नासिक स्थित सैन्य उड़ान प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित पॉसिंग आउट परेड के बाद एक युवा सेना अधिकारी का अपनी प्रियसी को विवाह प्रस्ताव देना इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सेना के हेलिकॉप्टर के सामने घुटनों के बल बैठकर किया गया यह प्रस्ताव जहां सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को भावुक कर गया, वहीं सेना के भीतर इसे लेकर अनुशासन और मर्यादा पर बहस भी शुरू हो गई है।
युवा कप्तान ने जैसे ही अपनी प्रियसी को अंगूठी पहनाई, वहां मौजूद परिवारजन, साथी अधिकारी और अतिथि इस पल के साक्षी बन गए। पांच वर्षों के प्रेम को उस विशेष दिन एक नया नाम देने का सपना मानो उसी क्षण पूरा हो गया। अधिकारी ने बाद में मीडिया से कहा कि यह दिन केवल उनके सैन्य जीवन की उपलब्धि नहीं था, बल्कि निजी जीवन का भी सबसे सुंदर मोड था। उन्होंने कहा कि वर्षों की कठिन मेहनत के बाद वह और उनके साथी आज पायलट और प्रशिक्षक बने हैं, इसलिए उन्हें लगा कि अपनी होने वाली जीवनसंगिनी को विवाह प्रस्ताव देने के लिए इससे बेहतर दिन कोई नहीं हो सकता।
यह भावुक दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और इसके बाद सेना ने संबंधित कप्तान से स्पष्टीकरण मांग लिया। रक्षा सूत्रों के अनुसार सेना अधिकारी की भावनाओं को समझती है, लेकिन सैन्य हेलिकॉप्टर और आधिकारिक परिसर का निजी क्षणों के लिए उपयोग स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं माना गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे सैन्य मर्यादा से जुड़ा विषय बताते हुए कप्तान से जवाब मांगा है। हालांकि इस मामले में किसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना नहीं जताई जा रही है। सेना का जोर अधिकतर युवा अधिकारी को सैन्य आचरण और वर्दी की गरिमा के प्रति संवेदनशील बनाने पर है।
उधर, इस पूरे विवाद के बीच सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने युवा अधिकारी का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि एक सैनिक देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने का साहस रखता है, तो उसके प्रेम को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रेम का सार्वजनिक इजहार अनुशासन को कमजोर नहीं करता, बल्कि यह एक जवान दिल की सच्ची भावना को दर्शाता है। बाइट।
बहरहाल, देशभर में इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि कठोर वर्दियों और सैन्य अनुशासन के पीछे भी धड़कते हुए दिल होते हैं, जो प्रेम, परिवार और भावनाओं से उतने ही गहराई से जुड़े रहते हैं जितना कोई आम इंसान।