Indian Football में बड़ा फेरबदल! अब Premier League मॉडल पर चलेगी ISL, AIFF का रहेगा कंट्रोल।

भारतीय फुटबॉल के लिए बुधवार का दिन अहम रहा। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और इंडियन सुपर लीग की प्रबंधन समिति ने लीग के भविष्य को लेकर कई बड़े फैसलों की घोषणा की। मौजूद जानकारी के अनुसार, अब इंडियन सुपर लीग के व्यावसायिक अधिकार क्लबों के पास होंगे, जबकि लीग के प्रशासनिक संचालन और महत्वपूर्ण नीतिगत जिम्मेदारियां एआईएफएफ के पास ही रहेंगी।इस पत्रकार वार्ता में एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण, प्रतियोगिता प्रमुख अक्षय रोहतगी, एफसी गोवा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि पुस्कुर, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड फुटबॉल क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार ताम्हाणे तथा स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव सूद मौजूद रहे।बता दें कि यह नई व्यवस्था दुनिया के कई प्रमुख फुटबॉल लीग मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां क्लब व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करते हैं और राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ प्रशासनिक निगरानी बनाए रखता है। इसका उद्देश्य लीग को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण ने कहा कि महासंघ का लक्ष्य इंडियन सुपर लीग को एशिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल लीगों में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश और नए राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून का भी ध्यान रखा गया है, ताकि भविष्य में लीग का संचालन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हो सके।वहीं स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव सूद ने कहा कि क्लब के पहले सत्र में खेल मंत्रालय ने मैदान उपलब्ध कराने सहित कई मामलों में सहयोग दिया। साथ ही एआईएफएफ ने भी लीग की लागत कम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए, जिससे क्लबों को राहत मिली है।नॉर्थईस्ट यूनाइटेड फुटबॉल क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार ताम्हाणे ने बताया कि अब लीग प्रसारण आधारित मॉडल पर आगे बढ़ेगी। उनका कहना था कि क्लब और एआईएफएफ दोनों का मानना है कि यही मॉडल भविष्य में लीग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। इसके तहत जल्द ही प्रसारण साझेदार और प्रायोजकों के चयन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे।गौरतलब है कि एआईएफएफ सभी 14 क्लबों को पत्र भेजकर नए सत्र में भागीदारी की पुष्टि मांगेगा। इसके बाद 2026-27 का सत्र घरेलू और बाहरी मुकाबलों के पूर्ण प्रारूप में आयोजित किया जाएगा। यानी प्रत्येक टीम अपने मैदान और प्रतिद्वंद्वी के मैदान दोनों जगह मुकाबले खेलेगी।एफसी गोवा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि पुस्कुर ने कहा कि इस बार संक्षिप्त प्रतियोगिता की जगह पूरा सत्र आयोजित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि एआईएफएफ और सभी क्लब मिलकर लीग को पहले से अधिक सफल बनाएंगे।नई प्रतियोगिता का कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ की अंतरराष्ट्रीय मैच अवधि और एशियाई फुटबॉल परिसंघ की क्लब प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम और महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले क्लबों, जैसे एफसी गोवा और ईस्ट बंगाल फुटबॉल क्लब, को बेहतर तैयारी का अवसर देना है।राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाड़ियों की उपलब्धता पर एआईएफएफ ने कहा कि क्लबों से इस विषय पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। महासंघ ने क्लबों से राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए खिलाड़ियों को अधिक समय के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि नई संयुक्त व्यवस्था के बाद क्लब और एआईएफएफ के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और भारतीय फुटबॉल को इसका सकारात्मक लाभ मिलेगा।

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Jul 9, 2026 - 12:43
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Indian Football में बड़ा फेरबदल! अब Premier League मॉडल पर चलेगी ISL, AIFF का रहेगा कंट्रोल।
भारतीय फुटबॉल के लिए बुधवार का दिन अहम रहा। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और इंडियन सुपर लीग की प्रबंधन समिति ने लीग के भविष्य को लेकर कई बड़े फैसलों की घोषणा की। मौजूद जानकारी के अनुसार, अब इंडियन सुपर लीग के व्यावसायिक अधिकार क्लबों के पास होंगे, जबकि लीग के प्रशासनिक संचालन और महत्वपूर्ण नीतिगत जिम्मेदारियां एआईएफएफ के पास ही रहेंगी।

इस पत्रकार वार्ता में एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण, प्रतियोगिता प्रमुख अक्षय रोहतगी, एफसी गोवा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि पुस्कुर, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड फुटबॉल क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार ताम्हाणे तथा स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव सूद मौजूद रहे।

बता दें कि यह नई व्यवस्था दुनिया के कई प्रमुख फुटबॉल लीग मॉडल की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां क्लब व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करते हैं और राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ प्रशासनिक निगरानी बनाए रखता है। इसका उद्देश्य लीग को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।

एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण ने कहा कि महासंघ का लक्ष्य इंडियन सुपर लीग को एशिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल लीगों में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश और नए राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून का भी ध्यान रखा गया है, ताकि भविष्य में लीग का संचालन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हो सके।

वहीं स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव सूद ने कहा कि क्लब के पहले सत्र में खेल मंत्रालय ने मैदान उपलब्ध कराने सहित कई मामलों में सहयोग दिया। साथ ही एआईएफएफ ने भी लीग की लागत कम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए, जिससे क्लबों को राहत मिली है।

नॉर्थईस्ट यूनाइटेड फुटबॉल क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार ताम्हाणे ने बताया कि अब लीग प्रसारण आधारित मॉडल पर आगे बढ़ेगी। उनका कहना था कि क्लब और एआईएफएफ दोनों का मानना है कि यही मॉडल भविष्य में लीग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। इसके तहत जल्द ही प्रसारण साझेदार और प्रायोजकों के चयन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे।

गौरतलब है कि एआईएफएफ सभी 14 क्लबों को पत्र भेजकर नए सत्र में भागीदारी की पुष्टि मांगेगा। इसके बाद 2026-27 का सत्र घरेलू और बाहरी मुकाबलों के पूर्ण प्रारूप में आयोजित किया जाएगा। यानी प्रत्येक टीम अपने मैदान और प्रतिद्वंद्वी के मैदान दोनों जगह मुकाबले खेलेगी।

एफसी गोवा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि पुस्कुर ने कहा कि इस बार संक्षिप्त प्रतियोगिता की जगह पूरा सत्र आयोजित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि एआईएफएफ और सभी क्लब मिलकर लीग को पहले से अधिक सफल बनाएंगे।

नई प्रतियोगिता का कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ की अंतरराष्ट्रीय मैच अवधि और एशियाई फुटबॉल परिसंघ की क्लब प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम और महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले क्लबों, जैसे एफसी गोवा और ईस्ट बंगाल फुटबॉल क्लब, को बेहतर तैयारी का अवसर देना है।

राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाड़ियों की उपलब्धता पर एआईएफएफ ने कहा कि क्लबों से इस विषय पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। महासंघ ने क्लबों से राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए खिलाड़ियों को अधिक समय के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि नई संयुक्त व्यवस्था के बाद क्लब और एआईएफएफ के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और भारतीय फुटबॉल को इसका सकारात्मक लाभ मिलेगा।

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