Gulf Nations में फंसे Indians को बचाने के लिए सामने आया PM Modi का Action Plan, Control Room बना कर हालात पर रखी जा रही है नजर

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस टकराव का सबसे ज्यादा असर खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि खाड़ी के अलग अलग देशों में करीब 88 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए वहां की अस्थिर स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि खाड़ी में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वहां की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी के तहत भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सहायता देने के लिए चौबीसों घंटे काम करने वाला कंट्रोल कक्ष भी स्थापित किया है, ताकि संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की तुरंत मदद की जा सके।देखा जाए तो खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है। 2000 के दशक की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात में भारतीयों की संख्या करीब दस लाख के आसपास थी, जो अब बढ़कर 35 लाख से अधिक हो चुकी है। आज वहां रहने वाले प्रवासी समुदायों में भारतीय सबसे बड़ा समूह बन चुके हैं और कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं। उनके बाद पाकिस्तानी, फिलिपीनी और मिस्री समुदाय आते हैं।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel तनाव पर विपक्ष के दावे हवा-हवाई? Amit Malviya ने Congress को जमकर लताड़ासंयुक्त अरब अमीरात के अलावा सऊदी अरब में भी लगभग 24 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, जो वहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। कुवैत में भी करीब दस लाख भारतीय काम करते हैं और वहां के सबसे बड़े प्रवासी समूह का हिस्सा हैं। इसके अलावा कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में भी भारतीयों की बड़ी संख्या मौजूद है। कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की आबादी 88 लाख से अधिक बताई जाती है।हालिया संकट के कारण वहां रहने वाले लोगों में चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन व्यापक घबराहट की स्थिति नहीं है। दुबई में लंबे समय से रहने वाले कई भारतीयों का कहना है कि वहां सामान्य जीवन काफी हद तक जारी है। बाजार खुले हैं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी हुई है और सड़कों पर यातायात भी चल रहा है, हालांकि पहले की तुलना में कुछ कम दिखाई देता है। स्थानीय प्रशासन और सरकार पर लोगों का भरोसा भी बना हुआ है।दुबई में दशकों से रहने वाले लोगों का कहना है कि इस समय सबसे अधिक परेशान वे भारतीय हैं जो अल्पकालिक यात्रा पर वहां पहुंचे थे। अचानक पैदा हुए संकट के कारण वे जल्दी घर लौटना चाहते हैं और ट्रैवल एजेंसियों को लगातार फोन कर रहे हैं। दूसरी ओर लंबे समय से वहां बसे भारतीयों का कहना है कि यह शहर अब उनका घर बन चुका है, इसलिए वे जल्दबाजी में वहां से जाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।साथ ही भारत और खाड़ी देशों के बीच संबंध केवल प्रवासी आबादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक स्तर पर भी बेहद मजबूत हैं। सत्तर के दशक में जहां संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत का व्यापार करीब 18 करोड़ डालर के आसपास था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर लगभग 100 अरब डालर के करीब पहुंच गया। आज यह देश भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुका है।इसके अलावा, खाड़ी देशों से भारत को बड़ी मात्रा में धन भी प्राप्त होता है। वर्ष 2012 में अकेले संयुक्त अरब अमीरात से भारत को लगभग 14 अरब डालर की रकम भेजी गई थी, जो उस समय अमेरिका से आने वाले धन से भी अधिक थी। सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन से भी बड़ी मात्रा में धन भारत आता है। उस समय खाड़ी क्षेत्र से आने वाला धन भारत के कुल धन प्रेषण का लगभग 43 प्रतिशत था।हम आपको यह भी बता दें कि खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासन का स्वरूप भी समय के साथ बदलता गया है। पहले यहां मुख्य रूप से निर्माण कार्य और अन्य शारीरिक श्रम से जुड़ी नौकरियों के लिए लोग जाते थे। इनमें केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कामगार अधिक होते थे। अब सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं या अपने कारोबार चला रहे हैं।इसके बावजूद हर वर्ष भारत से लगभग छह से सात लाख लोग काम की तलाश में खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। इन देशों में मजदूरी की दर भारत की तुलना में अधिक होने के कारण लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद वहां जाना पसंद करते हैं। हालांकि प्रवासी कामगारों के शोषण और कठिन जीवन स्थितियों से जुड़ी शिकायतें भी समय समय पर सामने आती रही हैं।इस पृष्ठभूमि में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीयों के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। फिलहाल वहां सामान्य जीवन काफी हद तक जारी है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहते हैं तो इसका प्रभाव भारत और खाड़ी दोनों क्षेत्रों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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Mar 5, 2026 - 09:08
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Gulf Nations में फंसे Indians को बचाने के लिए सामने आया PM Modi का Action Plan, Control Room बना कर हालात पर रखी जा रही है नजर
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस टकराव का सबसे ज्यादा असर खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि खाड़ी के अलग अलग देशों में करीब 88 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए वहां की अस्थिर स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि खाड़ी में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वहां की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी के तहत भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सहायता देने के लिए चौबीसों घंटे काम करने वाला कंट्रोल कक्ष भी स्थापित किया है, ताकि संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की तुरंत मदद की जा सके।

देखा जाए तो खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है। 2000 के दशक की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात में भारतीयों की संख्या करीब दस लाख के आसपास थी, जो अब बढ़कर 35 लाख से अधिक हो चुकी है। आज वहां रहने वाले प्रवासी समुदायों में भारतीय सबसे बड़ा समूह बन चुके हैं और कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं। उनके बाद पाकिस्तानी, फिलिपीनी और मिस्री समुदाय आते हैं।

इसे भी पढ़ें: Iran-Israel तनाव पर विपक्ष के दावे हवा-हवाई? Amit Malviya ने Congress को जमकर लताड़ा

संयुक्त अरब अमीरात के अलावा सऊदी अरब में भी लगभग 24 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, जो वहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। कुवैत में भी करीब दस लाख भारतीय काम करते हैं और वहां के सबसे बड़े प्रवासी समूह का हिस्सा हैं। इसके अलावा कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में भी भारतीयों की बड़ी संख्या मौजूद है। कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की आबादी 88 लाख से अधिक बताई जाती है।

हालिया संकट के कारण वहां रहने वाले लोगों में चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन व्यापक घबराहट की स्थिति नहीं है। दुबई में लंबे समय से रहने वाले कई भारतीयों का कहना है कि वहां सामान्य जीवन काफी हद तक जारी है। बाजार खुले हैं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी हुई है और सड़कों पर यातायात भी चल रहा है, हालांकि पहले की तुलना में कुछ कम दिखाई देता है। स्थानीय प्रशासन और सरकार पर लोगों का भरोसा भी बना हुआ है।

दुबई में दशकों से रहने वाले लोगों का कहना है कि इस समय सबसे अधिक परेशान वे भारतीय हैं जो अल्पकालिक यात्रा पर वहां पहुंचे थे। अचानक पैदा हुए संकट के कारण वे जल्दी घर लौटना चाहते हैं और ट्रैवल एजेंसियों को लगातार फोन कर रहे हैं। दूसरी ओर लंबे समय से वहां बसे भारतीयों का कहना है कि यह शहर अब उनका घर बन चुका है, इसलिए वे जल्दबाजी में वहां से जाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

साथ ही भारत और खाड़ी देशों के बीच संबंध केवल प्रवासी आबादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक स्तर पर भी बेहद मजबूत हैं। सत्तर के दशक में जहां संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत का व्यापार करीब 18 करोड़ डालर के आसपास था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर लगभग 100 अरब डालर के करीब पहुंच गया। आज यह देश भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुका है।

इसके अलावा, खाड़ी देशों से भारत को बड़ी मात्रा में धन भी प्राप्त होता है। वर्ष 2012 में अकेले संयुक्त अरब अमीरात से भारत को लगभग 14 अरब डालर की रकम भेजी गई थी, जो उस समय अमेरिका से आने वाले धन से भी अधिक थी। सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन से भी बड़ी मात्रा में धन भारत आता है। उस समय खाड़ी क्षेत्र से आने वाला धन भारत के कुल धन प्रेषण का लगभग 43 प्रतिशत था।

हम आपको यह भी बता दें कि खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासन का स्वरूप भी समय के साथ बदलता गया है। पहले यहां मुख्य रूप से निर्माण कार्य और अन्य शारीरिक श्रम से जुड़ी नौकरियों के लिए लोग जाते थे। इनमें केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कामगार अधिक होते थे। अब सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं या अपने कारोबार चला रहे हैं।

इसके बावजूद हर वर्ष भारत से लगभग छह से सात लाख लोग काम की तलाश में खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। इन देशों में मजदूरी की दर भारत की तुलना में अधिक होने के कारण लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद वहां जाना पसंद करते हैं। हालांकि प्रवासी कामगारों के शोषण और कठिन जीवन स्थितियों से जुड़ी शिकायतें भी समय समय पर सामने आती रही हैं।

इस पृष्ठभूमि में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीयों के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। फिलहाल वहां सामान्य जीवन काफी हद तक जारी है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहते हैं तो इसका प्रभाव भारत और खाड़ी दोनों क्षेत्रों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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