बुधवार को बिहार कैबिनेट ने 22 एजेंडा आइटम को मंज़ूरी दी। इनमें शिक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने, मछली पालन के विकास को मज़बूत करने और रीजनल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (RRTS) की योजनाओं को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव शामिल थे। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिवालय के कैबिनेट हॉल में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। इन फैसलों में नए केंद्रीय विद्यालयों के लिए ज़मीन देना, मछली पालन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक खास कॉर्पोरेशन बनाना और पटना को अहम ज़िलों से जोड़ने वाले रीजनल रैपिड ट्रांज़िट नेटवर्क के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना शामिल है।
कैबिनेट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) को मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में पांच-पांच एकड़ ज़मीन देने को मंज़ूरी दी है। यह ज़मीन 30 साल के लिए लीज़ पर दी जाएगी, जिसे आगे बढ़ाया जा सकेगा, और इसके लिए सिर्फ़ 1 रुपये की टोकन लीज़ राशि तय की गई है। इस कदम का मकसद नए केंद्रीय विद्यालय खोलना और अच्छी शिक्षा व आधुनिक सीखने की सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाना है।
मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर सेक्टर को मज़बूत करने के लिए, कैबिनेट ने कंपनीज़ एक्ट, 2013 के तहत 'बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड' के गठन को मंज़ूरी दी। इस फ़ैसले के अनुसार, यह कॉरपोरेशन पूरे राज्य में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के सुनियोजित विकास, संचालन और प्रबंधन की देखरेख करेगा। कैबिनेट ने प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (AAR) और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने को भी मंज़ूरी दी।
ये रिपोर्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) को सौंपी गई है। प्रस्तावित नेटवर्क पटना को मुज़फ़्फ़रपुर, बेगूसराय, आरा और गया से जोड़ेगा, जिसका मकसद तेज़ और आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के ज़रिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। सरकार ने पिछली कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों का भी ज़िक्र किया। इनमें राज्य के हाईवे और बड़े पुलों पर टोल पॉलिसी लागू करना शामिल था, जिसके लिए कैबिनेट ने टोल रेट्स को मंज़ूरी दी थी।
अन्य मंज़ूरियों में राजगीर, पूर्णिया, शेखपुरा, मधेपुरा और मधुबनी में केंद्रीय विद्यालय खोलना, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 31 बस स्टैंड का आधुनिकीकरण, पटना नगर निगम को 200 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करने की मंज़ूरी, और विश्वविद्यालयों व उनसे जुड़े कॉलेजों में खाली टीचिंग पदों को भरने के उपाय शामिल थे।
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