G-7 की मीटिंग से पहले Geneva में हिंसा, PM Modi भी लेने वाले हैं बैठक में हिस्सा

फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में हजारों लोगों के विरोध प्रदर्शन ने पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया। तकरीबन 20,000 से अधिक लोग इस मार्च में शामिल हुए और शुरुआत ही कुछ ऐसी हुई जिससे पूरा सिस्टम हिल गया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गई और फिर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र भवन और दूसरे संस्थानों के बाहर अपना आक्रोश व्यक्त किया। कई लोगों ने उन संस्थाओं को वैश्विक पूंजीवाद और बहुपक्षीय सत्ता संरचनाओं के प्रतीक के रूप में चरित्रित करते हुए उन पर हमला शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क से ईंटें उखाड़कर पुलिस की ओर फेंकनी शुरू कर दी। जवाब में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ताकत का इस्तेमाल किया गया और देखते ही देखते शहर की सड़कों पर फैली आंसू गैस के कारण अफरातफरी का माहौल बन गया।इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति समझौते पर PM Modi का बयान, बोले- West Asia में स्थिरता के लिए भारत प्रतिबद्धइसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि जब यह प्रदर्शन हो रहा था, कई परिवार आसपास के इलाके में मौजूद थे जिन्हें इस गहमागहमी का भी सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था वह G7 को दुनिया की राजनीति और आर्थिक शक्ति के अत्याधिक केंद्रीकरण का प्रतीक मानते हैं। उनके मुताबिक कुछ विकसित देशों द्वारा वैश्विक नीतियों पर प्रभाव स्थापित करना लोकतांत्रिक मूल्य और सामाजिक न्याय के खिलाफ चुनौती है और इसी कारण वह जी7 शिखर सम्मेलन के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। G7 शिखर सम्मेलन में ही हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी भी पहुंचे हैं। ऐसे में उनकी कई मुलाकातें तय हैं। 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन ले बेंस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका के नेता हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस, यूक्रेन युद्ध, ईरान, अमेरिका, इजराइल युद्ध की भी चर्चा हो सकती है।इसे भी पढ़ें: UN ने किया US-Iran Peace Deal का स्वागत, Europe बोला- यह शांति का बड़ा मौकाजिनेवा की घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किस तरह से लगातार वहां G7 जैसे सम्मेलनों का विरोध होता रहा है क्योंकि वहां मौजूद लोगों को लगता है कि यह लोग दुनिया भर में असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर थे। लेकिन देखते ही देखते कुछ समूहों की हिंसक गतिविधियों ने आंदोलन को लगातार विवादित बना दिया और फिर जबरदस्त हिंसा देखने को मिली। जिसके कारण इस प्रदर्शन पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए और आने वाले दिनों में माना जा रहा है कि G7 सम्मेलन के दौरान भी कई और विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेंगे।

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Jun 17, 2026 - 09:09
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G-7 की मीटिंग से पहले Geneva में हिंसा, PM Modi भी लेने वाले हैं बैठक में हिस्सा
फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में हजारों लोगों के विरोध प्रदर्शन ने पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया। तकरीबन 20,000 से अधिक लोग इस मार्च में शामिल हुए और शुरुआत ही कुछ ऐसी हुई जिससे पूरा सिस्टम हिल गया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गई और फिर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र भवन और दूसरे संस्थानों के बाहर अपना आक्रोश व्यक्त किया। कई लोगों ने उन संस्थाओं को वैश्विक पूंजीवाद और बहुपक्षीय सत्ता संरचनाओं के प्रतीक के रूप में चरित्रित करते हुए उन पर हमला शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क से ईंटें उखाड़कर पुलिस की ओर फेंकनी शुरू कर दी। जवाब में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ताकत का इस्तेमाल किया गया और देखते ही देखते शहर की सड़कों पर फैली आंसू गैस के कारण अफरातफरी का माहौल बन गया।

इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति समझौते पर PM Modi का बयान, बोले- West Asia में स्थिरता के लिए भारत प्रतिबद्ध

इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि जब यह प्रदर्शन हो रहा था, कई परिवार आसपास के इलाके में मौजूद थे जिन्हें इस गहमागहमी का भी सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था वह G7 को दुनिया की राजनीति और आर्थिक शक्ति के अत्याधिक केंद्रीकरण का प्रतीक मानते हैं। उनके मुताबिक कुछ विकसित देशों द्वारा वैश्विक नीतियों पर प्रभाव स्थापित करना लोकतांत्रिक मूल्य और सामाजिक न्याय के खिलाफ चुनौती है और इसी कारण वह जी7 शिखर सम्मेलन के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। G7 शिखर सम्मेलन में ही हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी भी पहुंचे हैं। ऐसे में उनकी कई मुलाकातें तय हैं। 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन ले बेंस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका के नेता हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस, यूक्रेन युद्ध, ईरान, अमेरिका, इजराइल युद्ध की भी चर्चा हो सकती है।

इसे भी पढ़ें: UN ने किया US-Iran Peace Deal का स्वागत, Europe बोला- यह शांति का बड़ा मौका

जिनेवा की घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किस तरह से लगातार वहां G7 जैसे सम्मेलनों का विरोध होता रहा है क्योंकि वहां मौजूद लोगों को लगता है कि यह लोग दुनिया भर में असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर थे। लेकिन देखते ही देखते कुछ समूहों की हिंसक गतिविधियों ने आंदोलन को लगातार विवादित बना दिया और फिर जबरदस्त हिंसा देखने को मिली। जिसके कारण इस प्रदर्शन पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए और आने वाले दिनों में माना जा रहा है कि G7 सम्मेलन के दौरान भी कई और विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेंगे।

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