समूची प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

PNSPNS
Dec 10, 2025 - 10:49
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Maharashtra Assembly ने भूमि उप-विभाजन नियमों को आसान बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दी

महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार को एक संशोधन विधेयक पारित किया जिसमें शहरी क्षेत्रों में छोटे भूखंडों के उपविभाजन पर प्रतिबंधों को कम करने का प्रावधान है। इस कानून से लगभग तीन करोड़ निवासियों को लाभ होगा।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 को सदन में पेश किया जहां बहस के बाद इसे पारित कर दिया गया। बावनकुले ने सदन को बताया कि यह विधायी प्रावधान उन लगभग 60 लाख परिवारों, यानी करीब तीन करोड़ निवासियों को लाभ पहुंचाएगा, जो शहरों में छोटे ‘गुंठेवारी’ भूखंडों (कृषि भूमि को अनुमति के बगैर छोटे आवासीय भूखंडों में बांट देना) पर रहते हैं।

संशोधन के साथ अब इन छोटे भूखंडों की खरीद-बिक्री सरल हो जाएगी, और जमीन मालिक अब 7/12 भूमि खसरा दस्तावेज में अपना नाम स्वतंत्र रूप से दर्ज करा सकेंगे।

इसके साथ ही उन क्षेत्रों में जहां विकास योजना या क्षेत्रीय योजना पहले से स्वीकृत थी, वहां जिलाधिकारियों से बार-बार गैर-कृषि अनुमति लेने की शर्त हटा दी गई है। इसके स्थान पर भू-स्वामी अब केवल एक ही बार प्रीमियम का भुगतान कर समूची प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

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