Lok Janshakti Party: LJP ने बिहार से ज्यादा केंद्र की सत्ता में बनाई भागेदारी, ऐसे हुई थी पार्टी की स्थापना

लोक जनशक्ति पार्टी का गठन ऐसे नेता ने किया था, जिसको राजनीतिक मौसम का वैज्ञानिक माना जाता था। यह नेता और कोई नहीं बल्कि रामविलास पासवान थे। बिहार की सबसे छोटी पार्टी होने के बाद भी लोक जनशक्ति पार्टी की हमेशा सत्ता में भागेदारी रहती है। पार्टी की यह हिस्सेदारी सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि केंद्र की सत्ता में भी मिलती है। जब बिहार की राजनीति के हाल बदले तो रामविलास पासवान ने अपनी पार्टी बना ली।लोक जनशक्ति पार्टी का गठनसाल 2000 में राम विलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी। इससे पहले रामविलास पासवान जनता पार्टी और फिर जनता दल और इसके बाद जनता दल यूनाइडेट का हिस्सा रहे। लेकिन बिहार की सियासत बदली तो रामविलास पासवान ने अपनी पार्टी बना ली। दलितों की राजनीति करने वाले रामविलास पासवान ने साल 1981 में दलिन सेना संगठन की स्थापना की।इसे भी पढ़ें: Congress Party: बिहार की राजनीति पर था कांग्रेस का दबदबा, जानिए कैसे घटता गया पार्टी का जनाधारपार्टी का उद्देश्यएलजेपी का गठन सामाजिक न्याय और दलित पीड़ितों की आवाज को उठाने के मकसद से किया गया था। बता दें कि बिहार में दलित समुदाय की आबादी करीब 17 फीसदी है, लेकिन दुसाध जाति का वोट करीब 5 फीसदी है। यह लोक जनशक्ति पार्टी का कोर वोट बैंक माना जाता है।राजनीतिक सफरसाल 2004 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी ने 4 सीटें जीती थीं और 4 सीटों के साथ यूपीए का हिस्सा बने। फिर साल 2005 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया और 29 सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिल पाने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा और अक्तूबर-नवंबर 2005 में फिर से चुनाव हुए। इस दौरान एलजेपी सिर्फ 10 सीटों पर सिमटकर रह गई।फिर साल 2010 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी सिर्फ 3 सीटों पर कब्जा जमा पाई और 2011 में एलजेपी को एक झटका फिर लगा, जब पार्टी के 3 में से 2 विधायक दूसरी पार्टी के साथ चले गए। यह वो दौर था, जब एलजेपी सत्ता से बाहर थी, लेकिन समीकरण कुछ इस तरह से बदले कि एलजेपी को फिर से सहारा मिल गया। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एलजेपी ने बिहार में 7 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत हासिल की।इस दौरान राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने भी पहली बार बिहार की जमुई सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। साल 2015 में पार्टी ने 42 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन सिर्फ 2 सीटें जीत सकी। वहीं साल 2019 में काफी गहमागहमी और लंबे मंथन के बाद एलजेपी ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा और पार्टी ने सभी 6 सीटों पर जीत हासिल की।पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्षबता दें कि 05 नवंबर 2019 को रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पार्टी अध्यक्ष बनते ही चिराग पासवान ने राज्य में 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के नाम से यात्रा निकाली। वहीं पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के चलते सभी 243 सीटों पर मजबूत तैयारी कर रही है।

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Nov 4, 2025 - 11:13
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Lok Janshakti Party: LJP ने बिहार से ज्यादा केंद्र की सत्ता में बनाई भागेदारी, ऐसे हुई थी पार्टी की स्थापना
लोक जनशक्ति पार्टी का गठन ऐसे नेता ने किया था, जिसको राजनीतिक मौसम का वैज्ञानिक माना जाता था। यह नेता और कोई नहीं बल्कि रामविलास पासवान थे। बिहार की सबसे छोटी पार्टी होने के बाद भी लोक जनशक्ति पार्टी की हमेशा सत्ता में भागेदारी रहती है। पार्टी की यह हिस्सेदारी सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि केंद्र की सत्ता में भी मिलती है। जब बिहार की राजनीति के हाल बदले तो रामविलास पासवान ने अपनी पार्टी बना ली।

लोक जनशक्ति पार्टी का गठन

साल 2000 में राम विलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी। इससे पहले रामविलास पासवान जनता पार्टी और फिर जनता दल और इसके बाद जनता दल यूनाइडेट का हिस्सा रहे। लेकिन बिहार की सियासत बदली तो रामविलास पासवान ने अपनी पार्टी बना ली। दलितों की राजनीति करने वाले रामविलास पासवान ने साल 1981 में दलिन सेना संगठन की स्थापना की।

इसे भी पढ़ें: Congress Party: बिहार की राजनीति पर था कांग्रेस का दबदबा, जानिए कैसे घटता गया पार्टी का जनाधार

पार्टी का उद्देश्य

एलजेपी का गठन सामाजिक न्याय और दलित पीड़ितों की आवाज को उठाने के मकसद से किया गया था। बता दें कि बिहार में दलित समुदाय की आबादी करीब 17 फीसदी है, लेकिन दुसाध जाति का वोट करीब 5 फीसदी है। यह लोक जनशक्ति पार्टी का कोर वोट बैंक माना जाता है।

राजनीतिक सफर

साल 2004 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी ने 4 सीटें जीती थीं और 4 सीटों के साथ यूपीए का हिस्सा बने। फिर साल 2005 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया और 29 सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिल पाने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा और अक्तूबर-नवंबर 2005 में फिर से चुनाव हुए। इस दौरान एलजेपी सिर्फ 10 सीटों पर सिमटकर रह गई।

फिर साल 2010 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी सिर्फ 3 सीटों पर कब्जा जमा पाई और 2011 में एलजेपी को एक झटका फिर लगा, जब पार्टी के 3 में से 2 विधायक दूसरी पार्टी के साथ चले गए। यह वो दौर था, जब एलजेपी सत्ता से बाहर थी, लेकिन समीकरण कुछ इस तरह से बदले कि एलजेपी को फिर से सहारा मिल गया। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एलजेपी ने बिहार में 7 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत हासिल की।

इस दौरान राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने भी पहली बार बिहार की जमुई सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। साल 2015 में पार्टी ने 42 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन सिर्फ 2 सीटें जीत सकी। वहीं साल 2019 में काफी गहमागहमी और लंबे मंथन के बाद एलजेपी ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा और पार्टी ने सभी 6 सीटों पर जीत हासिल की।

पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष

बता दें कि 05 नवंबर 2019 को रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पार्टी अध्यक्ष बनते ही चिराग पासवान ने राज्य में 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के नाम से यात्रा निकाली। वहीं पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के नेतृत्व में लोक जनशक्ति पार्टी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के चलते सभी 243 सीटों पर मजबूत तैयारी कर रही है।

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