Jayprakash Associates अधिग्रहण की जंग में Adani Group को बड़ी जीत, Anil Agarwal की Vedanta को NCLAT से झटका।

अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर गौतम अडानी समूह की बोली को चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया।मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा शामिल थे, ने साफ कहा कि वेदांता द्वारा उठाए गए मुद्दों में कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि लेनदारों की समिति ने अपने व्यावसायिक विवेक के तहत अडानी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को प्राथमिकता देना सही समझा है।गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने भी अडानी एंटरप्राइजेज की इस बोली को मंजूरी दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने अपील की थी। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है।यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था और जून 2024 में इसे दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस प्रक्रिया में कुल 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से छह अंतिम चरण तक पहुंचीं। अडानी समूह और वेदांता दोनों प्रमुख दावेदार बनकर उभरे थे।बताया जाता है कि नवंबर 2025 में लेनदारों की समिति ने करीब 93.81 प्रतिशत मतों के साथ अडानी समूह की योजना को मंजूरी दी थी। वहीं वेदांता ने बाद में 16,070 करोड़ रुपये की संशोधित पेशकश दी, जिसे नियमों के तहत स्वीकार नहीं किया गया। समिति का कहना था कि समय सीमा के बाद किसी भी प्रस्ताव में बदलाव की अनुमति नहीं है।वेदांता ने दलील दी थी कि उसकी बोली मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक राशि होना ही चयन का आधार नहीं हो सकता है। बता दें कि बोली का मूल्यांकन कई पहलुओं जैसे नकद भुगतान, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन क्षमता के आधार पर किया जाता है।इस पूरे मामले में उच्चतम न्यायालय भी पहले हस्तक्षेप कर चुका है और उसने भी अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था। हालांकि उसने यह निर्देश दिया था कि कोई भी बड़ा फैसला न्यायाधिकरण की अनुमति से ही लिया जाए।अब इस फैसले के बाद जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता अडानी समूह के लिए लगभग साफ हो गया है, हालांकि वेदांता चाहे तो आगे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा और आतिथ्य जैसे कई बड़े क्षेत्र में संपत्तियां हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

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May 4, 2026 - 19:52
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Jayprakash Associates अधिग्रहण की जंग में Adani Group को बड़ी जीत, Anil Agarwal की Vedanta को NCLAT से झटका।
अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर गौतम अडानी समूह की बोली को चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया।

मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा शामिल थे, ने साफ कहा कि वेदांता द्वारा उठाए गए मुद्दों में कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि लेनदारों की समिति ने अपने व्यावसायिक विवेक के तहत अडानी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को प्राथमिकता देना सही समझा है।

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने भी अडानी एंटरप्राइजेज की इस बोली को मंजूरी दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने अपील की थी। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है।

यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था और जून 2024 में इसे दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस प्रक्रिया में कुल 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से छह अंतिम चरण तक पहुंचीं। अडानी समूह और वेदांता दोनों प्रमुख दावेदार बनकर उभरे थे।

बताया जाता है कि नवंबर 2025 में लेनदारों की समिति ने करीब 93.81 प्रतिशत मतों के साथ अडानी समूह की योजना को मंजूरी दी थी। वहीं वेदांता ने बाद में 16,070 करोड़ रुपये की संशोधित पेशकश दी, जिसे नियमों के तहत स्वीकार नहीं किया गया। समिति का कहना था कि समय सीमा के बाद किसी भी प्रस्ताव में बदलाव की अनुमति नहीं है।

वेदांता ने दलील दी थी कि उसकी बोली मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक राशि होना ही चयन का आधार नहीं हो सकता है। बता दें कि बोली का मूल्यांकन कई पहलुओं जैसे नकद भुगतान, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन क्षमता के आधार पर किया जाता है।

इस पूरे मामले में उच्चतम न्यायालय भी पहले हस्तक्षेप कर चुका है और उसने भी अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था। हालांकि उसने यह निर्देश दिया था कि कोई भी बड़ा फैसला न्यायाधिकरण की अनुमति से ही लिया जाए।

अब इस फैसले के बाद जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता अडानी समूह के लिए लगभग साफ हो गया है, हालांकि वेदांता चाहे तो आगे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा और आतिथ्य जैसे कई बड़े क्षेत्र में संपत्तियां हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

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