Ayodhya-Gyanvapi के बाद अब Bhojshala पर नज़रें, Supreme Court करेगा High Court के फैसले की समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें धार जिले के विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था। यह दशकों पुराने भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद का नया घटनाक्रम है। मुस्लिम अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी और एडवोकेट निज़ाम पाशा ने जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की ज़रूरत है।इसे भी पढ़ें: Ram Mandir चंदा घोटाले पर Supreme Court सख्त, CBI जांच की मांग पर अगले हफ्ते होगी सुनवाईचीफ़ जस्टिस ने अपील करने वालों के वकील से कहा कि वे याचिकाओं में मौजूद कमियों को दूर करें और कहा कि इन मामलों को जल्द ही एक बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा जाएगा। 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के कई दशक पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र और ASI मिलकर भोजशाला परिसर के प्रशासन और मैनेजमेंट के बारे में फ़ैसला ले सकते हैं।इसे भी पढ़ें: बिहार: कोचिंग संस्थान गोलीबारी मामले में खान सर और उनके तीन कर्मचारियों को पटना कोर्ट से मिली अग्रिम जमानतASI के तहत संरक्षित इस जगह को हिंदू समुदाय देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर 'भोजशाला' मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस इमारत को 'कमाल मौला मस्जिद' बताता है। हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हिंदू पक्षों ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है, जिसमें मांग की गई है कि भोजशाला परिसर विवाद से जुड़ी किसी भी अपील पर उनकी बात सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट होने का इंतज़ार कर रहा है, जहाँ मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी है, जबकि हिंदू पक्षों ने कोई भी आदेश पारित होने से पहले सुनवाई की मांग की है।

PNSPNS
Jul 13, 2026 - 14:52
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Ayodhya-Gyanvapi के बाद अब Bhojshala पर नज़रें, Supreme Court करेगा High Court के फैसले की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें धार जिले के विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था। यह दशकों पुराने भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद का नया घटनाक्रम है। मुस्लिम अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी और एडवोकेट निज़ाम पाशा ने जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की ज़रूरत है।

इसे भी पढ़ें: Ram Mandir चंदा घोटाले पर Supreme Court सख्त, CBI जांच की मांग पर अगले हफ्ते होगी सुनवाई

चीफ़ जस्टिस ने अपील करने वालों के वकील से कहा कि वे याचिकाओं में मौजूद कमियों को दूर करें और कहा कि इन मामलों को जल्द ही एक बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा जाएगा। 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के कई दशक पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र और ASI मिलकर भोजशाला परिसर के प्रशासन और मैनेजमेंट के बारे में फ़ैसला ले सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: बिहार: कोचिंग संस्थान गोलीबारी मामले में खान सर और उनके तीन कर्मचारियों को पटना कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

ASI के तहत संरक्षित इस जगह को हिंदू समुदाय देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर 'भोजशाला' मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस इमारत को 'कमाल मौला मस्जिद' बताता है। हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हिंदू पक्षों ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है, जिसमें मांग की गई है कि भोजशाला परिसर विवाद से जुड़ी किसी भी अपील पर उनकी बात सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट होने का इंतज़ार कर रहा है, जहाँ मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी है, जबकि हिंदू पक्षों ने कोई भी आदेश पारित होने से पहले सुनवाई की मांग की है।

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