मंगलवार देर शाम प्रधानमंत्री कार्यालय में डीजीसीए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक हुई, जिसमें उड़ानों में लगातार हो रही देरी, रद्दीकरण, रिफंड शिकायतों, खोए सामान और एयरपोर्ट भीड़ प्रबंधन पर गहन समीक्षा की गई।
बता दें कि इसके पहले नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को तलब किया था, जिसके बाद 10% उड़ानों को तुरंत रद्द करने का आदेश दिया गया था। हालांकि मौजूद जानकारी के अनुसार एयरलाइन ने अपनी संचालन व्यवस्था सामान्य करने के लिए 400 से 500 उड़ानें अपने शेड्यूल से हटाने का फैसला किया है, जो सरकारी निर्देश से लगभग दोगुना है।
गौरतलब है कि नवंबर से अब तक 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द होने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है। एयरलाइन अधिकारियों का कहना है कि अब उड़ान रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को कम से कम 72 घंटे पहले सूचना दी जाएगी। यह व्यवस्था पिछले हफ्ते सिस्टम फेल होने की वजह से पूरी तरह चरमरा गई थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्ट पहुंचे, घंटों इंतज़ार किया और अंत में उड़ान रद्द होने से नाराजगी और हंगामे की स्थिति बनी रही।
मौजूदा स्थिति में इंडिगो रोजाना 1,800 उड़ानें ही संचालित कर रही है, जबकि सामान्य समय में यह संख्या 2,200 से 2,300 के बीच रहती है। बता दें कि एयरलाइन ने अब तक ₹829 करोड़ की राशि यात्रियों को रिफंड के रूप में वापस कर दी है और 9,000 में से 4,500 खोया सामान यात्रियों तक पहुंचाया जा चुका है।
इस बीच उड़ान संचालन में सुधार और यात्रियों की शिकायतों के निराकरण की निगरानी सीधे केंद्र स्तर पर की जा रही है। यही कारण है कि सरकार ने एयरलाइन से यात्रियों के अधिकारों और सेवा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है ताकि स्थिति सामान्य गति से वापस लौट सके।