दिल्ली पुलिस ने 'ऑपरेशन साइहॉक 5.0' (Operation CyHawk 5.0) के तहत साइबर अपराध के खिलाफ़ अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक चलाया, जिसमें अलग-अलग तरह के ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों में शामिल 916 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह ऑपरेशन 16 और 17 जून को चलाया गया, जिसके लिए 31 मई तक के साइबर अपराध से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया गया था। मीडिया से बात करते हुए, जॉइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस रजनीश गुप्ता ने बताया कि बड़े पैमाने पर चलाए गए इस ऑपरेशन में 715 से ज़्यादा पुलिस टीमें और 2,500 से ज़्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे। उन्होंने कहा, "इस समन्वित कार्रवाई में सभी ज़िला पुलिस यूनिट्स और 15 साइबर पुलिस स्टेशनों की टीमों ने हिस्सा लिया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 2,500 से ज़्यादा शिकायतों को इस ऑपरेशन के दायरे में लाया गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि इन शिकायतों से जुड़ी धोखाधड़ी की कुल रकम लगभग 700 करोड़ रुपये थी। इस ऑपरेशन का मकसद संगठित साइबर अपराधी नेटवर्क थे जो वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल स्कैम, फ़िशिंग हमलों और ऑनलाइन धोखेबाज़ी में शामिल थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों के तार झारखंड के जामताड़ा और हरियाणा के नूंह जैसे साइबर अपराध के हॉटस्पॉट से जुड़े हैं; ये दोनों ही जगहें ऑनलाइन धोखाधड़ी की गतिविधियों के कारण अक्सर जांच के दायरे में रही हैं।
छापेमारी में लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन ज़ब्त
इस ऑपरेशन के तहत, दिल्ली पुलिस ने कई ऐसे गैर-कानूनी कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़ किया जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। जांचकर्ताओं ने कई लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन और अन्य डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए, जिनके बारे में शक है कि इनका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया गया था। आरोपियों का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की टीमों ने 21 राज्यों का दौरा किया, जिससे साइबर अपराध सिंडिकेट की देशव्यापी पहुंच और जांच के बड़े दायरे का पता चलता है।
ऑपरेशन के दौरान 7,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान वेरिफिकेशन और पूछताछ के लिए लगभग 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, एहतियाती उपाय के तौर पर लगभग 600 लोगों से मुचलका भरवाया गया, जबकि चल रही जांच के तहत करीब 2,000 लोगों को नोटिस जारी किए गए। पुलिस ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद सिर्फ़ संदिग्धों को गिरफ़्तार करना ही नहीं, बल्कि उस बड़े इकोसिस्टम को खत्म करना भी था जो साइबर अपराध नेटवर्क को काम करने में मदद करता है।
नरेश गुजराल साइबर धोखाधड़ी मामला: हैकर्स ने कैसे 7.86 करोड़ रुपये उड़ाए
दिल्ली पुलिस ने पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़े हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी मामले की जांच की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों के मुताबिक, धोखाधड़ी तब शुरू हुई जब एक कंपनी के मालिक को एक ZIP फ़ाइल मिली और उन्होंने उसे फाइनेंस डिपार्टमेंट को भेज दिया। जैसे ही एक कर्मचारी ने फ़ाइल खोली, हैकर्स ने कथित तौर पर कंपनी के सिस्टम को हैक कर लिया।