प्रभा साक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने उत्तर प्रदेश में राम मंदिर और भाजपा से जुड़े विवाद साथ ही साथ उपचुनाव को लेकर टिकट बंटवारे को लेकर बवाल और संसद सत्र पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे मौजूद रहे। राम मंदिर को लेकर नीरज कुमार ने कहा कि इससे आस्था कमजोर होती है। लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हां, आस्था के नाम पर जो खिलवाड़ हुआ है, उसकी वजह से राजनीतिक तौर पर भाजपा का नुकसान हो सकता है और यही कारण है कि हम देख रहे हैं कि फिलहाल योगी आदित्यनाथ एग्रेसिव तरीके से हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं।
नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के लिए संघर्ष किया, उन्हीं को ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंप गई थी। लेकिन व्यवस्थाओं को वह लोग संभालने में नाकाम रहे तभी इस तरह की चीज हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अब लोगों का ट्रस्ट जीतने के लिए फिर से कम कर रहा है। सरकार और प्रशासन में लगातार दोबारा इस तरह की चीज ना हो, उस दिशा में काम करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि विपक्ष की ओर से जिस तरीके से बयान आ रहा है यह सिर्फ और सिर्फ राजनीति है। क्योंकि हमने देखा है कि विपक्ष राम को काल्पनिक मानता था और वह अब राम मंदिर के लिए बोल रहा है। उन्होंने कहा कि जिसको राम में भरोसा नहीं, वह इस तरह की बातें करें तो यह शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि हां, राम मंदिर बना है और ऐसे में मंदिरों का प्रशासन जो है, वह सरकार के पास नहीं है लेकिन इस घटनाक्रम से सरकार सचेत हुई है।
बांकीपुर उपचुनाव के लिए उम्मीदवार के बदलाव और दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने पर भी हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि बांकीपुर से उम्मीदवार बनाए गए अभिषेक को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही है, जाहिर सी बात है कि इसमें पार्टी की चूक हुई है। अगर अभिषेक सिन्हा किसी विवाद से जुड़े थे, उनका परिवार किसी विवाद से जुड़ा था तो फिर टिकट देने से पहले पार्टी ने ऐसा जांच क्यों नहीं किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी समय रहते सचेत हो गई, उम्मीदवार को बदलकर बहुत बड़े नुकसान होने से बचा लिया गया। दूसरी ओर नरोत्तम मिश्रा को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि जिस तरीके की चीजें दतिया में हुई है, वह बीजेपी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। नरोत्तम मिश्रा बड़े नेता है लेकिन चुनाव हर कोई लड़ना चाहता है। किसी को टिकट न मिले इसकी वजह से उसको दर्द होता है। समर्थकों का उत्साह काम होता है। लेकिन समर्थक इस तरह की चीजें ना करें, इसको रोकना उस नेता के जिम्मेदारी है जिसके लिए समर्थक सड़क पर निकले हैं। नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और उम्मीद है कि वह पार्टी के लिए लगातार खड़े रहेंगे।
संसद सत्र को लेकर नीरज दुबे ने कहा की उम्मीद है कि यह हंगामेदार हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर सरकार की ओर से भी कई अहम बिल लाने की तैयारी है। देखना दिलचस्प होगा कि संसद का सत्र कैसा होता है। लेकिन हमारी नजर संसद का सत्र शुरू होने से एक-दो दिन पहले आने वाली खबरों पर भी होगी कि क्या कोई ऐसी खबर तो नहीं आ रही है जिसकी वजह से संसद में और ज्यादा बवाल बढ़ सकता है।