Famous Temple: गुजरात का वो 'City of Temples' जहां रात में रुकना है मना, जानें इसके Spiritual और दिव्य रहस्य

भारत का गुजरात राज्य अपने आप में ही अनोखा और समृद्ध माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरात के भावनगर जिले में शत्रुंजय पहाड़ियों की गोद में बसा पालिताणा एक ऐसी अनोखी जगह है। जिसको मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। पूर्व में यह स्थान पादलिप्तपुर नाम से फेमस था। यह शहर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अटूट आस्था का केंद्र माना जाता है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर 800 से ज्यादा संगमरमर के मंदिर मौजूद हैं। इसी वजह से इसको मंदिरों का शहर कहा जाता है। तो आइए जानते हैं गुजरात के पालीताणा मंदिर की खासियत के बारे में...यहां हैं 800 से ज्यादा भव्य मंदिरमाना जाता है कि जैन धर्म के लोगों में अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इन मंदिरों के दर्शन करना निर्वाण या फिर मोक्ष के लिए जरूरी है। शत्रुंजय पहाड़ी पर स्थित यह स्थल इतना अधिक विशाल और भव्य है कि यहां पर करीब 836 संगमरमर से तराशे मंदिर हैं।इसे भी पढ़ें: Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का 'सास-बहू' नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सचइन मंदिरों तक पहुंचने का सफर भी किसी तपस्या से कम नहीं माना जाता है। क्योंकि मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह जगह इसलिए भी खास है, क्योंकि मान्यता के हिसाब से 24 में से 23 तीर्थकरों ने यहां आकर इस अपनी उपस्थिति से इस पहाड़ी को पावन किया था।रात को रुकना है मनापालिताणा की सबसे अनोखी बात को जानकर आपको हैरानी होगी। दरअसल, यह स्थान पूरी तरह से देवताओं का निवास स्थान माना गया है। यही वजह है कि यहां पर सूर्यास्त के बाद किसी भी इंसान को रात गुजारने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि मंदिर की सेवा करने वाले पुजारियों को भी यहां पर रात में रुकने की मनाही है। सदियों से यह परंपरा इस स्थान की दिव्यता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए चली आ रही है।जानें धार्मिक महत्वबता दें कि पहाड़ी पर बना मुख्य मंदिर प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव जी को समर्पित है। यह श्वेतांबर मूर्तिपूजक संप्रदाय के लिए सबसे अधिक पवित्र स्थान माना जाता है। हालांकि यहां पर दिगंबर जैन समुदाय का भी एक मंदिर है। यह पूरा क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अपनी अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है।ऐसे पहुंचें पालिताणाअगर आप भी इस पावन नगरी की यात्रा करना चाहते हैं, तो बता दें कि यहां तक पहुंचना बेहद आसान है।यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भावनगर एयरपोर्ट है। जोकि पालिताणा से सिर्फ 55 किमी दूर पर स्थित है।वहीं अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं, तो ये शहर भावनगर और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों से रेल से अच्छे से जुड़ा है।वहीं गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से पालिताणा के लिए बेहतरीन सड़क कनेक्टिविटी भी मौजूद है।

PNSPNS
Aug 22, 2026 - 16:52
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Famous Temple: गुजरात का वो 'City of Temples' जहां रात में रुकना है मना, जानें इसके Spiritual और दिव्य रहस्य
भारत का गुजरात राज्य अपने आप में ही अनोखा और समृद्ध माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरात के भावनगर जिले में शत्रुंजय पहाड़ियों की गोद में बसा पालिताणा एक ऐसी अनोखी जगह है। जिसको मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। पूर्व में यह स्थान पादलिप्तपुर नाम से फेमस था। यह शहर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अटूट आस्था का केंद्र माना जाता है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर 800 से ज्यादा संगमरमर के मंदिर मौजूद हैं। इसी वजह से इसको मंदिरों का शहर कहा जाता है। तो आइए जानते हैं गुजरात के पालीताणा मंदिर की खासियत के बारे में...

यहां हैं 800 से ज्यादा भव्य मंदिर

माना जाता है कि जैन धर्म के लोगों में अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इन मंदिरों के दर्शन करना निर्वाण या फिर मोक्ष के लिए जरूरी है। शत्रुंजय पहाड़ी पर स्थित यह स्थल इतना अधिक विशाल और भव्य है कि यहां पर करीब 836 संगमरमर से तराशे मंदिर हैं।

इसे भी पढ़ें: Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का 'सास-बहू' नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सच


इन मंदिरों तक पहुंचने का सफर भी किसी तपस्या से कम नहीं माना जाता है। क्योंकि मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह जगह इसलिए भी खास है, क्योंकि मान्यता के हिसाब से 24 में से 23 तीर्थकरों ने यहां आकर इस अपनी उपस्थिति से इस पहाड़ी को पावन किया था।

रात को रुकना है मना

पालिताणा की सबसे अनोखी बात को जानकर आपको हैरानी होगी। दरअसल, यह स्थान पूरी तरह से देवताओं का निवास स्थान माना गया है। यही वजह है कि यहां पर सूर्यास्त के बाद किसी भी इंसान को रात गुजारने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि मंदिर की सेवा करने वाले पुजारियों को भी यहां पर रात में रुकने की मनाही है। सदियों से यह परंपरा इस स्थान की दिव्यता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए चली आ रही है।

जानें धार्मिक महत्व

बता दें कि पहाड़ी पर बना मुख्य मंदिर प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव जी को समर्पित है। यह श्वेतांबर मूर्तिपूजक संप्रदाय के लिए सबसे अधिक पवित्र स्थान माना जाता है। हालांकि यहां पर दिगंबर जैन समुदाय का भी एक मंदिर है। यह पूरा क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अपनी अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है।

ऐसे पहुंचें पालिताणा

अगर आप भी इस पावन नगरी की यात्रा करना चाहते हैं, तो बता दें कि यहां तक पहुंचना बेहद आसान है।

यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भावनगर एयरपोर्ट है। जोकि पालिताणा से सिर्फ 55 किमी दूर पर स्थित है।

वहीं अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं, तो ये शहर भावनगर और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों से रेल से अच्छे से जुड़ा है।

वहीं गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से पालिताणा के लिए बेहतरीन सड़क कनेक्टिविटी भी मौजूद है।

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