6 जून को दिल्ली में आखिर क्या होने वाला है? एक तरफ लाखों समर्थकों का दावा करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन पर अड़ी हुई है। तो वहीं दूसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना पुलिस अनुमति के आंदोलन कैसे होगा? पार्टी कह रही है कि पहले दिल्ली पहुंचेंगे फिर परमिशन मांगेंगे। लेकिन अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा? 6 जून से पहले यही सवाल राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक गूंज रहा है। दरअसल 6 जून को दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रस्ताविक प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। पार्टी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग को लेकर आंदोलन का प्रचार कर रही है। लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि जिस प्रदर्शन का ऐलान कई दिनों पहले कर दिया गया था, उसके लिए अभी तक दिल्ली पुलिस से अनुमति क्यों नहीं ली गई है? क्रॉकर जनता पार्टी जो सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी हुई है।
नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 6 जून को राजधानी में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। पार्टी का दावा है कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहती है। लेकिन आमतौर पर दिल्ली में किसी बड़े धरना प्रदर्शन के लिए पहले से पुलिस की अनुमति लेना जरूरी माना जाता है। इसी मुद्दे पर जब पार्टी से सवाल पूछा गया तो नवनियुक्त प्रवक्ता विजेता दहिया ने इसे पार्टी की रणनीति का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन से लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और समर्थक सीधे संस्थापक अभिजीत दीपके से जुड़े हुए हैं। इसलिए फैसला लिया गया है कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए खुद अभिजीत दीपके ही 6 जून को दिल्ली पहुंचकर आवेदन करेंगे। पार्टी के अनुसार अभिजीत दीपके अमेरिका से शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि उनके समर्थक एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद समर्थकों के साथ वह संसद स्ट्रिक्ट पुलिस स्टेशन जाकर जंतरमंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। अनुमति मिलने के बाद प्रदर्शन शुरू करने की योजना है।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक मुहिम ने बेहद कम समय में बड़ी लोकप्रियता हासिल की है। पार्टी का दावा है कि उसके करोड़ों फॉलोअर्स हैं और बड़ी संख्या में छात्र तथा युवा उसके अभियान का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक वर्ग का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति के प्रदर्शन की घोषणा करना विवाद को जन्म दे सकता है। तो वहीं उनका तर्क है कि यदि पुलिस कारवाई करती है तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है और बाद में इसे लोकतांत्रिक [संगीत] अधिकारों के मुद्दों के रूप में पेश किया जा सकता है। वहीं पार्टी समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। उनका सवाल है कि जब प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना है तो फिर अनुमति की प्रक्रिया को लेकर इतना विवाद क्यों होना चाहिए? फिलहाल 6 जून के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर चल रही यह बहस लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।