Bangladesh Election: क्या 'दूसरी आजादी' का सपना होगा पूरा? शेख हसीना के निर्वासन के बाद सबसे बड़े चुनाव पर एक नजर

बांग्लादेश अपने स्वतंत्रता काल के बाद से सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक के लिए बस कुछ ही दिन दूर है, क्योंकि देश अपने अगले प्रधानमंत्री और सरकार के चयन के लिए राष्ट्रव्यापी मतदान की तैयारी कर रहा है। यह मतदान अगस्त 2024 के जन विद्रोह की पृष्ठभूमि में हो रहा है - जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से छात्रों ने किया था - जिसके परिणामस्वरूप लगभग डेढ़ दशक के शासन के बाद शेख हसीना की सरकार का नाटकीय रूप से पतन हो गया और एक अंतरिम प्रशासन का गठन हुआ। देश के भीतर अक्सर इसे दूसरी स्वतंत्रता के रूप में वर्णित किया जाता है, इस आंदोलन ने बांग्लादेश को मौलिक रूप से नया आकार दिया है, जिससे शासन, जवाबदेही और लोकतांत्रिक वैधता के बारे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।इसे भी पढ़ें: भारत-यूरोपीय संघ FTA से पड़ोसी देशों में हलचल! पाकिस्तान और बांग्लादेश के टेक्सटाइल बाजार पर मंडराया खतरामतदान कब और कैसे होगा?बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने 12 फरवरी, 2026 (गुरुवार) को मतदान दिवस के रूप में पुष्टि की है। कड़े नियंत्रण वाले प्रचार अभियान के बाद मतदाता मतदान केंद्रों की ओर रवाना होंगे। नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से 29 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई, जिसके बाद 22 जनवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर प्रचार अभियान शुरू हुआ। चुनावी कानून के अनुसार, सभी राजनीतिक प्रचार अभियान 10 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक समाप्त होने चाहिए, जिससे मतदान से पहले 48 घंटे का शांति काल (कूलिंग-ऑफ पीरियड) सुनिश्चित हो सके। चुनाव दिवस पर मतदान का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक रहेगा, जो पिछले चुनावों की तुलना में एक घंटा अधिक है।इसे भी पढ़ें: Bangladesh Land Scam: पूर्व PM Sheikh Hasina को 10 साल की जेल, परिवार के सदस्य भी दोषी कराररहमान के 65 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द करने की तैयारीबांग्लादेश का चुनाव अब सत्ता में 'परिवर्तन' से ज्यादा 'क्षेत्रीय संतुलन' का जरिया बनता दिख रहा है। चुनावी प्रक्रिया में अमेरिका और तुर्किये की दखलंदाजी की खबरों के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान के खिलाफ साजिश की आशंका जताई है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 65 उम्मीदवारों के नामांकन लोन डिफॉल्ट और दोहरी नागरिकता के आधार पर खारिज किए जाने की तैयारी है। ऐसा हुआ तो चुनाव एकतरफा हो जाएगा। बीएनपी के आरोप ऐसे वक्त में सामने आए हैं, जब हाल ही खुलासा हुआ है कि अमेरिका जमात-ए-इस्लामी को चुनाव में जिताने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी वेबसाइट 'द इंटरसेप्ट' ने दावा किया है कि अमेरिकी विदेश विभाग दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संतुलन के लिए जमात को उदार इस्लामी पार्टी मानकर मदद कर रहा है। इस बीच, बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे और अवामी लीग के नेता साजिब वाजेद जॉय सोमवार को कोलकाता में एक रैली को संबोधित करेंगे।78 सीटों पर बागियों से कड़ी टक्कर भी मिल रही, वोट बंटने का डरबीएनपी देशभर में लोकप्रियता के बावजूद चुनावी दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है। बीएनपी की चुनावी तैयारियों को पार्टी प्रमुख खालिदा जिया के निधन से भी बड़ा झटका लगा है। इससे पार्टी की जमीनी गतिविधियां प्रभावित हुई। बीएनपी ने सबसे ज्यादा 288 तारिक रहमान उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से 4 की उम्मीदवारी रद्द हो चुकी है। 78 सीटों पर बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिनमें से 46 को स्थानीय कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। इससे बीएनपी का वोट बैंक बंटने का खतरा है, जिसका फायदा जमात को मिल सकता है।

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Feb 4, 2026 - 18:12
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Bangladesh Election: क्या 'दूसरी आजादी' का सपना होगा पूरा? शेख हसीना के निर्वासन के बाद सबसे बड़े चुनाव पर एक नजर
बांग्लादेश अपने स्वतंत्रता काल के बाद से सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक के लिए बस कुछ ही दिन दूर है, क्योंकि देश अपने अगले प्रधानमंत्री और सरकार के चयन के लिए राष्ट्रव्यापी मतदान की तैयारी कर रहा है। यह मतदान अगस्त 2024 के जन विद्रोह की पृष्ठभूमि में हो रहा है - जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से छात्रों ने किया था - जिसके परिणामस्वरूप लगभग डेढ़ दशक के शासन के बाद शेख हसीना की सरकार का नाटकीय रूप से पतन हो गया और एक अंतरिम प्रशासन का गठन हुआ। देश के भीतर अक्सर इसे दूसरी स्वतंत्रता के रूप में वर्णित किया जाता है, इस आंदोलन ने बांग्लादेश को मौलिक रूप से नया आकार दिया है, जिससे शासन, जवाबदेही और लोकतांत्रिक वैधता के बारे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: भारत-यूरोपीय संघ FTA से पड़ोसी देशों में हलचल! पाकिस्तान और बांग्लादेश के टेक्सटाइल बाजार पर मंडराया खतरा

मतदान कब और कैसे होगा?

बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने 12 फरवरी, 2026 (गुरुवार) को मतदान दिवस के रूप में पुष्टि की है। कड़े नियंत्रण वाले प्रचार अभियान के बाद मतदाता मतदान केंद्रों की ओर रवाना होंगे। नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से 29 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई, जिसके बाद 22 जनवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर प्रचार अभियान शुरू हुआ। चुनावी कानून के अनुसार, सभी राजनीतिक प्रचार अभियान 10 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक समाप्त होने चाहिए, जिससे मतदान से पहले 48 घंटे का शांति काल (कूलिंग-ऑफ पीरियड) सुनिश्चित हो सके। चुनाव दिवस पर मतदान का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक रहेगा, जो पिछले चुनावों की तुलना में एक घंटा अधिक है।

इसे भी पढ़ें: Bangladesh Land Scam: पूर्व PM Sheikh Hasina को 10 साल की जेल, परिवार के सदस्य भी दोषी करार

रहमान के 65 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द करने की तैयारी

बांग्लादेश का चुनाव अब सत्ता में 'परिवर्तन' से ज्यादा 'क्षेत्रीय संतुलन' का जरिया बनता दिख रहा है। चुनावी प्रक्रिया में अमेरिका और तुर्किये की दखलंदाजी की खबरों के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान के खिलाफ साजिश की आशंका जताई है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 65 उम्मीदवारों के नामांकन लोन डिफॉल्ट और दोहरी नागरिकता के आधार पर खारिज किए जाने की तैयारी है। ऐसा हुआ तो चुनाव एकतरफा हो जाएगा। बीएनपी के आरोप ऐसे वक्त में सामने आए हैं, जब हाल ही खुलासा हुआ है कि अमेरिका जमात-ए-इस्लामी को चुनाव में जिताने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी वेबसाइट 'द इंटरसेप्ट' ने दावा किया है कि अमेरिकी विदेश विभाग दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संतुलन के लिए जमात को उदार इस्लामी पार्टी मानकर मदद कर रहा है। इस बीच, बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे और अवामी लीग के नेता साजिब वाजेद जॉय सोमवार को कोलकाता में एक रैली को संबोधित करेंगे।

78 सीटों पर बागियों से कड़ी टक्कर भी मिल रही, वोट बंटने का डर

बीएनपी देशभर में लोकप्रियता के बावजूद चुनावी दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है। बीएनपी की चुनावी तैयारियों को पार्टी प्रमुख खालिदा जिया के निधन से भी बड़ा झटका लगा है। इससे पार्टी की जमीनी गतिविधियां प्रभावित हुई। बीएनपी ने सबसे ज्यादा 288 तारिक रहमान उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से 4 की उम्मीदवारी रद्द हो चुकी है। 78 सीटों पर बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिनमें से 46 को स्थानीय कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। इससे बीएनपी का वोट बैंक बंटने का खतरा है, जिसका फायदा जमात को मिल सकता है।

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