Barot Valley: दिल्ली से 400 किमी दूर यह हिल स्टेशन स्वर्ग से नहीं है कम, वीकेंड पर बनाएं ट्रिप का प्लान

जब भी लोग हिल स्टेशन की बात करते हैं, तो शिमला, मसूरी और मनाली जैसे नाम जहन में आते हैं। लेकिन इन जगहों पर पर्यटकों की भीड़ होती है, ऐसे में अगर आप शांत और प्राकृतिक खूबसूरती की तलाश में हैं, तो हिमाचल प्रदेश की कम जानी-पहचानी लेकिन बेमिसाल जगह बरोट घाटी घूमने के लिए जा सकते हैं। दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400 किमी है। यह जगह इतनी शांत, हरी-भरी और सूरम्य है कि आप यहां पर पहुंचकर कहेंगे कि यह असली स्वर्ग है।बरोट घाटी में बहुत शांति है और यहां का नजारा बेहद सुंदर, प्रकृति के करीब और झरनों की आवाज से भरी है। यहां पर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सीमित है। जिससे आप रिलैक्स कर सकते हैं। यहां के सस्ते होमस्टे, सादगी भरे और हिमाचली संस्कृति से जुड़े होते हैं। आप सिर्फ दो दिन के वीकेंड ट्रिप पर हिमाचल प्रदेश के बरोट घाटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Travel Tips: मानसून में भारत की इन जगहों पर घूमना हो सकता है खतरनाक, मुसीबत में फंस सकते हैं आपकहां है बरोट घाटीबता दें कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बरोट घाटी स्थित है। इसको 'मिनी स्विटजरलैंड' भी कहा जाता है। हालांकि यह एक ऑफबीट डेस्टिनेशन है। जो कि घने देवदार के जंगल, झरने, उहल नदी और ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए जाना जाता है। यहां पर घूमने के सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सर्दियों में अक्तूबर से नवंबर के बीच होता है।ऐसे पहुंचे बरोट घाटीराजधानी दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400-450 किमी है। हालांकि यहां पहुंचना सस्ता, आसान और एडवेंचर से भरा है। यहां आने के लिए ट्रेन या बस से पठानकोट या फिर जोगिंदरनगर तक जा सकते हैं। फिर आगे का रास्ता आपको टैक्सी से तय करना होगा।सबसे पहले दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से एचआरटीसी की बस से जोगिंदर नगर पहुंचे। इसका किराया 800-900 रुपए हो सकता है। रात की बस लें, जिससे कि सुबह तक जोगिंदर नगर पहुंच जाएं। अब जोगिंदर नगर में पहुंचकर ब्रेकफास्ट करें और फिर बरोट घाटी के लिए स्थानीय बस से यात्रा करें। जोकि सुबह के समय आसानी से मिल जाती है। इसका किराया करीब 80 रुपए होगा। जोगिंदर नगर से बरोट घाटी की दूरी करीब 30 किमी है।बरोट घाटी ट्रिप की योजनाट्रिप के पहले दिन दोपहर तक जोगिंदर नगर पहुंचकर होम स्टे में फ्रेश होकर घूमने के लिए निकल जाएं। पहले दिन आप ब्रिटिश काल का डैम देखने के लिए जा सकते हैं। यह डैम अंग्रेजों के समय का बना है, जो आज भी अपनी सुंदरता और इंजीनियरिंग से चौंकाता है।इसके बाद आप प्राकृतिक फव्वारा और आसपास के गांव की सैर करने जा सकते हैं। यहां पर छोटे-छोटे गांव, साफ हवा और पगडंडियों के बीच घूमना मन को शांति देता है। फिर वापस आकर होम स्टे में आराम करें।यहां घूमें दूसरे दिनअगले दिन सुबह जल्दी उठकर लापास जलप्रपात के लिए निकल जाएं। साथ ही यहां पर झरने के पास बैठकर चाय और मैगी का लुत्फ उठाना न भूलें। इसके अलावा पास का लापास गांव भी घूमें। जहां पर आपको अनोखा देसी हीटर देने को मिलेगा।लापास गांव से लौटने के दौरान शॉर्टकट रास्ते से चोकड़ी बारोट वैली जाएं। यहां पर रास्ते में आपको घाटियां, घने देवदार के जंगल और एक बहती हुई जलधारा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। नेचुरल फ्रीजर और ट्राउट फिश फार्म जैसे कई अनूठे नजारे आपकी इस ट्रिप को यादगार बना देंगे।इस ट्रिप के दौरान बरोट की अनोखी विरासत के दीदार करना न भूलें। यहां पर एक ऐसी पुरानी कोठी डॉटर्स हाउस है, जिसको ब्रिटिश दौर में एक बेटी को उपहार दिया गया था। वर्तमान समय में यह कोठी टूरिस्ट होमस्टे में बदल चुकी है। आप चाहें तो यहां रुक भी सकते हैं।

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Jul 19, 2025 - 04:30
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Barot Valley: दिल्ली से 400 किमी दूर यह हिल स्टेशन स्वर्ग से नहीं है कम, वीकेंड पर बनाएं ट्रिप का प्लान
जब भी लोग हिल स्टेशन की बात करते हैं, तो शिमला, मसूरी और मनाली जैसे नाम जहन में आते हैं। लेकिन इन जगहों पर पर्यटकों की भीड़ होती है, ऐसे में अगर आप शांत और प्राकृतिक खूबसूरती की तलाश में हैं, तो हिमाचल प्रदेश की कम जानी-पहचानी लेकिन बेमिसाल जगह बरोट घाटी घूमने के लिए जा सकते हैं। दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400 किमी है। यह जगह इतनी शांत, हरी-भरी और सूरम्य है कि आप यहां पर पहुंचकर कहेंगे कि यह असली स्वर्ग है।

बरोट घाटी में बहुत शांति है और यहां का नजारा बेहद सुंदर, प्रकृति के करीब और झरनों की आवाज से भरी है। यहां पर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सीमित है। जिससे आप रिलैक्स कर सकते हैं। यहां के सस्ते होमस्टे, सादगी भरे और हिमाचली संस्कृति से जुड़े होते हैं। आप सिर्फ दो दिन के वीकेंड ट्रिप पर हिमाचल प्रदेश के बरोट घाटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: Travel Tips: मानसून में भारत की इन जगहों पर घूमना हो सकता है खतरनाक, मुसीबत में फंस सकते हैं आप


कहां है बरोट घाटी

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बरोट घाटी स्थित है। इसको 'मिनी स्विटजरलैंड' भी कहा जाता है। हालांकि यह एक ऑफबीट डेस्टिनेशन है। जो कि घने देवदार के जंगल, झरने, उहल नदी और ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए जाना जाता है। यहां पर घूमने के सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सर्दियों में अक्तूबर से नवंबर के बीच होता है।

ऐसे पहुंचे बरोट घाटी

राजधानी दिल्ली से बरोट घाटी की दूरी करीब 400-450 किमी है। हालांकि यहां पहुंचना सस्ता, आसान और एडवेंचर से भरा है। यहां आने के लिए ट्रेन या बस से पठानकोट या फिर जोगिंदरनगर तक जा सकते हैं। फिर आगे का रास्ता आपको टैक्सी से तय करना होगा।

सबसे पहले दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से एचआरटीसी की बस से जोगिंदर नगर पहुंचे। इसका किराया 800-900 रुपए हो सकता है। रात की बस लें, जिससे कि सुबह तक जोगिंदर नगर पहुंच जाएं। अब जोगिंदर नगर में पहुंचकर ब्रेकफास्ट करें और फिर बरोट घाटी के लिए स्थानीय बस से यात्रा करें। जोकि सुबह के समय आसानी से मिल जाती है। इसका किराया करीब 80 रुपए होगा। जोगिंदर नगर से बरोट घाटी की दूरी करीब 30 किमी है।

बरोट घाटी ट्रिप की योजना

ट्रिप के पहले दिन दोपहर तक जोगिंदर नगर पहुंचकर होम स्टे में फ्रेश होकर घूमने के लिए निकल जाएं। पहले दिन आप ब्रिटिश काल का डैम देखने के लिए जा सकते हैं। यह डैम अंग्रेजों के समय का बना है, जो आज भी अपनी सुंदरता और इंजीनियरिंग से चौंकाता है।

इसके बाद आप प्राकृतिक फव्वारा और आसपास के गांव की सैर करने जा सकते हैं। यहां पर छोटे-छोटे गांव, साफ हवा और पगडंडियों के बीच घूमना मन को शांति देता है। फिर वापस आकर होम स्टे में आराम करें।

यहां घूमें दूसरे दिन

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर लापास जलप्रपात के लिए निकल जाएं। साथ ही यहां पर झरने के पास बैठकर चाय और मैगी का लुत्फ उठाना न भूलें। इसके अलावा पास का लापास गांव भी घूमें। जहां पर आपको अनोखा देसी हीटर देने को मिलेगा।

लापास गांव से लौटने के दौरान शॉर्टकट रास्ते से चोकड़ी बारोट वैली जाएं। यहां पर रास्ते में आपको घाटियां, घने देवदार के जंगल और एक बहती हुई जलधारा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। नेचुरल फ्रीजर और ट्राउट फिश फार्म जैसे कई अनूठे नजारे आपकी इस ट्रिप को यादगार बना देंगे।

इस ट्रिप के दौरान बरोट की अनोखी विरासत के दीदार करना न भूलें। यहां पर एक ऐसी पुरानी कोठी डॉटर्स हाउस है, जिसको ब्रिटिश दौर में एक बेटी को उपहार दिया गया था। वर्तमान समय में यह कोठी टूरिस्ट होमस्टे में बदल चुकी है। आप चाहें तो यहां रुक भी सकते हैं।

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