अक्षय तृतीया के पर्व से चारधाम यात्रा 2026 की शुरूआत हो चुकी है। इस यात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इन दिनों उत्तराखंड की पवित्र धरती पर भक्तों का सैलाब उमड़ चुका है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खलते ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर आप भी इस बार चारधाम यात्रा पर जाने का मन बना रही हैं, तो आपको गंगोत्री धाम से जुड़ी यह जानकारी जरूर होनी चाहिए।
बता दें कि इस बार नियम में कुछ बदलाव हुए हैं। खासतौर पर पंचगव्य से जुड़ा नियम इस बार काफी चर्चा में है। ऐसे में बिना पूरी जानकारी के इस यात्रा पर निकलना सही नहीं होगा। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस बार कौन से नए नियम लागू किए गए हैं।
पंचगव्य वाला नियम
बता दें कि गंगोत्री मंदिर की देखरेख करने वाली श्री पंच गंगोत्री मंदिर समिति द्वारा यह फैसला लिया गया है। जिसमें बताया गया है कि मंदिर में प्रवेश करने वाले भक्तों को पंचगव्य लेना होगा। तो आइए जानते हैं कि इसको कैसे लेना है।
जानिए क्या होता है पंचगव्य
पंचगव्य पांच चीजों से मिलकर बनता है
गाय का दूध
घी
दही
गोमूत्र
गोबर
वहीं इसके साथ गंगाजल को भी शामिल किया जाता है। इसको हिंदू परंपरा में शुद्धि यानी की पवित्रता का एक तरीका माना जाता है।
किसे लेकर जाना होगा
जो लोग सनातन धर्म की परंपराओं को मानते हैं, उनके लिए पंचगव्य का नियम रखा जा रहा है। इसके अलावा सिख, बौद्ध और जैन धर्म को भी सनातन परंपरा से जुड़ा माना जाता है, इसलिए उनके लिए अलग से किसी रोक की बात नहीं कही गई है।
बाकी धर्मों के लिए नियम
चारधाम यात्रा में सिर्फ गंगोत्री ही नहीं बल्कि यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी शामिल हैं। लेकिन अभी पंचगव्य का नियम सिर्फ गंगोत्री धाम में प्रवेश के लिए लागू किया गया है। हालांकि इस तरह के नियमों पर यमुनोत्री धाम भी विचार कर रही है। वहीं केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम मंदिर समिति द्वारा पहले से ही गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त प्रस्ताव पास किया गया है।
इन बातों का रखें ध्यान
यात्रा करने से पहले नई गाइडलाइन जरूर चेक कर लें।
मंदिर समिति की ऑफिशियल जानकारी पर ही भरोसा करें।
यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन, नियमों से जुड़ी अन्य जानकारी पहले ले लें।