Jaisalmer में मिला 18 करोड़ साल पुराना जीवाश्म, Dinosaur के होने की आशंका

जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ उप-मंडल के मेघा गांव में एक बड़ी और चौंकाने वाली खोज हुई है। यहां जुरासिक युग से संबंधित एक अनोखा कशेरुकी जीवाश्म (Vertebrate Fossil) मिला है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।वरिष्ठ जल-भूविज्ञानी डॉ. नारायण दास इनाखिया ने बताया कि यह जीवाश्म बेहद खास है क्योंकि इसमें रीढ़ (spine) का पूरा हिस्सा देखा जा सकता है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि यह लगभग 18 करोड़ साल पुराना हो सकता है। इसे भी पढ़ें: सतीश गोलचा होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, एसबीके सिंह का लेंगे स्थान, संभाल रहे थे तिहाड़ जेल की कमानक्यों खास है ये खोज?डॉ. इनाखिया के अनुसार, यह जीवाश्म जैसलमेर के समृद्ध भूवैज्ञानिक इतिहास का एक ठोस प्रमाण है। इस खोज से कई नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है, क्योंकि जैसलमेर में पहले भी डायनासोर के पैरों के निशान और हड्डियां मिली हैं। यह नया जीवाश्म भी संभवतः किसी डायनासोर या जुरासिक काल के किसी अन्य विशालकाय जीव का हिस्सा हो सकता है। जीवाश्म में पंखों के निशान भी पाए गए हैं, जो इसे और भी दुर्लभ बनाते हैं।इस खोज के बाद, जैसलमेर का यह इलाका दुनिया भर के जीवाश्म वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक नया और महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यह उपलब्धि न केवल विज्ञान के लिए एक बड़ी जीत है, बल्कि यह जैसलमेर को एक नया पर्यटन स्थल भी बना सकती है, जहां लोग लाखों साल पुराने इतिहास को करीब से देख सकेंगे। #WATCH | Jaisalmer, Rajasthan: On vertebrate fossils potentially related to the Jurassic Era being found in Megha village, Senior Hydro-Geologist Dr. Narayan Das Inakhiya says, "...This is Megha Village..This is a vertebrate fossil...Most importantly, whole parts of the spine can… https://t.co/tKPxMW6jqU pic.twitter.com/EnXE6vezEQ— ANI (@ANI) August 21, 2025

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Aug 22, 2025 - 04:30
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Jaisalmer में मिला 18 करोड़ साल पुराना जीवाश्म, Dinosaur के होने की आशंका
जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ उप-मंडल के मेघा गांव में एक बड़ी और चौंकाने वाली खोज हुई है। यहां जुरासिक युग से संबंधित एक अनोखा कशेरुकी जीवाश्म (Vertebrate Fossil) मिला है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

वरिष्ठ जल-भूविज्ञानी डॉ. नारायण दास इनाखिया ने बताया कि यह जीवाश्म बेहद खास है क्योंकि इसमें रीढ़ (spine) का पूरा हिस्सा देखा जा सकता है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि यह लगभग 18 करोड़ साल पुराना हो सकता है।
 

इसे भी पढ़ें: सतीश गोलचा होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर, एसबीके सिंह का लेंगे स्थान, संभाल रहे थे तिहाड़ जेल की कमान


क्यों खास है ये खोज?
डॉ. इनाखिया के अनुसार, यह जीवाश्म जैसलमेर के समृद्ध भूवैज्ञानिक इतिहास का एक ठोस प्रमाण है। इस खोज से कई नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है, क्योंकि जैसलमेर में पहले भी डायनासोर के पैरों के निशान और हड्डियां मिली हैं। यह नया जीवाश्म भी संभवतः किसी डायनासोर या जुरासिक काल के किसी अन्य विशालकाय जीव का हिस्सा हो सकता है। जीवाश्म में पंखों के निशान भी पाए गए हैं, जो इसे और भी दुर्लभ बनाते हैं।

इस खोज के बाद, जैसलमेर का यह इलाका दुनिया भर के जीवाश्म वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक नया और महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यह उपलब्धि न केवल विज्ञान के लिए एक बड़ी जीत है, बल्कि यह जैसलमेर को एक नया पर्यटन स्थल भी बना सकती है, जहां लोग लाखों साल पुराने इतिहास को करीब से देख सकेंगे।

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